प्याज की बढ़ी आवक से कीमतों में गिरावट, महाराष्ट्र में 13% तक गिरे मंडी भाव—देखें क्या है पूरा सच – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 08 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: प्याज की बढ़ी आवक से कीमतों में गिरावट, महाराष्ट्र में 13% तक गिरे मंडी भाव – खरीफ सीजन में प्याज की खेती का रकबा बढ़ने, फसल के लिए अनुकूल परिस्थितियां रहने, बाजार में अच्छी आवक होने और नई खरीफ फसल की आपूर्ति शुरू होने से प्याज की उपलब्धता में सुधार हुआ है। इससे मंडियों और प्रमुख उपभोक्ता बाजारों में प्याज की कीमतों में गिरावट दर्ज की जा रही है। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और राजस्थान समेत प्रमुख उत्पादक राज्यों से खरीफ सीजन की नई प्याज की आवक शुरू हो गई है। इसके साथ ही भंडारित स्टॉक से भी बाजार की मांग पूरी की जा रही है। आने वाले हफ्तों में इन राज्यों से प्याज की आवक और बढ़ने की संभावना है। इससे त्योहारी सीजन के दौरान उपभोक्ता बाजारों में प्याज की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है।

खरीफ प्याज के उत्पादन का अनुमान भी उत्साहजनक है। पूरे भारत में खरीफ प्याज की खेती का रकबा पिछले साल के उच्च स्तर की तुलना में करीब 5 प्रतिशत अधिक रहने का अनुमान है। प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में फसल की स्थिति भी अनुकूल बनी हुई है। कटाई के समय भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का बारिश का पूर्वानुमान भी फसल के लिए अनुकूल है। आने वाले हफ्तों में खरीफ प्याज के प्रमुख क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश की संभावना नहीं है। इससे प्याज की कटाई, सुखाने और परिवहन में आसानी होगी। साथ ही नमी के कारण फसल खराब होने का जोखिम भी कम रहेगा।

प्याज की बेहतर आपूर्ति का असर मंडी कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। प्रमुख प्याज बाजारों में आवक अच्छी बनी हुई है। महाराष्ट्र में प्याज का भारित औसत मंडी भाव 16 सितंबर को करीब ₹4,030 प्रति क्विंटल था, जो करीब 13 प्रतिशत घटकर 3 अक्टूबर को ₹3,475 प्रति क्विंटल रह गया। मंडी भाव में लगातार कमी से संकेत मिलता है कि बाजार में प्याज की आवक बढ़ने के साथ आपूर्ति की स्थिति बेहतर हुई है।

खुदरा बाजारों में भी प्याज की कीमतों में कमी देखने को मिल रही है। पिछले दो हफ्तों में 126 शहरों में प्याज की खुदरा कीमतें ₹1 से ₹21 प्रति किलोग्राम तक कम हुई हैं। तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे प्याज की अधिक खपत वाले राज्यों में भी कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। कई क्षेत्रों में कीमतों में कमी से पता चलता है कि प्याज की उपलब्धता में सुधार केवल कुछ मंडियों तक सीमित नहीं है।

सरकार बफर स्टॉक से प्याज जारी कर उपभोग केंद्रों पर इसकी आपूर्ति बढ़ा रही है। अब तक 123 शहरों में 8 ‘कांदा एक्सप्रेस’ और 467 ट्रकों के जरिए 2 लाख क्विंटल से अधिक प्याज की आपूर्ति की जा चुकी है। सरकार अधिक मात्रा में प्याज उन बाजारों तक पहुंचाने के लिए अतिरिक्त रेल रैक लगाने की योजना भी बना रही है, जहां इसकी खपत ज्यादा है। त्योहारी सीजन को देखते हुए आपूर्ति वितरण की गति और दक्षता बढ़ाने के लिए और रेलगाड़ियां चलाने की योजना है।

फिलहाल बाजार में प्याज की आपूर्ति कई स्रोतों से हो रही है। इसमें खरीफ सीजन की नई फसल की आवक, भंडारित स्टॉक और उपभोग केंद्रों तक बफर स्टॉक से प्याज की लगातार आपूर्ति शामिल है। सरकार प्याज की आवक, स्टॉक और कीमतों में होने वाले बदलाव पर नजर रख रही है। जरूरत के अनुसार व्यवस्थित वितरण और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

कुल मिलाकर, अधिक खरीफ रकबा, अनुकूल फसल परिस्थितियां, कटाई के लिए अनुकूल मौसम, मंडियों में भरपूर आवक और खुदरा कीमतों में व्यापक गिरावट आने वाले हफ्तों में प्याज की पर्याप्त उपलब्धता का संकेत देती है। त्योहारी सीजन से पहले खरीफ सीजन की नई प्याज की आपूर्ति में और तेजी आने तथा सरकारी वितरण प्रयासों के मजबूत होने से आपूर्ति की स्थिति बेहतर रहने तथा कीमतों में और कमी आने की उम्मीद है।

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