कांटों वाली सिंघी मछली की हार्वेस्टिंग अब चुटकियों में! किसानों के लिए कमाल की तकनीक, इस बड़े खुलासे से मचा हड़कंप – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Singhi Fish Farming: बिहार में मछली पालन किसानों के लिए आमदनी का एक अच्छा विकल्प बन रहा है. खासकर सिंघी मछली की मांग और बाजार में मिलने वाली कीमत के कारण मत्स्य पालकों की इसमें दिलचस्पी बढ़ रही है. हालांकि, सिंघी मछली का पालन करने में सबसे बड़ी चुनौती इसकी हार्वेस्टिंग यानी मछली को पानी से बाहर निकालना है. इसके शरीर पर कांटे होने के कारण इसे पकड़ना मुश्किल हो सकता है. ऐसे में बायोफ्लॉक तकनीक मछली पालन को आसान बनाने में मददगार साबित हो सकती है. इस तकनीक में कम जगह में मछली पालन करने के साथ जरूरत पड़ने पर पानी निकालकर मछलियों को आसानी से इकट्ठा किया जा सकता है.

सिंघी मछली  पानी की निचली सतह पर रहने वाली प्रजाति है. तालाब में इसका पालन करने पर हार्वेस्टिंग के समय काफी परेशानी होती है. मछलियों को निकालने के लिए तालाब का पानी कम करना या बाहर निकालना पड़ सकता है. इसके बाद भी मछलियों को इकट्ठा करना आसान नहीं होता. वहीं, बायोफ्लॉक सिस्टम में टैंक के जरिए मछली पालन किया जाता है. इसमें कम जगह और सीमित पानी में मत्स्य पालन शुरू किया जा सकता है. बिहार मत्स्य पालन विभाग भी बायोफ्लॉक तकनीक को कम भूमि और कम पानी में गहन मत्स्य उत्पादन का विकल्प मानता है.

बायोफ्लॉक तकनीक  में सिंघी मछली की हार्वेस्टिंग करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है. टैंक में पानी निकालने की व्यवस्था होने से जरूरत के अनुसार पानी बाहर निकाला जा सकता है. पानी का स्तर कम होने पर मछलियों को एक जगह इकट्ठा करके बाहर निकालना सुविधाजनक हो जाता है. इससे मछलियों को पकड़ने में लगने वाली मेहनत कम हो सकती है. हालांकि, पानी निकालने की प्रक्रिया के दौरान मछलियों की सुरक्षा और टैंक में ऑक्सीजन की व्यवस्था का ध्यान रखना जरूरी है.

तालाब में सिंघी मछली पालन करने वाले किसानों को हार्वेस्टिंग के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है. मछलियां नीचे की सतह पर रहती हैं, इसलिए पानी कम करने के बाद उन्हें पकड़ना पड़ता है. इसके लिए मोटर, जाल और अन्य उपकरणों की जरूरत पड़ सकती है. इससे अतिरिक्त खर्च भी बढ़ सकता है. इसके मुकाबले बायोफ्लॉक सिस्टम में पानी की निकासी और मछलियों को इकट्ठा करने की व्यवस्था पहले से बनाई जा सकती है. हालांकि, बायोफ्लॉक में टैंक, बिजली, एरेशन और पानी की गुणवत्ता बनाए रखने की लागत को भी ध्यान में रखना चाहिए.

बिहार मत्स्य पालन विभाग  की वित्तीय वर्ष 2026-27 की योजनाओं में बायोफ्लॉक तकनीक से मत्स्य पालन के लिए सहायता संबंधी प्रावधान उपलब्ध हैं. विभाग की प्रकाशित जानकारी के अनुसार, 4 मीटर व्यास और 1.5 मीटर ऊंचाई वाले सात टैंकों की लघु बायोफ्लॉक इकाई की निर्धारित लागत 7.50 लाख रुपये है. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत सूचीबद्ध इस इकाई पर सामान्य वर्ग के लिए 40 प्रतिशत और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा महिला लाभार्थियों के लिए 60 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान दिया गया है. पात्रता और वर्तमान आवेदन की शर्तें विभाग से जरूर जांचें.

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