सवाई माधोपुर के किसान ने एक बीघा में मौसमी और अंतरफसल से कमाए छह लाख रुपये, इस बड़े खुलासे से मचा हड़कंप – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 08 अक्टूबर 2026, सवाई माधोपुर (राजस्थान): सवाई माधोपुर के किसान ने एक बीघा में मौसमी और अंतरफसल से कमाए छह लाख रुपये – वजीरपुर क्षेत्र के फुलवाड़ा गांव के किसान अवधेश मीणा ने एक बीघा जमीन पर मौसमी (स्वीट लाइम) की बागवानी शुरू करके सालाना छह लाख रुपये से ज्यादा की आय हासिल करना शुरू कर दिया है। उनके इस प्रयास के लिए हाल में उन्हें आईसीएआर-पूसा, नई दिल्ली की ओर से इनोवेटिव फार्मर अवार्ड से सम्मानित किया गया।

अवधेश ने अपने खेत में कटोल गोल्ड किस्म के मौसमी के करीब 150 पौधे लगाए थे। चौथे साल में इन पौधों से कुल छह टन उपज मिली, यानी हर पौधे से औसतन 40 किलोग्राम फल।

बाजार में मौसमी को औसतन 40 रुपये प्रति किलोग्राम का दाम मिला, जिससे अवधेश को सिर्फ फलों की बिक्री से करीब सवा दो लाख रुपये की सकल आय हुई। बागवानी शुरू करने के बाद उन्होंने पौधों के बीच की खाली जमीन को भी खाली नहीं छोड़ा।

पहले तीन साल तक पौधे छोटे रहने के कारण फलों का उत्पादन सीमित था, लेकिन इस दौरान भी अंतरफसल से मिलने वाली आय ने खेत को मुनाफे में बनाए रखा। चौथे साल में मौसमी के पौधे पूरी तरह तैयार होने के बाद उत्पादन में बड़ा उछाल देखा गया।

मौसमी के पौधों के बीच उन्होंने टमाटर और शकरकंद की अंतरफसल ली, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी हुई। टमाटर की फसल से करीब 2.18 लाख रुपये और शकरकंद से करीब 1.80 लाख रुपये की कमाई हुई।

इस तरह एक ही बीघा जमीन से अवधेश को बागवानी और अंतरफसल दोनों मिलाकर छह लाख रुपये से ज्यादा की सालाना आय मिल रही है, जो परंपरागत खेती की तुलना में कई गुना ज्यादा है। शुरुआती सालों में पौधे छोटे होने के कारण आय कम रहती है, लेकिन अंतरफसल की मदद से किसान इस दौरान भी अपनी जमीन से कमाई जारी रख सकते हैं।

बागवानी विशेषज्ञों के मुताबिक मौसमी जैसे नींबू वर्गीय फलों की बागवानी राजस्थान के कम पानी वाले इलाकों के लिए उपयुक्त मानी जाती है, क्योंकि एक बार पौधे स्थापित हो जाने के बाद इन्हें पानी की जरूरत तुलनात्मक रूप से कम पड़ती है। कटोल गोल्ड किस्म को खासतौर पर अच्छी पैदावार और मिठास के लिए पसंद किया जाता है।

वजीरपुर इलाके में ज्यादातर किसान अब तक सरसों, बाजरा और चने जैसी परंपरागत फसलों पर निर्भर रहे हैं। अवधेश के खेत में बागवानी और अंतरफसल का यह मॉडल देखने के लिए आसपास के गांवों से भी किसान पहुंचते रहे हैं, जो अपनी जमीन पर भी इसी तरह का प्रयोग करने की योजना बना रहे हैं।

एक ही खेत में फलदार पौधों के साथ अल्पकालिक सब्जी फसलें लेने से किसान को शुरुआती वर्षों में भी नियमित आमदनी मिलती रहती है, जबकि फलदार पौधे धीरे-धीरे पूरी तरह तैयार होते हैं। इस तरह जमीन के एक ही टुकड़े से दोहरा फायदा मिलना संभव हो जाता है।

अवधेश की यह सफलता इलाके के अन्य किसानों के लिए भी एक मॉडल बन रही है, जो परंपरागत खेती के साथ-साथ बागवानी और अंतरफसल तकनीक अपनाकर अपनी सीमित जमीन से ज्यादा मुनाफा कमाने की कोशिश कर रहे हैं। आईसीएआर पूसा का यह सम्मान ऐसे किसानों को प्रोत्साहित करने के मकसद से दिया जाता है, जो नई तकनीक और फसल विविधीकरण के जरिए खेती को ज्यादा मुनाफे वाला बनाते हैं।

छोटी जोत वाले किसानों के लिए बागवानी के साथ अंतरफसल का यह तरीका खासतौर पर उपयोगी माना जाता है, क्योंकि इसमें अलग से बड़ी जमीन की जरूरत नहीं पड़ती और मौजूदा खेत से ही दो तरह की उपज मिल जाती है।

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