महाराष्ट्र में कपास की पैदावार 50 फीसदी तक घटने का अनुमान, कमजोर मॉनसून से सोयाबीन भी प्रभावित – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: महाराष्ट्र के कई जिलों में इस साल बारिश की कमी ने खरीफ फसलों की मुश्किल बढ़ा दी है. यवतमाल जिले में कपास की पैदावार 50 फीसदी तक घटने का अनुमान है. वहीं, अमरावती जिले में कम बारिश से सोयाबीन के दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है. कृषि विभाग ने कमजोर और देरी से आए मॉनसून को फसलों को हुए नुकसान की बड़ी वजह बताया है.

यवतमाल को महाराष्ट्र का प्रमुख कपास उत्पादक जिला माना जाता है. कृषि विभाग के मुताबिक, कम बारिश और मॉनसून में देरी से खरीफ फसलों की बढ़वार प्रभावित हुई है. यवतमाल में बारिश की कमी से कपास-सोयाबीन पर मार, सोयाबीन की पैदावार 60 फीसदी तक घटने का अनुमान है. यवतमाल के कृषि अधीक्षक मनोज धागे ने द टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि जिले की तीन प्रमुख खरीफ फसलों पर मौसम का असर पड़ा है. उन्होंने बताया कि कपास का उत्पादन करीब 50 फीसदी तक घट सकता है. वहीं, सोयाबीन की पैदावार में 60 फीसदी से ज्यादा की गिरावट का अनुमान है. तुअर की पैदावार भी करीब 40 फीसदी कम हो सकती है.

महाराष्ट्र के यवतमाल में कम बारिश और बारिश में देरी का खरीफ फसलों  पर बड़ा असर पड़ा है. कृषि विभाग के मुताबिक, जिले में 4.95 लाख हेक्टेयर में कपास की बुवाई हुई थी. लेकिन पौधों की बढ़वार ठीक से नहीं हो पाई और उनमें सामान्य से काफी कम फूल आए. कृषि अधीक्षक मनोज धागे के मुताबिक, जून में लगभग बारिश नहीं हुई. इसके बाद जुलाई के आखिर में दो दिन हुई तेज बारिश ने फसलों को फायदा पहुंचाने के बजाय खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाया. अगस्त में भी सामान्य बारिश के मुकाबले सिर्फ करीब 22 फीसदी बारिश हुई. इससे सूखे जैसी स्थिति और बढ़ गई.

जिले में 2.45 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन बोई गई है. इसमें बड़ी मात्रा में कम अवधि में तैयार होने वाली किस्मों की बुवाई हुई है. बारिश में देरी और कमी का सबसे ज्यादा असर सोयाबीन की फसल पर पड़ा है. कृषि विभाग ने इसकी पैदावार में 60 फीसदी से ज्यादा गिरावट का अनुमान जताया है. वहीं, 1.05 लाख हेक्टेयर में तुअर की खेती हुई है. नमी की कमी से तुअर में फूल और फलियां बनने पर असर पड़ सकता है. मनोज धागे ने कहा कि सोयाबीन में फलियां भरने के समय पानी की जरूरत होती है. लेकिन बारिश नहीं होने से फलियां ठीक से नहीं भर पाईं. अब खेतों में फसल को हुए नुकसान का असर साफ दिखाई दे रहा है.

महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में इस सीजन अब तक सामान्य बारिश की सिर्फ 78 फीसदी बारिश हुई है. यानी जिले में करीब 22 फीसदी बारिश की कमी है. इसका असर कपास और सोयाबीन की फसल पर साफ दिखाई दे रहा है. जिले की 16 तहसीलों में सिर्फ चार तहसीलों- आर्णी, जरी-जामनी, नेर और दारव्हा- में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है.. वहीं, पुसद, केलापुर, महागांव, दिग्रस, घाटंजी, वणी, उमरखेड़ और कलंब में सामान्य बारिश का 70 से 87 फीसदी ही पानी मिला. यवतमाल, बाभुलगांव और मालेगांव में स्थिति और खराब रही. इन इलाकों में सामान्य बारिश  के मुकाबले सिर्फ 57 से 68 फीसदी बारिश हुई है. वहीं, अमरावती जिले में भी बारिश की कमी का असर सोयाबीन पर पड़ा है. यहां सोयाबीन के दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है.

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