देश ने समय से पांच महीने पहले बनाई 11 करोड़ फार्मर ID—देखें क्या है पूरा सच – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 26 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: देश ने समय से पांच महीने पहले बनाई 11 करोड़ फार्मर ID – केंद्र सरकार के डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत देश में 11 करोड़ फार्मर ID बनाने का राष्ट्रीय लक्ष्य तय समय-सीमा से करीब पांच महीने पहले ही पूरा हो गया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को बताया कि यह आंकड़ा 23 अक्टूबर की रात को ही हासिल हो गया, जबकि इसके लिए तय की गई समय-सीमा 31 मार्च 2027 थी।

फार्मर ID असल में किसान की पहचान को उसके जमीन के रिकॉर्ड, आधार और बैंक खाते से जोड़ने वाला एक डिजिटल कोड है। एक बार यह बन जाने के बाद किसान को हर योजना के लिए अलग-अलग दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि उसकी जमीन, बुवाई का ब्योरा और पात्रता की जानकारी सिस्टम में पहले से मौजूद रहती है।

मंत्रालय के मुताबिक फार्मर ID आधारित सेवा प्रणाली के जरिए अब तक छह करोड़ से ज्यादा किसानों को विभिन्न योजनाओं का सीधा लाभ मिल चुका है। चौहान ने केंद्र, राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और जिला व गांव स्तर के अधिकारियों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी और इसे सहकारी संघवाद की मिसाल बताया।

फार्मर ID बनाने का काम पिछले कुछ महीनों में लगातार तेज हुआ है। फरवरी 2026 में देश में 8.47 करोड़ फार्मर ID बन चुकी थीं, अप्रैल में यह आंकड़ा 9.25 करोड़ और अगस्त तक 10.33 करोड़ पहुंच गया था। इसके बाद अगले दो महीनों में बाकी बची संख्या पूरी करते हुए 23 अक्टूबर की रात 11 करोड़ का आंकड़ा छू लिया गया।

अप्रैल में जब 9.25 करोड़ का आंकड़ा सामने आया था, तब मंत्रालय ने बताया था कि यह काम देश के 19 राज्यों में फैला हुआ है, जिसमें हर राज्य की अपनी भूमि-रिकॉर्ड प्रणाली को केंद्रीय डेटाबेस से जोड़ने की जटिल प्रक्रिया शामिल थी। राज्यों के बीच तकनीकी समन्वय और गांव-गांव जाकर डेटा जुटाने की प्रक्रिया की वजह से ही यह अभियान कई चरणों में पूरा हुआ।

चौहान ने फार्मर ID को “पारदर्शी, जवाबदेह और किसान-केंद्रित शासन प्रणाली की मजबूत बुनियाद” बताया। उन्होंने यह भी कहा कि बटाईदार और वास्तविक काश्तकार किसानों को भी नियमों के अनुरूप इस प्लेटफॉर्म में शामिल करने का प्रयास जारी है, ताकि कोई भी पात्र किसान इस डिजिटल पहचान से छूट न जाए।

कृषि मंत्रालय “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” के सिद्धांत के तहत फार्मर रजिस्ट्री को और मजबूत करने की योजना पर काम कर रहा है। आने वाले महीनों में इस डेटाबेस का इस्तेमाल और योजनाओं को किसानों तक सीधे पहुंचाने में किया जाएगा, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और योजनाओं का लाभ समय पर मिल सकेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे फार्मर ID से जुड़े किसानों की संख्या बढ़ेगी, वैसे-वैसे सरकार के लिए यह आसान होगा कि वह किसी भी प्राकृतिक आपदा या फसल नुकसान की स्थिति में राहत राशि सीधे और तेजी से संबंधित किसानों तक पहुंचा सके, बिना पुराने ऑफलाइन सत्यापन के झंझट के।

डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत सिर्फ फार्मर ID ही नहीं, बल्कि किसानों की जमीन का डिजिटल नक्शा, मृदा से जुड़ा डेटा और फसल बुवाई का रिकॉर्ड भी एक साथ जोड़ा जा रहा है। कृषि मंत्रालय का कहना है कि इससे आने वाले समय में मौसम आधारित सलाह, फसल बीमा के दावों का जल्दी निपटारा और सरकारी योजनाओं की निगरानी पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगी।

अब तक बैंकिंग और राशन जैसी सुविधाओं में आधार आधारित पहचान से जो पारदर्शिता आई है, कृषि मंत्रालय उसी तरह की व्यवस्था खेती-किसानी से जुड़ी योजनाओं में भी लागू करना चाहता है। मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक फार्मर ID पूरी तरह तैयार हो जाने के बाद फर्जी या दोहरे लाभार्थियों की पहचान करना भी सरकार के लिए आसान हो जाएगा, जिससे असली जरूरतमंद किसानों तक योजनाओं का पैसा और तेजी से पहुंच सकेगा।

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