एक दशक बाद मोटे अनाज पर लौटे किसान, नेचुरल कपास-अरहर और मखाना से बदला कमाई का तरीका—पढ़ें इनसाइड स्टोरी – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 अक्टूबर 2026 को ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में खेती-किसानी, प्राकृतिक खेती, मोटे अनाज और किसानों के उत्पादों को नए बाजारों तक पहुंचाने की कई प्रेरक मिसालें दीं. उन्होंने पंजाब में प्राकृतिक कपास की खेती, मेघालय में मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देने वाले किसानों और महिलाओं, बिहार के मखाने तथा कर्नाटक की अरहर दाल के अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने का जिक्र किया. पीएम मोदी का जोर इस बात पर रहा कि किसान पारंपरिक खेती को आधुनिक तरीकों, प्रसंस्करण और बेहतर पैकेजिंग से जोड़कर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं.

पीएम मोदी ने पंजाब के मालवा क्षेत्र में काम कर रहे खेती विरासत मिशन का जिक्र किया. इस संस्था की ‘नव-त्रिंजन’ पहल के तहत प्राकृतिक रंगों वाली कपास और पारंपरिक बुनाई को बढ़ावा दिया जा रहा है. रामनदीप कौर, सुनेहा देवी और रजनी कौर जैसी महिलाओं ने बुनाई का हुनर सीखकर रोजगार के नए अवसर बनाए. रेखा रानी द्वारा बुना गया शॉल राष्ट्रपति को भेंट किए जाने का भी उल्लेख किया गया.

नागालैंड के कोहिमा जिले के केजोमा गांव में एक दशक से अधिक समय तक मोटे अनाज की खेती बंद रही थी. स्थानीय समुदाय ने 2024 में दोबारा इसकी खेती शुरू की और 2025 में गांव में पहला मिलेट फेस्टिवल आयोजित किया. अब यहां मोटे अनाज से बने उत्पादों की मांग बढ़ने लगी है.

मेघालय के वेस्ट जैंतिया हिल्स जिले के खंडुली गांव की दारापबियांग मुलीह और दाइइडलांगकी सुचियांग ने पारंपरिक रागी यानी फिंगर मिलेट से कुकीज, केक, मफिन और बच्चों के लिए आहार जैसे उत्पाद तैयार करने शुरू किए. इससे स्थानीय मोटे अनाज की मांग बढ़ाने और किसानों को बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिली.

पीएम मोदी ने वेस्ट गारो हिल्स जिले के सदोलपारा गांव के किसान चेकजिंग संगमा का उल्लेख किया. उन्होंने आधुनिक कृषि तरीकों से मोटे अनाज की खेती शुरू की, जिससे उनकी आय बढ़ाने के साथ गांव में भी इस फसल के प्रति जागरूकता बढ़ी.

मेघालय के खंडुली गांव की महिला किसान दारापबियांग मुलीह और दाइइडलांगकी सुचियांग (ऊपर). बिहार के मखाना और अरहर(नीचे).

पीएम मोदी ने बताया कि बिहार के पूर्णिया का मखाना अब ग्रीस तक पहुंच रहा है, जबकि कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल मालदीव भेजी जा रही है. उन्होंने इसे भारतीय किसानों के लिए नए अंतरराष्ट्रीय बाजार खुलने का उदाहरण बताया.

पीएम मोदी ने ‘शबरी नेचुरल्स’ पहल का जिक्र करते हुए बताया कि जनजातीय समुदाय शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से बने उत्पादों को आकर्षक पैकेजिंग के साथ बाजार में पहुंचा रहे हैं. इस पहल की पैकेजिंग को जापान का प्रतिष्ठित ‘गुड डिजाइन अवॉर्ड’ मिलने का भी उल्लेख किया गया.

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