एग्रीवेट: Kitchen Garden Tips: अगर घर में बगीचा बनाने के लिए पर्याप्त जमीन नहीं है, तो छत, बालकनी या घर के किसी छोटे खुले हिस्से को किचन गार्डन में बदला जा सकता है. सितंबर का महीना कई सब्जियों की बुवाई और पौध तैयार करने के लिए अच्छा समय माना जाता है. ग्रो बैग की मदद से टमाटर, मिर्च, बैंगन, धनिया, पालक, मेथी, भिंडी, लौकी जैसी सब्जियां उगाई जा सकती हैं. खास बात यह है कि इसके लिए महंगे गमले खरीदना जरूरी नहीं है. घर में पड़ी मजबूत आटे, दाल या सीमेंट की खाली बोरियों से भी ग्रो बैग तैयार किया जा सकता है. डॉ. रजनीश मिश्रा, संयुक्त निदेशक (बागवानी) के अनुसार, छत पर किचन गार्डन बनाते समय जगह, धूप, जल निकासी और पौधों की जरूरत का ध्यान रखना सबसे जरूरी है.
ग्रो बैग खरीदने के बजाय मजबूत खाली बोरी का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके लिए आटे, दाल या सीमेंट की मजबूत बोरी लेकर उसे उल्टा करें. नीचे के दोनों कोनों को अंदर की तरफ त्रिकोण के आकार में मोड़कर सिल दें, ताकि नीचे मजबूत बेस तैयार हो सके. ऊपर के हिस्से को भी थोड़ा मोड़कर सिलें. सबसे जरूरी है कि बोरी के नीचे 4-5 छोटे ड्रेनेज होल जरूर बनाएं. इससे बारिश या सिंचाई का अतिरिक्त पानी बाहर निकलता रहेगा और जड़ों में पानी जमा होने की समस्या कम होगी.
ग्रो बैग में अच्छी मिट्टी भरना पौधों की बेहतर बढ़वार के लिए बेहद जरूरी है. इसके लिए 40 फीसदी सामान्य बगीचे की मिट्टी, 30 फीसदी अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट और 30 फीसदी कोकोपीट मिलाकर सॉइल मिक्स तैयार किया जा सकता है. कोकोपीट मिट्टी में नमी बनाए रखने में मदद करता है, जबकि जैविक खाद पौधों को जरूरी पोषण देती है. कोकोपीट उपलब्ध न हो तो धान की सूखी भूसी या नदी की रेत का इस्तेमाल विकल्प के तौर पर किया जा सकता है. जरूरत के अनुसार नीम खली भी मिलाई जा सकती है.
बरसात के दौरान ग्रो बैग में पानी जमा न होने दें, क्योंकि लगातार अधिक नमी से जड़ों में सड़न और फंगस की समस्या हो सकती है. जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह से उपयुक्त फंगीसाइड का इस्तेमाल करें और हमेशा उत्पाद के लेबल पर दिए निर्देशों का पालन करें. छत पर किचन गार्डन बनाते समय ग्रीन नेट भी लगाया जा सकता है. यह तेज धूप, बारिश और आंधी के प्रभाव को कम करने में मदद करता है. हालांकि पौधों को पर्याप्त रोशनी मिलना भी जरूरी है. सही आकार के ग्रो बैग, उचित मिट्टी और बेहतर जल निकासी के साथ कम जगह में भी घर पर ताजी सब्जियां और औषधीय पौधे उगाए जा सकते हैं.