FFS को सरकार बता रही उपलब्धि, लेकिन किसानों को नहीं मिल रही पर्याप्त खाद.. अन्नदाता परेशान – एग्रीवेट

Team Agrivate
9 Min Read

एग्रीवेट: केंद्र सरकार भले ही फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर्स सेल्स (FFS) के पायलट प्रोजेक्ट को सफल बता रही है, लेकिन कई राज्यों में किसानों को खाद लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा समेत कई राज्यों में किसान एक बोरी खाद के लिए भी परेशान हैं. खासकर राजस्थान में किसानों को खाद के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है. राजस्थान के किसानों का कहना है कि FFS व्यवस्था के तहत खाद लेने के लिए उन्हें 20 से 50 किलोमीटर तक जाना पड़ रहा है. इसके बावजूद कई बार दिनभर इंतजार करने के बाद भी उन्हें खाद नहीं मिलती और खाली हाथ लौटना पड़ता है. इससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है. वहीं, खाद की उपलब्धता से जुड़ी इन समस्याओं के बीच राजस्थान के किसानों ने FFS व्यवस्था को बंद करने की मांग की है. किसानों का कहना है कि खाद खरीदने की प्रक्रिया आसान होनी चाहिए, ताकि उन्हें समय पर उर्वरक मिल सके और खेती का काम प्रभावित न हो.

राजस्थान के टोंक जिले की निवाई तहसील के पलेई गांव के किसान दशरथ सिंह पलेई का कहना है कि फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर्स सेल्स (FFS) व्यवस्था के तहत खाद खरीदने में किसानों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने किसान इंडिया को बताया कि खाद खरीदने के लिए ऐप के जरिए ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है, लेकिन कई किसान स्मार्टफोन चलाना नहीं जानते. ऐसे में उन्हें पैसे खर्च करके सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) जाना पड़ता है. दशरथ सिंह ने बताया कि सीएससी सेंटर से खाद के लिए आवेदन करने के बाद जिस दुकान से खाद खरीदने का ओटीपी मिलता है, वह गांव से 20 से 50 किलोमीटर तक दूर हो सकती है. किसान जब इतनी दूर सफर करके दुकान पर पहुंचते हैं, तो कई बार दुकान बंद मिलती है. ऐसे में उन्हें बिना खाद लिए ही घर लौटना पड़ता है.

किसान ने बताया कि अगर दुकान खुली भी मिलती है और खाद मिल जाती है, तो कई बार उन्हें जरूरत की आधी मात्रा ही मिल पाती है. इससे खेती का काम प्रभावित होने की आशंका रहती है. दशरथ सिंह के मुताबिक, FFS व्यवस्था से खाद खरीदने की प्रक्रिया आसान होने के बजाय किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. दशरथ सिंह पलेई ने बताया कि जिले में उनके जैसे हजारों किसान खाद के लिए भटक रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनके पास 20 बीघा जमीन है और वह कई सालों से गेहूं, सरसों, बाजरा और मक्का की खेती कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि पहले पंचायत के अंदर ही सहकारी दुकान से उचित कीमत पर खाद मिल जाती थी और ज्यादा परेशानी नहीं होती थी. लेकिन केंद्र सरकार की FFS व्यवस्था लागू होने के बाद खाद खरीदने के लिए 20 से 50 किलोमीटर तक दूर जाना पड़ रहा है. इसके बावजूद जरूरत के मुताबिक खाद नहीं मिल रही है. उन्होंने बताया कि किसानों ने प्रशासन से इस व्यवस्था पर रोक लगाने की मांग की है.

बिहार के किसानों में भी फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर्स सेल्स (FFS) व्यवस्था को लेकर नाराजगी है. पटना जिले के पालीगंज थाना क्षेत्र के जलपुरा गांव के किसान बब्लू सिंह ने बताया कि इस व्यवस्था के लागू होने के बाद पहले की तरह पैक्स (PACS) से पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल रही है. खाद खरीदने से पहले किसानों को अपना फार्मर रजिस्ट्री नंबर दिखाना पड़ रहा है. उनका आरोप है कि पैक्सकर्मी अपनी सुविधा के हिसाब से खाद दे रहे हैं. ऐसे में किसानों को कई बार निजी दुकानों से महंगे दाम पर खाद खरीदनी पड़ती है.

बब्लू सिंह के मुताबिक, निजी दुकानदार यूरिया की एक बोरी पर सरकारी दर से 50 रुपये और डीएपी की एक बोरी पर 500 रुपये तक ज्यादा वसूल रहे हैं. इससे खेती की लागत बढ़ रही है. वहीं, पटना जिले के दुल्हिन बाजार थाना क्षेत्र के सीही गांव के किसान अश्विनी शर्मा ने भी FFS व्यवस्था पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि सरकार को इस व्यवस्था को तुरंत बंद करना चाहिए, क्योंकि किसानों को जरूरत के मुताबिक खाद नहीं मिल पा रही है. उनका आरोप है कि खाद की कमी का फायदा उठाकर निजी दुकानदार किसानों से ज्यादा पैसे वसूल रहे हैं.

किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने भी फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर्स सेल्स (FFS) व्यवस्था का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के लागू होने से किसानों को समय पर पर्याप्त खाद नहीं मिल पा रही है. इससे रबी फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है. उन्होंने कहा कि सरकार को इस व्यवस्थान को पूरे देश में एक साथ बंद कर देनी चाहिए. उन्होंने कहा कि FFS राजस्थान के जिन जिलों में लागू है, वहां किसानों को खाद के लिए भटकना पड़ रहा है. किसानों को समय पर खाद नहीं मिलने से उनकी परेशानी बढ़ रही है.

दरअसल, केंद्र सरकार ने पिछले हफ्ते आंकड़े जारी कर कहा था कि ‘फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर्स सेल्स’ (FFS) पायलट प्रोजेक्ट का असर दिखने लगा है. सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, इस योजना के लागू होने के बाद खाद की बिक्री में करीब 28 फीसदी की कमी आई है. वहीं, खाद खरीदने वाले किसानों की संख्या बढ़कर 46.97 लाख हो गई है. इस व्यवस्था से सरकार को खाद के बेहतर प्रबंधन में मदद मिली है और करीब 1,470 करोड़ रुपये की बचत हुई है. केंद्र सरकार ने खरीफ 2026 के दौरान FFS योजना का पायलट प्रोजेक्ट 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 222 जिलों में शुरू किया था. इसके तहत किसानों को उनकी जमीन और चुनी गई फसल के आधार पर सब्सिडी वाली खाद खरीदने की सुविधा दी गई.

Share This Article