पंजाब में बारिश का कहर, मंडी में 3 फीट तक भरा पानी..15 लाख टन धान पर मंडराया खतरा—पढ़ें इनसाइड स्टोरी – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: पंजाब में तेज बारिश ने धान की फसल पर दोहरी मार डाली है. खेतों में खड़ी फसल प्रभावित होने के साथ मंडियों में करीब 15 लाख मीट्रिक टन धान के भीगकर खराब होने का खतरा बढ़ गया है. फाजिल्का की अनाज मंडी में तीन फीट तक पानी भरने से खुले में रखी धान की बोरियां डूब गईं, जबकि बटाला में भी धान की बोरियां पानी में डूब गईं. किसानों को अपनी उपज बचाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

फाजिल्का में रविवार सुबह करीब 5 बजे मौसम ने अचानक करवट  बदली. करीब एक घंटे तक हुई तेज बारिश के बाद शहर के कई हिस्सों में जलभराव हो गया. इसका सबसे ज्यादा असर अनाज मंडी में देखने को मिला, जहां पानी भरने से मंडी तालाब जैसी नजर आने लगी. मंडी में खुले में रखी धान की फसल पानी में डूब गई. कई जगह धान की ढेरियां पानी से घिर गईं, जिससे किसानों के सामने अपनी उपज बचाने का संकट खड़ा हो गया. सुबह मंडी पहुंचे किसान अपनी मेहनत से तैयार की गई फसल को बचाने के लिए परेशान दिखाई दिए. किसानों को डर है कि यदि धान लंबे समय तक पानी में पड़ा रहा तो उसकी गुणवत्ता खराब हो सकती है और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.

बारिश के बाद मंडी में जमा पानी के बीच किसान अपनी फसल को सुरक्षित  स्थान पर पहुंचाने की कोशिश करते रहे. कई किसान पानी में उतरकर धान को उठाते और समेटते नजर आए. फसल को मंडी तक लाने के बाद अब उसे बारिश से बचाना भी किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. धान की गुणवत्ता प्रभावित होने पर किसानों को बिक्री के समय परेशानी हो सकती है. गीले अनाज को सुखाने और सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है. ऐसे में बारिश से हुए जलभराव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. यदि पानी की निकासी समय पर नहीं होती है तो नुकसान बढ़ने की आशंका भी बनी रह सकती है.

#देखें | पंजाब: फाजिल्का की अनाज मंडी में बाढ़ से यहां रखा लाखों क्विंटल अनाज खराब हो गया। बारिश के बाद अनाज मंडी में पानी भर गया। (11.10.2026)

मंडी में पानी भरने के बाद जलनिकासी की व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं.  मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कमीशन एजेंटों के प्रधान संजीव सचदेवा ने जलनिकासी की बेहतर व्यवस्था नहीं होने पर सवाल उठाए हैं.  वहीं, नगर कौंसिल की ओर से शहर और मंडी के विभिन्न हिस्सों में जमा पानी निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं. हालांकि, जलनिकासी की व्यवस्था  कितनी प्रभावी साबित होती है, यह पानी निकलने और फसल की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही पता चलेगा. फिलहाल किसानों की प्राथमिकता अपनी उपज को पानी से बाहर निकालकर सुरक्षित करना है.

बारिश का असर केवल अनाज मंडी  तक सीमित नहीं रहा. शहर के कई हिस्सों में जलभराव हुआ और सुबह करीब 5 बजे से बिजली आपूर्ति भी प्रभावित रही. समाचार लिखे जाने तक शहर में बिजली गुल होने की सूचना थी. इससे आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा. लेकिन किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता उनकी धान की फसल है. खेती में बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और कटाई पर खर्च करने के बाद किसान उपज बेचकर लागत निकालने की उम्मीद रखते हैं. ऐसे में मंडी में बारिश का पानी उनकी कमाई पर असर डाल सकता है. फाजिल्का की घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि फसल की सुरक्षा केवल खेत तक सीमित नहीं है. मंडियों में समय पर जलनिकासी, सुरक्षित भंडारण और बारिश से बचाव के पर्याप्त इंतजाम भी जरूरी हैं, ताकि किसानों की महीनों की मेहनत पानी में न बहे.

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