बारिश-बाढ़ से 7 राज्यों में 6.11 लाख हेक्टेयर फसलें चौपट, केंद्र-राज्य किसानों को मुआवजा देंगे – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: बारिश-बाढ़ की वजह से देशभर में 6 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में खड़ीं खरीफ फसलें तबाह हुई हैं. सर्वाधिक नुकसान कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में दर्ज किया गया है. इसके अलावा, उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में दर्ज किया गया है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारी बारिश-बाढ़ से करीब 6.11 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित होने की सूचना है, जिसका आकलन जारी है. सभी पीड़ित किसानों को केंद्र और राज्य की ओर से सहायता राशि जल्द जारी की जाएगी. उन्होंने रबी सीजन के लिए खाद-बीज की उपलब्धता बनाए रखने के लिए निर्देशित किया गया है. इसके साथ ही 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया जाएगा.

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रबी कॉन्फ्रेंस में कहा कि मैं अपने किसान भाइयों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि, विपरीत परिस्थितियों के बावजूद देश में खाद की कोई कमी नहीं है. और अब रबी सीजन के लिए भी पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध रहेगी. उन्होंने कहा कि मिट्टी को जितनी जरूरत हो, उतनी ही खाद का संतुलित उपयोग करना जरूरी है. इसी उद्देश्य से हमने खरीफ सीजन में ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया था. अब रबी के लिए 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया जाएगा.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की कृषि विकास यात्रा को तीन चरणों में देखता हूं- 1967–1995, 1996–2014 और 2015 के बाद का दौर. खाद्यान्न उत्पादन की औसत वार्षिक वृद्धि 1967–1995 के दौरान 4.1 मिलियन टन रही. 1996–2014 के बीच यह वृद्धि 3.9 मिलियन टन रही. इसी तरह 2015 के बाद खाद्यान्न उत्पादन की औसत वार्षिक वृद्धि बढ़कर 8.4 मिलियन टन हो गई. 2015 के बाद कृषि की औसत विकास दर 4.5 फीसदी रही, जबकि इससे पहले दोनों चरणों में यह लगभग 3 फीसदी रही थी. यानी कृषि की औसत विकास दर में लगभग 50 फीसदी की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है.

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्र-राज्य सरकारें और ICAR के सहयोग से बनाए गए कंटिंजेंसी प्लान के कारण खरीफ की बोनी का क्षेत्रफल सिर्फ 1 फीसदी कम रहा है. धान का क्षेत्रफल करीब 16.32 लाख हेक्टेयर घटा है. मक्का, सोयाबीन और कपास में भी कुछ कमी आई है. लेकिन उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी और तुअर का क्षेत्र बढ़ा है. उन्होंने कहा कि अल नीनो के संकट के बावजूद हम पिछले साल के लगभग बराबर खरीफ बोनी के क्षेत्रफल तक पहुंच पाए हैं.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में भारी बारिश-बाढ़ से करीब 6.11 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित होने की सूचना है, जिसका आकलन जारी है. कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और राजस्थान के कुछ हिस्सों में नुकसान की जानकारी मिली है, राज्यों से विस्तृत रिपोर्ट आना अभी बाकी है. कर्नाटक के आग्रह पर 3 अक्टूबर को केंद्रीय टीम भेजी जाएगी और महाराष्ट्र में भी केंद्रीय टीम भेजेंगे. उन्होंने कहा कि मैं स्वयं भी प्रभावित राज्यों का दौरा करूंगा.

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पंजाब और हरियाणा में कई गांव ऐसे हैं, जिन्होंने डायरेक्ट सीडिंग करना शुरू कर दिया, पराली जलाना पसंद नहीं करते. मैं कृषि मंत्री के नाते एक बात जरूर कहना चाहूंगा कि पॉल्यूशन के लिए केवल किसान जवाबदार नहीं हैं. यह गलत चित्र पेंट किया जाता है कि, पराली के कारण ही पॉल्यूशन हो रहा है, यह गलत है. उन्होंने कहा कि जब पराली जलती है तो थोड़ा योगदान पराली का भी होता है, लेकिन उसके कारण केवल किसानों को दोषी मानना उचित नहीं है.

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