पलायन रोकने के लिए सरकार की बड़ी पहल, गांवों में डेयरी-मुर्गीपालन को मिलेगा बढ़ावा.. बनेंगे हजारों शेड – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: कर्नाटक में भीषण सूखे के कारण ग्रामीण परिवारों के सामने रोजगार और आजीविका का संकट बढ़ रहा है. इसे देखते हुए राज्य सरकार गांवों में ही रोजगार के अवसर पैदा करने की योजना बना रही है. नई योजना के तहत गांवों में मुर्गीपालन और डेयरी का काम करने वाले किसानों के लिए हजारों शेड बनाए जाएंगे, ताकि गरीब परिवारों को कमाई का साधन मिले और उन्हें काम की तलाश में पलायन न करना पड़े. खास बात यह है कि गांवों और ग्राम पंचायतों में स्वयं सहायता समूहों (SHG) की जमीन पर पशुपालन के लिए शेड बनाए जाएंगे. इन शेड के निर्माण में मजदूरी और सामग्री का खर्च ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज विभाग (RDPR) उठाएगा. इसके लिए VB-G RAM G योजना के तहत धन उपलब्ध कराया जाएगा.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को गांव में ही आजीविका के साधन उपलब्ध कराना है. शेड बनने के बाद परिवार मुर्गीपालन और डेयरी जैसे काम शुरू कर सकेंगे. पशुपालन विभाग और सरकार की अन्य योजनाओं के जरिए भी उन्हें आय बढ़ाने में मदद दी जाएगी. इससे ग्रामीण परिवारों को रोजगार मिलने और उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है.

सरकार की योजना गांवों में भेड़-बकरी पालन, मवेशियों और मुर्गीपालन के लिए शेड बनाने की है. इसका खास लाभ भूमिहीन कृषि मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीण परिवारों को मिलेगा. इस कार्यक्रम को VB-G RAM G योजना के तहत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) और पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग के सहयोग से लागू किया जाएगा. जिला पंचायतों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEO) को लिखे पत्र में प्रधान सचिव पंकज कुमार पांडेय ने कहा कि अल नीनो के असर और भीषण सूखे के कारण भूमिहीन कृषि मजदूरों और गरीब ग्रामीण परिवारों का पलायन बढ़ा है. सरकार का उद्देश्य गांवों में ही रोजगार और कमाई के साधन उपलब्ध कराकर इन परिवारों को पलायन करने से रोकना है.

कर्नाटक सरकार की प्राथमिकता गांवों में ही रोजगार और कमाई के स्थायी साधन उपलब्ध कराकर ग्रामीण परिवारों का पलायन रोकना है. प्रधान सचिव पंकज कुमार पांडेय ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ऐसे कमजोर परिवारों की पहचान की जाए, जिन्हें काम की तलाश में गांव छोड़ना पड़ सकता है. इसके साथ ही यह भी आकलन किया जाए कि कौन-से परिवार आजीविका से जुड़े काम शुरू करने के लिए उपयुक्त हैं. परिवारों की जरूरत और उनकी क्षमता के आधार पर उन्हें पशुपालन के लिए शेड बनाने और खेती से जुड़े अन्य काम शुरू करने में मदद दी जाएगी.

अधिकारियों को स्वयं सहायता समूहों की सहायता से भूमिहीन कृषि मजदूरों  और जरूरतमंद ग्रामीण परिवारों की पहचान करने को कहा गया है. इस योजना को गांव और ग्राम पंचायत स्तर पर लागू करने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के स्वयं सहायता समूहों, सामुदायिक संगठनों और पशुपालन विभाग के बीच तालमेल बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं. सरकार का लक्ष्य ग्रामीण परिवारों को गांव में ही कमाई के अवसर देकर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करना है.

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