Kisan Karwan 2.0: विंध्य के किसानों को मिला तरक्की का नया मंत्र! वैज्ञानिकों ने बताए कमाई बढ़ाने के तरीके – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: खेती को परंपरागत तौर-तरीकों से आगे बढ़ाकर आधुनिक तकनीक, नई फसलों और कृषि उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में किसान कारवां 2.0 लगातार किसानों के बीच पहुंच रहा है. इसी अभियान के तहत 2 नवंबर को काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के स्वतंत्रता भवन सभागार में छठी क्षेत्रीय किसान महासभा का आयोजन किया गया. इस महासभा में विंध्य क्षेत्र के किसानों को खेती में बदलाव और आमदनी बढ़ाने के कई नए मंत्र मिले.

महासभा में स्ट्रॉबेरी, ड्रैगन फ्रूट, मिर्च और टमाटर जैसी फसलों की खेती से लेकर मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, औषधीय खेती, जैविक और प्राकृतिक खेती और कृषि उत्पादों के वैल्यू एडिशन पर विस्तार से चर्चा हुई. कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने बताया कि विंध्य जैसे क्षेत्रों में सीमित पानी और स्थानीय जलवायु को ध्यान में रखकर फसल का चुनाव किया जाए तो खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है.

कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों, विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों, अधिकारियों, प्रगतिशील किसानों और कृषि उद्यमियों ने भाग लिया. भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार और पद्मश्री सम्मानित चंद्रशेखर सिंह ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. महासभा का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक खेती की जानकारी देने के साथ उनकी समस्याओं, अनुभवों और सफल प्रयोगों को साझा करने का मंच उपलब्ध कराना रहा.

महासभा में विंध्य क्षेत्र में खेती के बदलते स्वरूप और किसानों के सामने मौजूद चुनौतियों पर विशेष चर्चा हुई. भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि उनके संस्थान ने सब्जियों की 200 से अधिक किस्में विकसित की हैं. इन उन्नत किस्मों ने किसानों को बेहतर उत्पादन और आय बढ़ाने के नए अवसर दिए हैं.

उन्होंने बताया कि संस्थान के प्रयासों से बड़ी संख्या में किसानों को लाभ मिला है. वहीं मशरूम उत्पादन और मधुमक्खी पालन जैसे वैल्यू एडिशन आधारित कार्यों से महिलाओं के लिए भी रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़े हैं.

विशेषज्ञों ने कहा कि विंध्य में खेती को टिकाऊ और मुनाफे का व्यवसाय बनाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है. इसके लिए जल संरक्षण, बेहतर बीजों का इस्तेमाल, वैज्ञानिक सलाह, फसल विविधीकरण और कृषि उत्पादों के उचित विपणन पर भी ध्यान देना होगा.

किसान महासभा के प्रमुख सत्रों में शामिल ‘बदलता विंध्य’ में बागवानी और आधुनिक कृषि तकनीकों पर चर्चा की गई. इस पैनल चर्चा का संचालन किसान तक के संपादक ओमप्रकाश ने किया.

सत्र में मिर्जापुर, सोनभद्र और प्रयागराज में खेती के बदलते स्वरूप और नए प्रयोगों पर बातचीत हुई. इसमें स्ट्रॉबेरी की खेती करने वाले युवा किसान राजीव सिंह पटेल, प्रगतिशील किसान श्रेयस सिंह, मिर्जापुर के जिला हॉर्टिकल्चर अधिकारी मेवाराम, कृषि विज्ञान केंद्र मिर्जापुर के प्रमुख श्रीराम सिंह और युवा किसान अमित ने अपने अनुभव साझा किए.

चर्चा में बताया गया कि विंध्य क्षेत्र में अब किसान परंपरागत फसलों के साथ-साथ नई और अधिक संभावनाओं वाली फसलों की ओर भी बढ़ रहे हैं. मिर्जापुर और सोनभद्र में ड्रैगन फ्रूट और स्ट्रॉबेरी जैसी फसलों ने बागवानी के क्षेत्र में नए अवसर पैदा किए हैं.

जिला हॉर्टिकल्चर अधिकारी मेवाराम ने बताया कि स्थानीय जलवायु और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप बागवानी फसलों का चयन किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन के साथ किसान अपनी खेती में विविधता लाकर आमदनी के नए स्रोत तैयार कर सकते हैं.

विशेषज्ञों ने कहा कि खेती में बदलाव के लिए किसानों को केवल नई फसल अपनाने की सलाह देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें बेहतर पौध सामग्री, उत्पादन तकनीक, रोग नियंत्रण और बाजार तक पहुंच की जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी.

महासभा के एक अन्य महत्वपूर्ण सत्र ‘विंध्य की हुंकार, खेती दमदार’ में कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों और वैश्विक बाजार की संभावनाओं पर चर्चा हुई. इस सत्र का संचालन किसान तक की सीनियर असिस्टेंट एडिटर हिमानी दीवान ने किया.

इसमें प्रगतिशील किसान शिव प्रकाश सिंह, महिला किसान वंदना सिंह, कृषि विज्ञान केंद्र वाराणसी के प्रमुख डॉ. नवीन सिंह, भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राजेश दुबे और डॉ. नीरज सिंह ने हिस्सा लिया.

चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि विंध्य क्षेत्र की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसी फसलों और किस्मों को बढ़ावा देने की जरूरत है, जो कम पानी में भी अच्छा उत्पादन दे सकें.

भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राजेश दुबे ने बताया कि संस्थान की ओर से विकसित की जा रही उन्नत सब्जी किस्मों ने खेती में बदलाव लाने के साथ किसानों की आमदनी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

कृषि विज्ञान केंद्र वाराणसी के प्रमुख डॉ. नवीन सिंह ने कहा कि खेती में तेजी से बदलाव हो रहा है. युवा किसान अब नई तकनीकों और नई फसलों को अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं. यह बदलाव कृषि क्षेत्र के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है.

विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी कि कम पानी वाले क्षेत्रों में फसल का चयन करने के साथ मिट्टी की नमी बनाए रखने, सिंचाई का बेहतर प्रबंधन करने और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने पर भी विशेष ध्यान दें.

महासभा में खेती के साथ दूसरे कृषि आधारित व्यवसायों की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई. ‘खेती में नए विकल्प’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा का संचालन किसान तक के विशेष संवाददाता धर्मेंद्र सिंह ने किया.

इस सत्र में कृषि विज्ञान केंद्र वाराणसी के वैज्ञानिक राहुल सिंह ने बताया कि मशरूम उत्पादन और शहद उत्पादन किसानों के लिए कम निवेश में अतिरिक्त आमदनी का अच्छा विकल्प बनकर उभर रहे हैं. इन गतिविधियों के माध्यम से किसान अपनी पारंपरिक खेती के साथ अतिरिक्त व्यवसाय भी विकसित कर सकते हैं.

वाराणसी के बागवानी विशेषज्ञ मनीष पांडे ने कहा कि युवा किसान अब बागवानी फसलों की ओर विशेष रुचि दिखा रहे हैं. इससे कृषि क्षेत्र में नए उद्यमियों के लिए अवसर तैयार हो रहे हैं.

सोनभद्र के प्रगतिशील किसान भानु भास्कर ने अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए बताया कि वह गोविंद भोग नामक धान की खेती कर रहे हैं. इस किस्म से उन्हें अच्छा लाभ मिल रहा है. उन्होंने बताया कि फसल तैयार होने से पहले ही खेत से धान की बुकिंग हो चुकी है. इससे किसानों को बाजार की मांग के अनुरूप फसल उत्पादन करने की सीख मिलती है.

वहीं सोनभद्र कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अविनाश राय ने बताया कि जिले में बागवानी, जैविक और प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में नए प्रयोग हो रहे हैं. किसान मोटे अनाज की खेती के साथ बागवानी फसलों को भी अपना रहे हैं और बेहतर आमदनी के अवसर तलाश रहे हैं.

किसान कारवां 2.0 की महासभा में कृषि परिषद के गठन की पहल भी चर्चा का महत्वपूर्ण विषय रही. इसका उद्देश्य कृषि अधिकारियों, वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों को एक साझा मंच पर लाकर किसानों और सरकार के बीच संवाद को मजबूत करना है.

किसानों को खेती के दौरान बीज, सिंचाई, फसल सुरक्षा, उत्पादन लागत, उपज के उचित मूल्य और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़ी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. कई बार किसानों की स्थानीय समस्याएं संबंधित विभागों तक प्रभावी तरीके से नहीं पहुंच पातीं.

ऐसे में कृषि परिषद के माध्यम से किसानों की जमीनी समस्याओं और उनके अनुभवों को अधिकारियों और संबंधित विभागों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है. इससे कृषि योजनाओं को किसानों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार करने और उनके क्रियान्वयन को बेहतर बनाने का अवसर मिलेगा.

इस पहल का उद्देश्य किसानों की आवाज को नीतिगत स्तर तक पहुंचाना, वैज्ञानिकों और किसानों के बीच संवाद बढ़ाना और कृषि क्षेत्र में योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए जरूरी फीडबैक उपलब्ध कराना है.

किसान कारवां 2.0 के तहत खेती में उल्लेखनीय काम करने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘कृषि वीर’ सम्मान की पहल की गई है. इसके तहत उन किसानों को पहचान दी जा रही है, जिन्होंने खेती में नवाचार, फसल विविधीकरण, उद्यमिता, वैल्यू एडिशन, जैविक एवं प्राकृतिक खेती और डेयरी जैसे क्षेत्रों में बेहतर काम किया है.

वाराणसी में आयोजित छठी क्षेत्रीय किसान महासभा के दौरान विंध्य क्षेत्र के अलग-अलग जिलों से चयनित 10 किसानों को सम्मानित किया गया. भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार और पद्मश्री सम्मानित चंद्रशेखर सिंह ने किसानों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न प्रदान किए.

1. राजीव सिंह पटेल – मिर्जापुर

2. श्रेयस सिंह – मिर्जापुर

3. वंदना सिंह – मिर्जापुर

4. राम दुबे – मिर्जापुर

5. बाबूलाल मौर्य – सोनभद्र

6. शिव प्रकाश सिंह – सोनभद्र

7. नंदिनी – सोनभद्र

8. मानसिंह पटेल – प्रयागराज

9. सी.एल. गौतम – प्रयागराज

10. भानु भास्कर – सोनभद्र

इस सम्मान का उद्देश्य ऐसे किसानों के प्रयासों को सामने लाना है, जिन्होंने खेती को केवल परंपरागत पेशे तक सीमित न रखकर उसे नवाचार और उद्यमिता से जोड़ने का काम किया है.

किसान महासभा में खेती और तकनीक से जुड़ी गंभीर चर्चाओं के साथ किसानों के मनोरंजन का भी ध्यान रखा गया. कार्यक्रम के दौरान सीतापुर के जादूगर सलमान ने जादू के विभिन्न करतब दिखाकर उपस्थित किसानों का मनोरंजन किया.

इससे कार्यक्रम में सहभागिता और उत्साह का माहौल बना रहा. किसान कारवां 2.0 के मंच पर विशेषज्ञों की तकनीकी जानकारी, प्रगतिशील किसानों के अनुभव, नवाचारों की चर्चा और सम्मान समारोह के जरिए कृषि के विभिन्न पहलुओं को एक साथ प्रस्तुत किया गया.

स्ट्रॉबेरी और ड्रैगन फ्रूट जैसी नई फसलों से लेकर गोविंद भोग धान, मशरूम और शहद उत्पादन तक किसानों के सामने कमाई के कई नए विकल्प उभर रहे हैं. जरूरत इस बात की है कि वैज्ञानिकों की सलाह, स्थानीय संसाधनों और बाजार की मांग के बीच बेहतर तालमेल बनाया जाए.

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