किसानों के विरोध के बीच भारत-न्यूजीलैंड व्यापार समझौता आज से लागू, ये कृषि उत्पाद FTA से बाहर – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: New Zealand India FTA:  किसान संगठनों के भारी विरोध के बीच भारत सरकार और न्यूजीलैंड का मुक्त व्यापार समझौता आज 20 अक्टूबर से लागू हो गया है. इस समझौते पर बीते 27 अप्रैल को दोनों देशों ने हस्ताक्षर किए थे. इस समझौते के बाद दोनों देश एक-दूसरे को 100 फीसदी ड्यूटी फ्री उत्पादों का आयात और निर्यात कर सकेंगे. केंद्र सरकार ने कहा है कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस समझौते से डेयरी और कृषि सेक्टर को बाहर रखा गया है. लेकिन, किसान संगठनों ने इस समझौते को किसानों को बर्बाद बनने वाला बताया है. अखिल भारतीय किसान सभा, किसान मजदूर मोर्चा ने केंद्र सरकार से सभी तरह के फ्री ट्रेड डील को रद्द करने की मांग की है.

केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) आज 20 अक्टूबर से लागू होना प्रस्तावित था. विदेश व्यापार मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी के हवाले से पीटीआई ने कहा कि वस्तुओं एवं सेवाओं के द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के साथ ही निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए दोनों देशों ने 27 अप्रैल को मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.

भारत न्यूजीलैंड समझौते से कुछ कृषि और संबंधित क्षेत्र के उत्पादों को इससे बाहर रखा गया है, जैसे कि दुग्ध उत्पादों में दूध, क्रीम, मट्ठा, दही, पनीर. पशु उत्पाद (भेड़ के मांस को छोड़कर), वनस्पति उत्पाद (प्याज, चना, मटर, मक्का, बादाम आदि), चीनी, कृत्रिम शहद, पशु, वनस्पति या सूक्ष्मजीव वसा और तेल, हथियार और गोला-बारूद, रत्न और आभूषण, तांबा और उससे बनी वस्तुएं (कैथोड, कारतूस, छड़, बार, कॉइल आदि), एल्युमिनियम और उससे बनी वस्तुएं (पिंड, बिलेट, तार की छड़ें) आदि को समझौते से बाहर रखा गया है.

अखिल भारतीय किसान महासभा (AIKS) का आरोप है कि समझौते के तहत डेयरी और उससे जुड़े कुछ उत्पादों पर आयात शुल्क कम या खत्म होने से भारत के छोटे और सीमांत डेयरी किसानों के हितों को नुकसान पहुंच सकता है. किसान मजदूर मोर्चा ने मुक्त व्यापार समझौतों से किसानों का भविष्य संकट में पड़ने की आशंका जताई है. संगठन ने कहा है कि केंद्र सरकार सभी तरह के मुक्त व्यापार समझौतों को रद्द करे. वहीं, सेब बागवानों को डर है कि न्यूजीलैंड से आने वाले सस्ते सेबों के कारण घरेलू बाजार पर असर पड़ेगा और उनकी आमदनी घटेगी. वहीं, भेड़ के मांस के आयात को ड्यूटी फ्री किया जा रहा है. इससे घरेलू भेड़ पालकों और मीट कारोबार को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है.

कृषि और किसान कल्याण विभाग के तहत एक संयुक्त कृषि उत्पादकता परिषद दोनों देशों के जुड़ाव की देखरेख करेगी, कार्यान्वयन की निगरानी करेगी और सहमत परिणामों की डिलीवरी पक्की करेगी. बयान में कहा गया है कि एग्रीकल्चर प्रोडक्टिविटी पार्टनरशिप भारत में सेब के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना का समर्थन करती है, जो आधुनिक बाग प्रबंधन, उत्पादकता बढ़ाने, एकीकृत कीट और रोग प्रबंधन, उन्नत फसल कटाई के बाद की हैंडलिंग और जलवायु लचीली उत्पादन प्रणालियों पर ध्यान केंद्रित करता है.

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