एग्रीवेट: हिमाचल प्रदेश में सेब के कार्टन में तय मात्रा से ज्यादा माल भरने पर कृषि उपज मंडी समितियों (APMC) ने कार्रवाई शुरू कर दी है. शिमला और सोलन जिलों की अलग-अलग मंडियों में पिछले दो दिनों में करीब 30 आढ़तियों के चालान काटे गए हैं. APMC अधिकारियों के मुताबिक, मंडियों में जांच के दौरान 27 से 28 किलो वजन वाले सेब के कार्टन पाए गए. तय सीमा से ज्यादा वजन मिलने पर सेब का कारोबार करने वाले संबंधित आढ़तियों के खिलाफ चालान की कार्रवाई की गई. अधिकारियों का कहना है कि मंडियों में सेब की पैकिंग और तय वजन के नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी बढ़ाई गई है.
सरकारी निर्देशों के मुताबिक, सेब के एक सामान्य कार्टन का वजन करीब 22 से 23 किलो होना चाहिए. लेकिन मंडियों में इससे ज्यादा वजन वाले कार्टन पहुंचने की शिकायतें मिल रही थीं. इसके बाद कृषि उपज मंडी समिति (APMC) ने मंडियों में जांच शुरू की. APMC शिमला और किन्नौर के सचिव रविंदर शर्मा ने द ट्रिब्यून को बताया कि ओवरवेट कार्टन की शिकायतों के बाद मंडियों में निरीक्षण किया गया. जहां भी तय वजन से ज्यादा के कार्टन मिले, वहां संबंधित आढ़तियों के चालान किए गए.
उन्होंने बताया कि इससे पहले भी ओवर-पैकिंग की शिकायत मिलने पर APMC की ओर से संबंधित आढ़तियों को नोटिस जारी किए जाते रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि मंडियों में सेब के कार्टन के तय वजन के नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है. बाजार अधिकारियों के मुताबिक, ज्यादा वजन वाले कार्टन की समस्या छोटे आकार के सेबों में ज्यादा देखने को मिली. जांच के दौरान कुछ कार्टन का वजन 27 से 28 किलो तक पाया गया. APMC सोलन के सचिव राघव सूद ने बताया कि बेहतर ग्रेड के सेब वाले कार्टन का वजन आमतौर पर 24 से 25 किलो के बीच था.
मार्केटिंग अधिकारियों के मुताबिक, यूनिवर्सल कार्टन लागू होने के बाद ओवरपैकिंग की समस्या में काफी कमी आई है. इससे पहले टेलीस्कोपिक कार्टन में एक ही कार्टन में 35 से 38 किलो तक सेब भर दिए जाते थे. APMC शिमला और किन्नौर के सचिव रविंदर शर्मा ने कहा कि यूनिवर्सल कार्टन से किसानों को प्रति कार्टन करीब 8 से 10 किलो तक का सीधा फायदा हुआ है. हालांकि, सेब के कार्टन में ज्यादा माल भरने का मुद्दा अभी भी विवाद का विषय बना हुआ है. इस मामले में किसान और आढ़ती एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. मंडी अधिकारियों की ओर से तय वजन के नियमों का पालन कराने के लिए जांच और कार्रवाई जारी है.
सेब के कार्टन में ज्यादा फल भरने के मुद्दे पर किसान और आढ़ती एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. कुछ किसानों का कहना है कि आढ़तियों और लोडरों की ओर से एक कार्टन में ज्यादा सेब भरने का दबाव बनाया जाता है. किसानों के मुताबिक, ज्यादा फल भरने पर लोडरों को भी फायदा होता है. वहीं, आढ़तियों का आरोप है कि कुछ किसान कम गुणवत्ता वाले सेब को एक ही कार्टन में ज्यादा मात्रा में भरते हैं. इससे पैकिंग सामग्री पर होने वाला खर्च कम हो जाता है.