भारतीय चाय उद्योग को उपराष्ट्रपति की सलाह, आधुनिक तकनीक से लेकर रिसर्च और ब्रांडिंग पर दिया जोर – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Tea Research: भारत के चाय उद्योग को दुनिया के बाजार में और मजबूत बनाने के लिए रिसर्च, नई तकनीक, बेहतर क्वालिटी और मजबूत भारतीय ब्रांड पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है. उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने सोमवार को तमिलनाडु के कूनूर में आयोजित UPASI टी रिसर्च फाउंडेशन के शताब्दी सम्मेलन में चाय उद्योग को लेकर यह बात कही. उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में मुकाबला लगातार बढ़ रहा है, इसलिए भारत को सिर्फ ज्यादा चाय पैदा करने पर नहीं, बल्कि उसकी क्वालिटी और बाजार में पहचान मजबूत करने पर भी ध्यान देना होगा.

उपराष्ट्रपति ने कहा कि चाय क्षेत्र में ऐसा रिसर्च बढ़ाया जाना चाहिए, जिससे किसानों और उत्पादकों की लागत कम हो और उत्पादन के साथ क्वालिटी भी बेहतर हो. इसके लिए खेती के साथ-साथ चाय फैक्ट्रियों को भी आधुनिक बनाने की जरूरत है. उन्होंने बदलती बाजार जरूरतों के हिसाब से तकनीक अपनाने और चाय की प्रोसेसिंग व मैन्युफैक्चरिंग को बेहतर बनाने पर जोर दिया. उनके मुताबिक, रिसर्च सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका फायदा सीधे चाय उत्पादकों तक पहुंचना चाहिए.

भारतीय चाय के लिए एक और बड़ा मुद्दा ब्रांडिंग का है. उपराष्ट्रपति ने चाय उत्पादकों और एक्सपोर्टर्स से सिर्फ थोक में चाय बेचने के बजाय मजबूत भारतीय ब्रांड तैयार करने की अपील की. उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान बनाने के लिए भारतीय चाय की अलग ब्रांड वैल्यू तैयार करनी होगी. अगर भारतीय चाय को मजबूत ब्रांड के साथ बाजार में पेश किया जाता है, तो इससे उसकी पहचान बढ़ाने के साथ कीमत और कारोबार को भी फायदा मिल सकता है.

चाय उद्योग में वैल्यू एडिशन को भी अहम माना गया. इसका मतलब है कि सिर्फ सामान्य चाय बेचने के बजाय नए तरह के उत्पाद और बेहतर पैकेजिंग व प्रोसेसिंग के जरिए ज्यादा वैल्यू वाले उत्पाद तैयार किए जाएं. उपराष्ट्रपति ने उद्योग से जुड़े लोगों से नए उत्पाद, नई प्रोसेसिंग तकनीक और नए बाजार तलाशने के लिए मिलकर काम करने को कहा. भारत के पास बड़ा घरेलू बाजार भी है. ऐसे में देश के अंदर चाय की खपत और अलग-अलग तरह के चाय उत्पादों की संभावनाओं का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है.

चाय उद्योग की तरक्की में बागान मजदूरों की भूमिका भी अहम है. राधाकृष्णन ने कहा कि उद्योग के विकास के साथ मजदूरों के कल्याण को भी बराबर महत्व दिया जाना चाहिए. उन्होंने साफ कहा कि चाय उद्योग और श्रमिकों का हित एक-दूसरे से जुड़ा है. इसलिए उद्योग को आगे बढ़ाने की योजनाओं में श्रमिकों की जरूरतों और उनकी बेहतर स्थिति का भी ध्यान रखना जरूरी है.

इस सम्मेलन का एक खास मौका यूपीएएसआई टी रिसर्च फाउंडेशन के 100 साल पूरे होना भी रहा. उपराष्ट्रपति ने चाय पर रिसर्च के क्षेत्र में फाउंडेशन के लंबे समय से किए जा रहे काम की तारीफ की. उन्होंने आने वाले समय में रिसर्च का काम और मजबूत करने की जरूरत बताई. साथ ही, रिसर्च सेंटरों में नई सुविधाएं बढ़ाने और चाय के क्षेत्र में सामने आ रही नई परेशानियों को देखते हुए रिसर्च को आगे बढ़ाने पर जोर दिया. कार्यक्रम में उन्होंने ‘टी रिसर्च इन साउथ इंडिया – ए कंपेंडियम’ नाम की किताब का भी विमोचन किया. सम्मेलन में चाय बागान मालिकों, चाय पर काम करने वाले एक्सपर्ट्स, उद्योग से जुड़े लोगों और चाय के कारोबार से जुड़े दूसरे लोगों ने हिस्सा लिया.

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