एग्रीवेट: अक्सर मानसून के मौसम में किसानों और पशुपालकों के सामने सबसे बड़ी समस्या आती है. गाय-भैंस में होने वाले लंपी स्किन डिजीज की जो बेहद ही गंभीर चिंता का विषय है. इस घातक बीमारी की ग्रस्त में अगर कोई पशु आ जाता है, तो उसके शरीर पर गांठें पड़ सकती हैं, तेज बुखार आ सकता है और दूध उत्पादन में भी गिरावट हो सकती है, जिससे पशुपालकों और किसानों को नुकसान का सामना झेलना पड़ सकता है. आइए जानते हैं इस वायरस के रोकथाम के तरीकों के बारे में विस्तारपूर्वक.
लंपी स्किन डिजीज एक वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से गाय और अन्य संवेदनशील गोवंशीय पशुओं को प्रभावित करता है. इसका प्रसार मुख्य रूप से संक्रमित पशुओं के आसपास मौजूद खून चूसने वाले कीटों, जैसे मच्छरों, मक्खियों और किलनी के माध्यम से होता है. बीमारी के कारण पशुओं को बुखार, त्वचा पर उभरी हुई गांठें, कमजोरी और भूख में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जिससे संक्रमित पशु के दूध उत्पादन में कमी आ सकती है और पशु को खाने-पीने में परेशानी हो सकती है.
लंपी रोग के लक्षण की पहचान कैसे करें?
लंपी रोग के लक्षण हर पशु में एक जैसे नहीं होते. कुछ पशुओं में हल्के लक्षण दिखाई देते हैं, जबकि कुछ में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है. पशुपालकों को इन संकेतों पर ध्यान देना चाहिए-
अगर आपके पशु को तेज बुखार हो रहा है और पशु सुस्त दिखाई दे रहा है तो समझ जाए की ये लंपी रोग के लक्षण है.
अगर आपका पशु इस बीमारी से ग्रस्त होता है, तो उसकी गर्दन, सिर, पीठ, पेट और पैरों सहित शरीर के विभिन्न हिस्सों पर कठोर, उभरी हुई गांठें नजर आ सकती हैं.
इस बीमारी में पशु की आंखों से पानी आना, नाक बहना और मुंह से अधिक लार निकलना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं.
वहीं, कुछ पशुओं में पैरों और शरीर के अन्य हिस्सों में सूजन आ सकती है, जिससे चलने में परेशानी होती है. ऐसे में पशुपालक इन लक्षणों को अनदेखा बिल्कुल भी ना करें.
अगर आपके पशुओं की त्वचा पर गांठें जैसे लक्षण दिखाई दें, तो पशुपालक को बिना देरी किए कुछ जरूरी कदम उठाने चाहिए-
पशुपालक संक्रमित पशु को अलग रखें. उसके लिए अलग बाड़ा या शेड बनाएं, ताकि दूसरे पशुओं के साथ संपर्क कम हो सके.
अगर पशुओं में ये लक्षण दिखाई दें तो अपने सरकारी पशु चिकित्सालय या पशुपालन विभाग से संपर्क करें. पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार जांच और उपचार कराएं. अपने स्तर पर दवाएं देने या गलत उपचार करने से बचें.
बीमार पशु के चारे और पानी के बर्तनों को अलग रखें. बाड़े, फर्श और पशु के संपर्क में आने वाले उपकरणों की नियमित सफाई करें. देखभाल करने के बाद हाथ धोएं और जरूरत के अनुसार कपड़े तथा जूते साफ करें.
इसके अलावा, पशुपालक और किसान पशु का बुखार, भूख, पानी पीने की मात्रा, दूध उत्पादन और चलने-फिरने की स्थिति नियमित रूप से देखें. यदि पशु पानी पीना छोड़ दे, खड़ा न हो पाए या उसकी हालत तेजी से बिगड़े, तो तत्काल पशु चिकित्सक की सहायता लें.
लंपी रोग का इलाज और टीकाकरण कैसे कराएं?
लंपी स्किन डिजीज एक वायरल बीमारी है, इसलिए इसका कोई विशिष्ट एंटीवायरल उपचार नियमित रूप से उपलब्ध नहीं है. पशु चिकित्सक बुखार, दर्द, सूजन, घावों और अन्य जटिलताओं को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक उपचार दे सकते हैं. यदि पशु को द्वितीयक बैक्टीरियल संक्रमण हो, तो चिकित्सक की सलाह पर उपयुक्त दवा दी जा सकती है. बिना सलाह एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं देने से बचें.