एग्रीवेट: अक्तूबर से शुरू हो चुके नए गन्ना पेराई सीजन के लिए केंद्र सरकार की ओर से गन्ना मूल्य में बढ़ोत्तरी नहीं किए जाने से नाराज गन्ना किसानों ने जोरदार प्रदर्शन किया है. महाराष्ट्र के सतारा में स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के आह्वान पर जुटे किसानों ने 15 अक्तूबर से घोषित पेराई का विरोध किया और कहा कि जब तक गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाया जाता है तब तक पेराई नहीं की जाए. संगठन के नेता और पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने कहा कि गन्ने का भाव बढ़ाने के साथ ही चीनी के एमएसपी और सीए हैवी इथेनॉल के दाम में बढ़ोत्तरी की मांग की. उन्होंने कहा कि चीनी मिलों के लिए सरकार कर्ज की व्यवस्था करे ताकि किसानों का बकाया भुगतान किया जा सके. इसके साथ ही अगले सीजन में गन्ना की खेती के लिए सरकार से सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता के आंकड़े मांगे हैं.
गन्ने के एफआरपी (FRP) और खरीद मूल्य में वृद्धि की मांग को लेकर स्वाभिमानी शेतकरी संगठन ने महाराष्ट्र के सतारा में प्रदर्शन किया और अपना रुख सख्त रुख दिखाया. संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने सोमवार को सतारा स्थित अजिंक्यतारा कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री का दौरा कर प्रबंधन के साथ बैठक की और गन्ने के दाम तय होने तक पेराई सत्र शुरू न करने की चेतावनी दी. राजू शेट्टी ने कहा कि गन्ना मूल्य जब तक बढ़ाया नहीं जाता है तब तक पेराई नहीं की जा सकती है.
महाराष्ट्र के प्रमुख किसान नेता और स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के अध्यक्ष राजू शेट्टी ने 2026-27 के आगामी गन्ना पेराई सत्र को 15 अक्टूबर से शुरू करने के राज्य सरकार के फैसले का कड़ा विरोध किया है. राजू शेट्टी ने कहा कि 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने से गन्ने का वजन और उत्पादन कम होता है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 15 अक्टूबर से पहले कारखाने शुरू किए गए, तो कड़ा विरोध किया जाएगा.
राजू शेट्टी की पेराई शुरू नहीं करने की मांग पर अजिंक्यतारा कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री के कार्यकारी निदेशक शिवाजी मोहिते ने कहा कि राजू शेट्टी और उनके सहयोगियों ने फैक्ट्री आकर पेराई शुरू न करने की अपील की है. इस विषय पर अंतिम निर्णय के लिए निदेशक मंडल की बैठक बुलाई जाएगी. प्रबंधन की बैठक बुलाई गई है, जिसमें पेराई शुरू करने और किसानों के भुगतान संबंधी मांगों को लेकर फैसला लिया जाएगा.
किसान नेता राजू शेट्टी ने कहा कि इस वर्ष गन्ने का भाव कम से कम 5,000 रुपये प्रति टन मिलना चाहिए, तभी गन्ने की खेती किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है. उन्होंने कहा कि गन्ना किसान पहले से सूखे और बीमारियों के चलते भयंकर नुकसान झेल रहे हैं. खेती की लागत भी बढ़ गई है. ऐसे में अगर गन्ना मूल्य नहीं बढ़ा तो किसान कर्ज में चले जाएंगे और गन्ना उगाने के लिए हासिल किए गए कर्ज का भुगतान भी नहीं कर पाएंगे.
स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के नेता ने कहा कि चीनी का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलोग्राम किया जाए. साल 2019 से चीनी का एमएसपी नहीं बढ़ाया गया है. इसके अलावा सी-हेवी इथेनॉल (C-heavy ethanol) का भाव 70 रुपये प्रति लीटर किया जाए. इसके साथ ही चीनी मिलों को ब्याज मुक्त कर्ज दिया देने की मांग उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार से करते हुए कहा कि ताकि किसानों के बकाए का समय पर भुगतान पक्का हो सके.
सतारा, महाराष्ट्र: गन्ने के एफआरपी (FRP) और खरीद मूल्य में वृद्धि की मांग को लेकर स्वाभिमानी शेतकरी संगठन ने अपना रुख सख्त कर लिया है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने सोमवार को सतारा स्थित अजिंक्यतारा कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री का दौरा कर प्रबंधन के साथ बैठक की और गन्ने के दाम तय होने तक पेराई सत्र शुरू न करने की चेतावनी दी।
पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने कहा कि मौजूदा सूखा स्थिति ने किसानों को भारी चोट पहुंचाई है. ऐसे में सिंचाई के जो जल स्रोत और बांध हैं, उनके पानी का सही प्रबंधन होना बेहद जरूरी है. बांधों में कितना पानी जमा है और वह पानी पूरे साल कैसे और कितना मुहैया कराया जाएगा, इसका पूरा लेखा-जोखा पहले जल संसाधन विभाग (जलसंपदा विभाग) किसानों के समक्ष रखे. यह नियोजन स्पष्ट होने के बाद ही किसानों को यह बताया जाए कि उन्हें गन्ने की नई फसल करनी चाहिए या नहीं.