फसल बीमा योजना में राजस्थान को मिला देश में चौथा स्थान, किसानों को 35,600 करोड़ के क्लेम, इस बड़े खुलासे से मचा हड़कंप – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 30 सितंबर 2026, जयपुर: फसल बीमा योजना में राजस्थान को मिला देश में चौथा स्थान, किसानों को 35,600 करोड़ के क्लेम –  प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) साल 2016 में शुरू की गई थी और इसका मकसद प्राकृतिक आपदाओं, कीट-रोग प्रकोप या मौसम की मार से खराब हुई फसल के लिए किसानों को कम प्रीमियम पर बीमा सुरक्षा देना है। दस साल पूरे होने पर हुए हालिया मूल्यांकन में राजस्थान ने इस योजना के क्रियान्वयन में पूरे देश में चौथा स्थान हासिल किया है।

केंद्र सरकार के हालिया मूल्यांकन में राज्य को कुल 43.5 अंक मिले हैं, जो इसे देश के बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल करते हैं। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब देश भर के राज्यों के बीच फसल बीमा दावों के तेज़ और पारदर्शी निपटारे को लेकर लगातार तुलना होती रहती है।

इस राष्ट्रीय रैंकिंग में असम को 55.5 अंकों के साथ पहला और उत्तर प्रदेश को 47.5 अंकों के साथ दूसरा स्थान मिला है। राजस्थान तीसरे स्थान की दौड़ में पीछे रह गया, लेकिन चौथे पायदान पर मजबूती से काबिज है। इसके बाद उत्तराखंड, हरियाणा, पुद्दुचेरी और महाराष्ट्र का स्थान है।

राज्य कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार खरीफ 2016 से खरीफ 2026 तक की अवधि में राजस्थान में फसल बीमा योजना के तहत कुल 25.47 करोड़ बीमा पॉलिसियां जारी की गई हैं। इस दौरान किसानों ने करीब 7,800 करोड़ रुपए प्रीमियम के रूप में जमा किए, जबकि बदले में उन्हें 35,600 करोड़ रुपए के क्लेम का भुगतान हुआ — यानी जमा प्रीमियम का करीब साढ़े चार गुना।

इस दौरान केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर करीब 19-19 हजार करोड़ रुपए का अंशदान भी योजना में दिया। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि डिजिटल तकनीक के अधिकाधिक उपयोग से योजना की निगरानी अधिक प्रभावी बन रही है।

राजस्थान को इस रैंकिंग में तकनीकी मोर्चे पर भी मजबूती मिली है। राज्य में फसल कटाई प्रयोग (CCE) के 90 प्रतिशत से अधिक रिकॉर्ड अब ऑनलाइन दर्ज किए जा रहे हैं, और 90 प्रतिशत से ज्यादा जिलों में Yestech तकनीक अपनाई जा चुकी है। इन दोनों मानकों पर राज्य को पूरे 10-10 अंक मिले।

इसके अलावा राज्य के 47,028 गांव, यानी करीब 89 प्रतिशत गांव, अब डिजिटल रूप से भूमि अभिलेखों से जोड़े जा चुके हैं। इससे बीमा दावों के निपटारे में लगने वाला समय घटा है और पारदर्शिता बढ़ी है। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि योजना में गड़बड़ी करने वाले तत्वों के खिलाफ अब तक 10 से अधिक प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की जा चुकी हैं।

केंद्र सरकार राज्यों को इस योजना के क्रियान्वयन में कई मानकों पर परखती है — जिनमें फसल कटाई प्रयोगों की समयबद्धता व डिजिटल रिकॉर्डिंग, दावों के निपटारे में लगने वाला समय, किसानों की शिकायतों का निवारण और तकनीक अपनाने की दर शामिल है। राजस्थान को इन मानकों पर मिली मजबूती ने ही उसे शीर्ष चार राज्यों में जगह दिलाई है, जबकि कुल मिलाकर देश भर के राज्यों की यह रैंकिंग हर साल केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा जारी की जाती है।

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