गुणवत्ता बीज से तेलंगाना के किसान ने गर्मी में तुरई से कमाया मुनाफा—जानें पूरा मामला – एग्रीवेट

Team Agrivate
6 Min Read

एग्रीवेट: 22 अक्टूबर 2026, हैदराबाद: गुणवत्ता बीज से तेलंगाना के किसान ने गर्मी में तुरई से कमाया मुनाफा – तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले के केशमपेट मंडल स्थित कोंडारेड्डीपल्ली गांव के किसान अंजनेयुलु ने गर्मी के मौसम में तुरई (रिज गार्ड) की खेती से अच्छी कमाई की है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु से मिले गुणवत्तापूर्ण बीज से उन्हें यह सफलता मिली।

संस्थान के मुताबिक अंजनेयुलु को यह बीज तेलंगाना सरकार के उद्यान विभाग के जरिए “विजन इनिशिएटिव फॉर अर्बन क्लस्टर्स” योजना के तहत मिला था। इस योजना के तहत राज्य के 11 जिलों में बीज किट बांटे गए, जिससे करीब 8,888 एकड़ क्षेत्र कवर हुआ और लगभग 71,000 किसानों तक इसका फायदा पहुंचा।

अंजनेयुलु ने अपनी ज़मीन पर गर्मी के सीजन में तुरई लगाई और उन्हें करीब 6 टन उपज मिली। संस्थान के अनुसार फसल में कीट या रोग की कोई बड़ी समस्या सामने नहीं आई, जिससे खेती की लागत नियंत्रण में रही।

बाजार में उन्हें तुरई का भाव 25 से 35 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच मिला। सारे खेती खर्च चुकाने के बाद उन्हें करीब 80 हजार से 90 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। किसान ने इसके लिए तेलंगाना सरकार के उद्यान विभाग का आभार जताया, जिसने उन्हें बीज मुहैया कराकर यह फसल लगाने के लिए प्रोत्साहित किया।

यह योजना मुख्य रूप से शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों के आसपास सब्जी उत्पादन बढ़ाने के मकसद से चलाई जा रही है, ताकि शहरों में ताज़ी सब्जियों की आपूर्ति स्थानीय स्तर पर हो सके। रंगारेड्डी जिला हैदराबाद से सटा होने के चलते इस तरह की योजनाओं के लिए उपयुक्त माना जाता है।

संस्थान लगातार विभिन्न राज्यों के बागवानी विभागों के साथ मिलकर किसानों तक बेहतर किस्म के बीज पहुंचाने पर काम कर रहा है। संस्थान का कहना है कि गुणवत्तापूर्ण बीज मिलने से किसानों की उपज और आय दोनों में सुधार देखा जा रहा है, जैसा अंजनेयुलु के मामले में हुआ है।

तुरई जैसी सब्जियों की खासियत यह है कि इनकी फसल अवधि कम होती है और एक ही सीजन में एक से ज्यादा बार तुड़ाई की जा सकती है, जिससे किसान को लगातार नकदी आमदनी मिलती रहती है। गर्मी के मौसम में बाजार में सब्जियों की आवक आमतौर पर कम रहती है, जिससे भाव भी बेहतर मिलने की संभावना रहती है।

अंजनेयुलु जैसे छोटे और मझोले किसानों के लिए यह मॉडल इसलिए भी अहम है क्योंकि इसमें बड़ी पूंजी लगाने की ज़रूरत नहीं पड़ती। सरकारी योजना के तहत मुफ्त या रियायती दर पर मिलने वाला गुणवत्तापूर्ण बीज शुरुआती लागत को काफी हद तक कम कर देता है, जिससे मुनाफे का मार्जिन बेहतर रहता है।

उद्यान विभाग के अधिकारियों के मुताबिक आने वाले सीजन में इस तरह की योजनाओं का दायरा और बढ़ाने की योजना है, ताकि रंगारेड्डी जैसे शहरों से सटे जिलों में ज्यादा से ज्यादा किसान सब्जी उत्पादन से जुड़ सकें और शहरी बाजारों को स्थानीय स्तर पर ताज़ी सब्जी की आपूर्ति हो सके।

Share This Article