एग्रीवेट: पंजाब में इस साल धान की सरकारी खरीद को लेकर मुश्किलें बढ़ सकती हैं. राज्य में गैर-बासमती धान का उत्पादन 220 लाख टन से ज्यादा रहने का अनुमान है, जबकि केंद्र सरकार ने सरकारी खरीद के लिए 180 लाख टन की सीमा तय की है. ऐसे में मंडियों में आने वाला धान तय सीमा से ज्यादा हो सकता है. इससे सरकारी खरीद व्यवस्था और राज्य के बजट पर दबाव बढ़ने की आशंका है.
गैर-बासमती धान की खरीद सरकारी एजेंसियां करती हैं. इस धान का इस्तेमाल सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत लोगों को अनाज उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है. पिछले वर्षों के रुझान के मुताबिक, कुल उत्पादन का करीब 90 फीसदी हिस्सा खरीद के लिए मंडियों में पहुंचता है. इस हिसाब से इस साल मंडियों में आने वाले धान की मात्रा केंद्र की तय सीमा से ज्यादा हो सकती है.
पंजाब के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा कि इस साल धान की खरीद पिछले वर्षों के मुकाबले ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकती है. उनके मुताबिक, केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने संकेत दिया है कि तय सीमा से ज्यादा धान स्वीकार नहीं किया जाएगा. अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार को उम्मीद है कि खरीद तय सीमा के भीतर रहेगी. हालांकि, अगर मंडियों में धान की आवक निर्धारित मात्रा से ज्यादा होती है, तो राज्य सरकार केंद्र से खरीद की सीमा बढ़ाने की मांग कर सकती है.
शुरुआत में केंद्र सरकार ने पंजाब के लिए 156 लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य तय किया था. यह मात्रा पिछले साल राज्य में हुई खरीद के बराबर थी. हालांकि, पंजाब सरकार ने केंद्र से खरीद का लक्ष्य बढ़ाने की मांग की. इसके बाद केंद्र ने पिछले तीन साल में हुई औसत खरीद को आधार बनाया और लक्ष्य बढ़ाकर 171 लाख टन कर दिया. इसके बावजूद पंजाब में इस साल धान का उत्पादन 220 लाख टन से ज्यादा रहने का अनुमान है. ऐसे में मंडियों में आने वाले धान की मात्रा तय खरीद लक्ष्य से अधिक हो सकती है. राज्य सरकार को आशंका है कि अगर ऐसा हुआ, तो अतिरिक्त धान की खरीद और उसके प्रबंधन में दिक्कत आ सकती है.
पंजाब में इस साल धान की पैदावार में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. राज्य के कृषि निदेशक गुरजीत सिंह बराड़ के मुताबिक, फसल कटाई के प्रयोगों के नतीजों में प्रति हेक्टेयर धान की पैदावार 67.35 क्विंटल आंकी गई है. पिछले सीजन में यह 58.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर थी. यानी प्रति हेक्टेयर पैदावार में करीब 8.75 क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है. इसके आधार पर राज्य में इस साल 220 लाख टन या इससे ज्यादा धान उत्पादन होने की उम्मीद है.
पंजाब में इस खरीफ सीजन के दौरान कुल 32.76 लाख हेक्टेयर में धान की खेती की गई है. इसमें से करीब 6.5 लाख हेक्टेयर में बासमती की खेती हुई है. बासमती धान की सरकारी एजेंसियां सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लिए खरीद नहीं करती हैं. वहीं, बाकी करीब 26.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गैर-बासमती धान की खेती हुई है. इस धान की सरकारी एजेंसियां न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद करती हैं. ऐसे में गैर-बासमती धान की बंपर पैदावार होने पर सरकारी खरीद का दबाव बढ़ सकता है.