एग्रीवेट: भारत में प्राकृतिक रबर की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं. घरेलू बाजार में RSS-IV ग्रेड रबर का भाव बढ़कर 290 रुपये प्रति किलो हो गया है. इसकी मुख्य वजह टायर बनाने वाली कंपनियों की ओर से मजबूत मांग और बाजार में रबर की सीमित उपलब्धता है. इसके चलते भारतीय बाजार में प्राकृतिक रबर की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार से भी ज्यादा हो गई है. व्यापारियों के मुताबिक, घरेलू बाजार में प्राकृतिक रबर की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार के मुकाबले करीब 20 रुपये प्रति किलो अधिक है. थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में इसकी कीमत करीब 270 रुपये प्रति किलो है. वहीं, भारत में ब्लॉक रबर का भाव 273 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 245 रुपये प्रति किलो है.
इंडियन रबर डीलर्स फेडरेशन के अध्यक्ष जॉर्ज वैली ने बिजनेसलाइन को बताया कि नियमित रूप से रबर निकालने के बावजूद बाजार में इसकी उपलब्धता उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ी है. उन्होंने कहा कि प्राकृतिक रबर और कंपाउंड रबर का आयात भी लगातार ऊंचे स्तर पर बना हुआ है. हर महीने औसतन करीब 75,000 टन रबर का आयात हो रहा है.
लेटेक्स और कप लंप रबर की कीमतें क्रमशः 300 रुपये और 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं. बेहतर दाम मिलने के कारण कई किसान शीट रबर बनाने के बजाय इन विकल्पों को अपना रहे हैं. इससे बाजार में शीट रबर की कमी और बढ़ गई है. इंडियन रबर डीलर्स फेडरेशन के अध्यक्ष जॉर्ज वैली के मुताबिक, किसान ज्यादा कमाई के लिए उत्पादन का तरीका बदल रहे हैं. वहीं, किसानों को आने वाले महीनों में रबर की पैदावार बढ़ने की उम्मीद है. प्रमुख रबर उत्पादक क्षेत्रों में पूर्वोत्तर मॉनसून की बारिश से उत्पादन को मदद मिल सकती है. इससे बाजार में रबर की उपलब्धता बेहतर होने की संभावना है.
हार्नेज फिन एनालिसिस के निदेशक हरीश एमवी के मुताबिक, रबर की कीमतों में तेजी की एक बड़ी वजह पश्चिम एशिया का संघर्ष है. भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतें बढ़ी हैं. इससे सिंथेटिक रबर बनाने की लागत बढ़ गई है. ऐसे में निर्माता सिंथेटिक रबर के बजाय प्राकृतिक रबर का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं, जिससे इसकी मांग में तेजी आई है.
भारत के दक्षिणी रबर उत्पादक क्षेत्रों में असामान्य गर्मी के कारण लेटेक्स का उत्पादन घट गया है. वहीं, ऑटो सेक्टर में रबर की मांग घरेलू आपूर्ति से ज्यादा बनी हुई है. इससे आयात को बढ़ावा मिला है और कीमतों को सहारा मिला है. विशेषज्ञों के मुताबिक, अगस्त में कीमतों में तेजी आने के बाद चीन के खरीदार सतर्क हो गए हैं. इससे कीमतों में आगे बड़ी बढ़ोतरी सीमित रही है. आने वाले समय में रबर की कीमतें 300 रुपये प्रति किलो के आसपास मजबूत बनी रह सकती हैं. हालांकि, मौसम की स्थिति सुधरने से उत्पादन बढ़ने और एशिया के बाहर मांग कमजोर रहने पर कीमतों में ज्यादा तेजी नहीं आने की संभावना है.