रबी की बुवाई से पहले किसानों को बड़ा तोहफा, गेहूं-चना समेत इन बीजों पर 50 से 100 फीसदी तक सब्सिडी – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Seed Subsidy UP: रबी की फसल बोने की तैयारी कर रहे उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए राहत की खबर है. राज्य सरकार ने गेहूं, चना, मसूर और मटर समेत कई फसलों के बीज बांटने की तैयारी शुरू कर दी है. इस बार कृषि विभाग ने कुल 12 लाख क्विंटल बीज बांटने का लक्ष्य रखा है. इसके साथ ही किसानों को बीज खरीदने पर सरकारी अनुदान भी मिलेगा. कुछ फसलों की चुनिंदा किस्मों पर तो बीज की पूरी कीमत के बराबर अनुदान देने की व्यवस्था है. ऐसे में किसानों को बुवाई के शुरुआती खर्च को कम करने में मदद मिल सकती है.

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि, किसानों को समय पर बीज और खाद उपलब्ध कराए जाएं. साथ ही, बीज वितरण की प्रक्रिया पर नजर रखने और तय लक्ष्य को पूरा करने के लिए भी कहा गया है.

कृषि विभाग ने रबी सीजन के लिए अलग-अलग फसलों के बीज का लक्ष्य तय किया है. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा गेहूं का है. विभाग के मुताबिक, किसानों को 10.45 लाख क्विंटल गेहूं के बीज बांटने की योजना है. इसके अलावा चने के 69.96 हजार क्विंटल, मसूर के 41.76 हजार क्विंटल और मटर के 17.89 हजार क्विंटल बीज बांटे जाएंगे.

इससे गेहूं के साथ दलहन की खेती करने वाले किसानों को भी फायदा मिल सकता है. सरकार दलहन और तिलहन की फसलों को बढ़ावा देने के लिए 7.65 लाख से ज्यादा मुफ्त मिनीकिट भी बांटेगी. इन मिनीकिट के जरिए किसान अलग-अलग फसलों की खेती कर सकेंगे और अपने खेत में नई किस्मों को आजमा पाएंगे.

इस योजना में सबसे खास बात कुछ किस्मों पर मिलने वाला अनुदान है. कृषि मंत्री के मुताबिक, आठ वर्ष से कम अवधि वाली मसूर की सभी प्रजातियों के बीज पर 100 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा. इसका मतलब है कि तय नियमों के तहत पात्र किसानों को इन बीजों की पूरी कीमत के बराबर सरकारी मदद मिल सकती है. वहीं, आठ वर्ष से कम अवधि वाली चना और मटर की प्रजातियों के साथ 10 वर्ष से कम अवधि वाली मसूर की प्रजातियों पर 75 प्रतिशत अनुदान देने की व्यवस्था है. इससे किसानों को बीज खरीदने में अपनी जेब से कम पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं.

सरकार की बीज अनुदान योजना केवल दलहन तक सीमित नहीं है. गेहूं और जौ के बीज पर भी अनुदान दिया जाएगा. इसके अलावा 10 वर्ष से कम अवधि वाली चना और मटर की प्रजातियों पर भी योजना के तहत मदद मिलेगी. वहीं, 15 वर्ष से कम अवधि वाली तोरिया और राई-सरसों की प्रजातियों पर अधिकतम 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा. इससे तिलहन की खेती करने वाले किसानों को भी बीज खरीदने के खर्च में राहत मिल सकती है.

किसान बीज खरीदने या अनुदान के लिए आवेदन करने से पहले अपने जिले के कृषि विभाग से संपर्क करें. वहां से उपलब्ध किस्मों, अनुदान की शर्तों और आवेदन की प्रक्रिया की जानकारी लें. अधिकारियों को समय पर बीज वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बुवाई के दौरान किसानों को परेशानी न हो.

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