एक दशक बाद घटेगा चावल उत्पादन! 15 फीसदी कम बारिश से फसल पर असर, मजबूत रहेगा निर्यात—पढ़ें इनसाइड स्टोरी – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Rice Production India: भारत में इस साल चावल के उत्पादन में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है. पिछले करीब एक दशक में पहली बार देश का चावल उत्पादन घटने का अनुमान है. वहीं, करीब 20 साल में यह सबसे बड़ी गिरावट हो सकती है. इसकी सबसे बड़ी वजह फसल पकने के समय कई इलाकों में सामान्य से कम बारिश होना बताया जा रहा है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक और निर्यातक देशों में से एक है. ऐसे में उत्पादन घटने का असर घरेलू बाजार से लेकर अंतरराष्ट्रीय कारोबार तक देखने को मिल सकता है. हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में जमा किए गए चावल के बड़े भंडार की वजह से देश के निर्यात पर तुरंत बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है.

10 मिलियन टन तक घट सकता है उत्पादन

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के अनुसार राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बी.वी. कृष्णा राव ने बताया कि, इस साल देश में चावल का उत्पादन करीब 10 मिलियन मीट्रिक टन घट सकता है. पिछले साल भारत में रिकॉर्ड करीब 154 मिलियन टन चावल का उत्पादन हुआ था. अगर इस बार उत्पादन में 10 मिलियन टन की कमी आती है, तो यह करीब 6.5 फीसदी की गिरावट होगी. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इतनी बड़ी गिरावट 2009-10 के बाद सबसे ज्यादा होगी. उस समय अल नीनो की वजह से पड़े सूखे का असर चावल की पैदावार पर पड़ा था.

दक्षिण और पूर्वी राज्यों में ज्यादा असर

इस बार पिछले कुछ हफ्तों से कई इलाकों में बारिश की कमी बनी हुई है. इसका सीधा असर चावल की फसल की पैदावार पर पड़ रहा है. खासकर दक्षिण और पूर्वी राज्यों में सूखे जैसे हालात ने फसल की क्षमता को प्रभावित किया है. मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से शुरू हुए मॉनसून सीजन में देशभर में सामान्य से करीब 15 फीसदी कम बारिश हुई है. वहीं, कुछ प्रमुख चावल उत्पादक राज्यों में बारिश की कमी 42 फीसदी तक पहुंच गई है.

धान का रकबा भी हुआ कम

सिर्फ बारिश ही नहीं, इस साल धान की बुवाई का रकबा भी घटा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 11 सितंबर तक गर्मियों में बोए जाने वाले धान का रकबा करीब 4.268 करोड़ हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 4 फीसदी कम है. गर्मियों में बोया जाने वाला धान देश के कुल चावल उत्पादन में 80 फीसदी से ज्यादा हिस्सा रखता है. ऐसे में रकबे में कमी और बारिश की कमी, दोनों का असर उत्पादन पर पड़ सकता है.

सर्दियों की फसल पर भी मंडरा रहा खतरा

सर्दियों में बोए जाने वाले धान से भी देश के कुल उत्पादन का एक हिस्सा पूरा होता है. लेकिन इस फसल को लेकर भी चिंता बढ़ रही है. कृषि जिंस कारोबारी कंपनी ओलम एग्री इंडिया के डिप्टी कंट्री हेड नितिन गुप्ता के मुताबिक, जलाशयों में सामान्य से कम पानी होने की वजह से सर्दियों में बोए जाने वाले धान का रकबा घट सकता है. अगर जलाशयों में पानी पर्याप्त नहीं रहा, तो सिंचाई पर निर्भर इलाकों में किसानों के लिए धान की खेती करना मुश्किल हो सकता है.

घरेलू बाजार में बढ़ने लगे चावल के दाम

उत्पादन घटने की आशंका का असर बाजार में अभी से दिखाई देने लगा है. स्थानीय बाजार में चावल के दाम बढ़ने लगे हैं. इसके साथ ही भारत से निर्यात होने वाले चावल की कीमतें भी एक साल से ज्यादा समय के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं. प्रीमियम किस्म के धान उगाने वाले किसानों को खुले बाजार में बेहतर दाम मिल सकते हैं. इसका एक असर यह भी हो सकता है कि सरकार को धान की बिक्री कम हो और किसान निजी कारोबारियों को ज्यादा फसल बेचें.

बड़े भंडार से निर्यात को मिल सकता है सहारा

उत्पादन घटने के बावजूद भारत के पास चावल का बड़ा भंडार मौजूद है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1 सितंबर तक सरकारी भंडार में चावल और बिना पिसा धान मिलाकर करीब 5.96 करोड़ टन स्टॉक था. यह मात्रा 1 अक्टूबर के लिए तय 1.03 करोड़ टन के सरकारी लक्ष्य से कई गुना ज्यादा है. इसी बड़े भंडार की वजह से भारत के पास उत्पादन में कमी के बावजूद निर्यात जारी रखने की पर्याप्त गुंजाइश है. हालांकि, उत्पादन में गिरावट से घरेलू कीमतों और निर्यात कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है. ऐसे समय में जब थाईलैंड और वियतनाम जैसे दूसरे बड़े निर्यातक देशों में भी चावल महंगा हो रहा है, भारत के बाजार पर दुनियाभर की नजर बनी रहेगी.

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