हरियाणा में धान खरीद को लेकर बवाल! किसानों ने दिल्ली-चंडीगढ़ हाईवे किया जाम, पुलिस ने छोड़ी आंसू गैस – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Paddy Procurement Haryana: हरियाणा में धान की सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से किसानों का गुस्सा बढ़ गया है. कुरुक्षेत्र जिले के शाहाबाद में मंगलवार को किसानों ने दिल्ली-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे-44 को कुछ समय के लिए जाम कर दिया. किसानों का कहना है कि धान की फसल मंडियों में पहुंच चुकी है, लेकिन सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है. प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और पानी की बौछार की.

हाईवे पर पहुंचे किसानों को वहां से हटाने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन चलाए. इसके बाद भी जब प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे तो पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे. इस कार्रवाई के बाद शाहबाद में कुछ देर के लिए माहौल गरमा गया. हालांकि, किसान मौके पर डटे रहे और प्रदर्शन जारी रखा. बीकेयू (चढ़ूनी) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने दावा किया कि पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कई किसानों को हिरासत में लिया.

भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने पहले ही चेतावनी दी थी कि, अगर 22 सितंबर तक धान की सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई तो हाईवे जाम किया जाएगा. संगठन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी का कहना है कि, किसानों की धान की फसल मंडियों में पड़ी है और सरकारी खरीद नहीं होने के कारण उन्हें परेशानी हो रही है. किसानों ने शुरुआत में 15 सितंबर से धान की खरीद शुरू करने की मांग रखी थी. बाद में 22 सितंबर से खरीद शुरू करने पर सहमति बनी थी. मंगलवार सुबह प्रशासनिक अधिकारियों ने भी किसानों से बातचीत कर प्रदर्शन खत्म कराने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी. इसके बाद बड़ी संख्या में पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया.

दरअसल, केंद्र सरकार के तय कार्यक्रम के मुताबिक हरियाणा में धान की सरकारी खरीद 1 अक्टूबर से 15 नवंबर 2026 तक होनी है. वहीं, हरियाणा सरकार ने किसानों की परेशानी को देखते हुए केंद्र से खरीद की तारीख आगे करने का अनुरोध किया था. राज्य सरकार ने 15 सितंबर को केंद्र को पत्र भेजकर 20 सितंबर से ही धान की खरीद शुरू करने की मांग की थी. सरकार का कहना था कि राज्य की कई मंडियों में धान की आवक शुरू हो चुकी है और सीजन की शुरुआत में किसानों को अपनी फसल बेचने में दिक्कत हो रही है.

किसानों का कहना है कि जल्दी पकने वाली कुछ गैर-बासमती धान की किस्में कटकर मंडियों में पहुंचने लगी हैं. ऐसे में अगर सरकारी खरीद शुरू नहीं होती है तो उन्हें मजबूरी में निजी खरीदारों को कम कीमत पर धान बेचना पड़ सकता है. खरीफ मार्केटिंग ईयर 2026-27 के लिए सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,441 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का MSP 2,461 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है. किसानों की मांग है कि जो धान खरीद के लिए तय मानकों को पूरा करता है, उसकी सरकारी खरीद जल्द शुरू की जाए.

सरकारी खरीद में धान की क्वालिटी और नमी की तय सीमा भी अहम है. अधिकारियों के मुताबिक धान में अधिकतम 17 प्रतिशत नमी की सीमा रखी गई है. किसानों का कहना है कि ताजा कटी धान में नमी ज्यादा हो सकती है, लेकिन मंडियों में जो धान सूखकर खरीद के लिए तैयार है, उसकी खरीद में देरी नहीं होनी चाहिए.

हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा है कि सरकार किसानों को फसल बेचने में किसी तरह की परेशानी नहीं होने देगी. उन्होंने बताया कि मंडियों में निजी निर्यातक बासमती धान की खरीद कर रहे हैं. मंत्री के मुताबिक, ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर राज्य में करीब 24 लाख एकड़ धान का पंजीकरण हुआ है. इनमें से 19.34 लाख एकड़ क्षेत्र का सैटेलाइट इमेजरी के जरिए सत्यापन किया जा चुका है, जबकि बाकी क्षेत्र का सत्यापन किया जा रहा है. अब किसानों की नजर इस बात पर है कि सरकारी खरीद कब शुरू होती है.

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