एग्रीवेट: 08 अक्टूबर 2026, गुवाहाटी: असम सरकार और IFPRI के बीच कृषि परिवर्तन और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए समझौता – असम सरकार और इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (IFPRI) ने राज्य में कृषि परिवर्तन, जलवायु अनुकूलन और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस साझेदारी का उद्देश्य कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़े क्षेत्रों में शोध, साक्ष्य आधारित नीति निर्माण, सरकारी संस्थानों की क्षमता बढ़ाने और अधिक लचीली तथा विविध कृषि प्रणालियों के विकास को बढ़ावा देना है।
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के अवसर पर असम सरकार के कृषि, सिंचाई और संसदीय कार्य मंत्री पीयूष हजारिका तथा असम सरकार के मुख्य सचिव डॉ. रवि कोटा, IAS उपस्थित रहे। दोनों ने राज्य की कृषि प्राथमिकताओं और संस्थागत साझेदारी को मजबूत करने की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए।
पीयूष हजारिका ने कहा कि असम में धान महत्वपूर्ण फसल बना रहेगा, लेकिन किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि विविधीकरण पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, “धान असम के लिए महत्वपूर्ण बना रहेगा, लेकिन यह जरूरी नहीं कि यह हमारे किसानों के लिए सबसे अधिक लाभदायक फसल हो। हमें विविधीकरण पर ध्यान देना होगा और बागवानी अब असम सरकार का एक प्रमुख फोकस क्षेत्र है।”
उन्होंने कहा कि बागवानी की संभावनाओं को साकार करने के लिए नए शोध, तकनीक, नवाचार और बेहतर नीति निर्माण की जरूरत है। उन्होंने कहा कि IFPRI जैसे संस्थान असम के कृषि परिवर्तन में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
मुख्य सचिव डॉ. रवि कोटा ने राज्य के विकास के अगले चरण के लिए संस्थागत क्षमता को मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नए लोगों की नियुक्तियों और युवा लोगों के सरकारी संस्थानों में आने से संस्थानों और प्रणालियों को मजबूत करने का अवसर मिला है।
उन्होंने यह भी कहा कि अगले पांच वर्षों में पूर्वोत्तर क्षेत्र में कई परियोजनाएं और नीतिगत पहल प्रस्तावित हैं। ऐसे में IFPRI जैसे संस्थानों के साथ साझेदारी से असम के किसानों के जीवन में दीर्घकालिक और सार्थक सुधार लाने में मदद मिल सकती है।
MoU के तहत असम सरकार और IFPRI साझा शोध, साक्ष्य निर्माण, संस्थागत क्षमता विकास, नीति संवाद और सलाहकारी सहयोग के क्षेत्रों में काम करेंगे।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में जलवायु अनुकूल कृषि, बाढ़ से निपटने की रणनीतियां, चावल आधारित कृषि प्रणालियों में विविधीकरण तथा चाय, बागवानी, पशुधन और मत्स्य पालन क्षेत्रों का विकास शामिल है।
इस साझेदारी का व्यापक उद्देश्य किसानों की आय और पोषण संबंधी परिणामों में सुधार करना है। इसके तहत उच्च मूल्य वाली कृषि मूल्य शृंखलाओं के विकास और छोटे किसानों के लिए बाजार से जुड़ाव को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
MoU में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों की सरकारी योजनाओं का रणनीतिक आकलन, जलवायु लचीलापन और बाढ़ के प्रभावों का विश्लेषण तथा उच्च मूल्य वाली कृषि मूल्य शृंखलाओं के विकास के लिए सहयोग का प्रावधान है। छोटे चाय उत्पादकों के साथ-साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मत्स्य पालन और आर्द्रभूमि आधारित आजीविका पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इसके अलावा किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और बाजार प्रणालियों को मजबूत करने, नीति निर्माण और योजनाओं के मूल्यांकन तथा सरकारी संस्थानों में डेटा एनालिटिक्स, नीति मॉडलिंग और प्रभाव मूल्यांकन की क्षमता बढ़ाने पर भी काम किया जाएगा।
असम सरकार के कृषि निदेशक डॉ. पैदिपति उदय प्रवीण, IAS ने कहा कि यह साझेदारी शोध, साक्ष्य और संस्थागत क्षमता निर्माण के माध्यम से राज्य के कृषि विकास प्रयासों को मजबूत करेगी।
IFPRI के दक्षिण एशिया के कार्यवाहक निदेशक और वरिष्ठ शोधकर्ता डॉ. अविनाश किशोर ने कहा कि मजबूत साक्ष्य और बेहतर विश्लेषणात्मक क्षमता से ऐसी नीतियां और निवेश तैयार करने में मदद मिल सकती है, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों की जरूरतों के अनुरूप हों।
उन्होंने कहा कि यह साझेदारी IFPRI को असम सरकार के साथ मिलकर राज्य के कृषि भविष्य के लिए महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं पर काम करने का अवसर प्रदान करेगी।
MoU में दोनों पक्षों की प्राथमिकताओं के अनुरूप संयुक्त रूप से संसाधन जुटाने और परियोजना प्रस्ताव विकसित करने का भी प्रावधान है। विशिष्ट गतिविधियों को परियोजना-विशिष्ट समझौतों के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा।
यह साझेदारी असम की कृषि विकास प्राथमिकताओं को IFPRI की कृषि और खाद्य नीति अनुसंधान, डेटा विश्लेषण तथा नीति संवाद से जुड़ी विशेषज्ञता के साथ जोड़ती है।
इस सहयोग से असम में कृषि विकास के लिए साक्ष्य आधारित दृष्टिकोण को मजबूत करने और राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को अधिक लचीला, विविध और बाजारोन्मुख बनाने के प्रयासों को समर्थन मिलने की उम्मीद है।