एग्रीवेट: Mukhyamantri Krishak Samriddhi Yojana: उत्तर प्रदेश सरकार ने लघु और सीमांत किसानों को सस्ती दर पर लंबी अवधि का कर्ज देने के लिए नई योजना को मंजूरी दी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना को हरी झंडी दी गई. इस योजना के तहत पात्र किसानों को 6 लाख रुपये तक का लोन 6 फीसदी सालाना ब्याज दर पर मिल सकेगा. योगी सरकार का कहना है कि योजना का मकसद किसानों को खेती और ग्रामीण जरूरतों के लिए आसानी से वित्तीय मदद उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें महंगे कर्ज पर निर्भर न रहना पड़े. कैबिनेट के इस फैसले से किसानों को भारी ब्याज दरों से छुटकारा मिलेगा जो पहले 11.5 प्रतिशत तक थी. वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के मुताबिक, मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत किसानों को लोन उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड के माध्यम से दिया जाएगा. लोन पर किसानों को 6 फीसदी सालाना ब्याज देना होगा. इसमें राज्य सरकार 5 फीसदी ब्याज अनुदान देगी. यानी सरकार ब्याज के एक बड़े हिस्से का भार उठाएगी, जिससे किसानों के लिए कर्ज चुकाना आसान हो सकता है. इससे सरकार पर करीब 38.4 करोड़ का भार आएगा. योजना खासतौर पर छोटे और सीमांत किसानों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जिनके लिए खेती से जुड़े बड़े खर्चों के लिए सस्ती वित्तीय मदद जुटाना अक्सर मुश्किल होता है. योजना के तहत पात्र किसान अधिकतम 6 लाख रुपये तक का लोन ले सकेंगे. यह राशि लंबी अवधि की जरूरतों के लिए इस्तेमाल की जा सकेगी. सरकार के मुताबिक, किसान इस कर्ज का इस्तेमाल कृषि से जुड़ी जरूरतों के साथ ग्रामीण क्षेत्र की दूसरी जरूरी गतिविधियों के लिए भी कर सकते हैं. यानी यह मदद सिर्फ खेत में होने वाले खर्च तक सीमित नहीं होगी. इस तरह किसान खेती के साथ अपने गांव या घर से जुड़े दूसरे जरूरी कामों के लिए भी आर्थिक संसाधन जुटा सकेंगे. इस योजना की एक अहम शर्त यह है कि 5 फीसदी ब्याज अनुदान का फायदा हर किसान को अपने आप नहीं मिलेगा. जिन किसानों की लोन की किस्तें तय समय पर जमा होंगी, उन्हें ही ब्याज अनुदान का लाभ दिया जाएगा. अगर किसान किस्त चुकाने में देरी करता है, तो वह इस ब्याज अनुदान के लिए पात्र नहीं होगा. यानी कम ब्याज का पूरा फायदा लेने के लिए समय पर भुगतान करना जरूरी होगा. यह व्यवस्था किसानों को नियमित रूप से किस्त जमा करने के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से रखी गई है. सरकार हर साल ब्याज अनुदान की जरूरत का आकलन करेगी. इसके लिए योजना शुरू होने के बाद पिछले साल किसानों को दिए गए लोन की बकाया मूलधन राशि और आगे दिए जाने वाले कर्ज की मात्रा को आधार बनाया जाएगा. इसका मतलब है कि योजना के तहत सरकार की ओर से दिए जाने वाले ब्याज अनुदान का हिसाब हर साल कर्ज की स्थिति के अनुसार तय किया जाएगा. छोटे और सीमांत किसानों के पास अक्सर खेती की जरूरतों को पूरा करने के लिए सीमित पैसा होता है. बीज, खाद, सिंचाई, उपकरण और दूसरी कृषि जरूरतों के लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ सकता है. ऐसे में कम ब्याज पर लंबी अवधि का लोन उनके लिए राहत दे सकता है. मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के जरिए सरकार की कोशिश है कि किसानों को सस्ती वित्तीय मदद मिले और वे खेती के साथ ग्रामीण जरूरतों को भी पूरा कर सकें. हालांकि योजना का वास्तविक लाभ पात्रता, लोन स्वीकृति और समय पर किस्त भुगतान जैसी शर्तों पर निर्भर करेगा.