एग्रीवेट: Groundnut MSP Procurement: उत्तर प्रदेश के तिल और मूंगफली किसानों के लिए अच्छी खबर है. अब उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए सिर्फ खुले बाजार के भाव पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. केंद्र सरकार ने खरीफ 2026 सीजन के लिए प्रदेश से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर तिल और मूंगफली खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इसके तहत किसानों से कुल 1 लाख 29 हजार 750 मीट्रिक टन उपज खरीदी जाएगी. इसमें 86,500 मीट्रिक टन मूंगफली और 43,250 मीट्रिक टन तिल शामिल है.
इस फैसले की जानकारी केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दी. यह खरीद मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत की जाएगी, जो प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान यानी प्रधानमंत्री-AASHA का हिस्सा है.
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केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश से 86,500 मीट्रिक टन मूंगफली खरीदने की मंजूरी दी है. इस खरीद का कुल MSP मूल्य करीब 650 करोड़ रुपये बताया गया है. इससे उन किसानों को मदद मिल सकती है, जो खरीफ सीजन में मूंगफली की खेती करते हैं. अक्सर फसल तैयार होने के बाद किसानों को मंडियों में सही भाव नहीं मिल पाता. ऐसे में कई बार उन्हें मजबूरी में कम कीमत पर अपनी उपज बेचनी पड़ती है. सरकारी खरीद की मंजूरी से किसानों को अपनी मूंगफली के लिए तय समर्थन मूल्य पाने का विकल्प मिलेगा.
मूंगफली के साथ-साथ तिल की खेती करने वाले किसानों को भी इस फैसले से राहत मिलने की उम्मीद है. सरकार ने प्रदेश से 43,250 मीट्रिक टन तिल खरीदने की मंजूरी दी है. इसके लिए करीब 447 करोड़ रुपये का MSP मूल्य तय किया गया है.
टन तिल की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है।
इस निर्णय के लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी एवं माननीय केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री @ChouhanShivraj जी का उत्तर प्रदेश के समस्त किसान भाइयों की ओर से हृदय से आभार एवं धन्यवाद।
मूल्य समर्थन योजना के तहत जब बाजार में किसी फसल का भाव सरकार की ओर से तय MSP से नीचे चला जाता है, तो तय नियमों और मंजूरी के मुताबिक सरकारी एजेंसियां किसानों से उस फसल की खरीद कर सकती हैं. इसका मकसद किसानों को कम दाम पर फसल बेचने की मजबूरी से बचाना है.
फिलहाल सरकार की ओर से खरीद की मात्रा को मंजूरी दी गई है. तिल और मूंगफली की खरीद कब से शुरू होगी, किन मंडियों या केंद्रों पर उपज ली जाएगी और किसानों को रजिस्ट्रेशन कैसे कराना होगा, इसकी पूरी जानकारी सामने आना बाकी है. इसलिए किसानों को अपने जिले के कृषि विभाग, मंडी समिति और सरकारी खरीद केंद्रों से मिलने वाली सूचना पर नजर रखनी चाहिए.