एग्रीवेट: 11 अक्टूबर 2026, श्योपुर: पारंपरिक खेती छोड़ 150 बीघा में मिर्ची उगा रही श्योपुर की 42 महिलाएं, दिल्ली-जयपुर मंडी भेजी पहली खेप – मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले के माधो का डेरा गांव की 42 महिलाओं ने पारंपरिक फसलों की जगह मिर्ची उत्पादन को अपनाया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़ी चार स्वसहायता समूहों की ये महिलाएं करीब 150 बीघा भूमि में मिर्ची की खेती कर रही हैं। महिलाओं ने इसी साल मई में मिर्ची की बुवाई की थी। अब खेतों में फसल तैयार हो गई है और तुड़ाई भी शुरू हो चुकी है। मिर्ची की पहली खेप जयपुर और दिल्ली की मंडियों में भेजी गई है।
कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा के मार्गदर्शन और जिला पंचायत के सीईओ श्री कार्तिकेय जायसवाल के निर्देशन में श्योपुर जिले में एनआरएलएम के तहत स्वसहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आजीविका बढ़ाने के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित कर रही हैं। इसी कड़ी में श्योपुर से करीब 35 किलोमीटर दूर माधो का डेरा गांव की महिलाओं ने नकदी फसल के रूप में मिर्ची की खेती शुरू की है।
गांव की चार स्वसहायता समूहों- गुरुनानक, डॉ. अंबेडकर, माता गुलाब देवी और गुरुनारायण से जुड़ी 42 महिलाएं लगभग 150 बीघा भूमि में मिर्ची का उत्पादन कर रही हैं। इन महिलाओं के परिवारों के पास कम भूमि है। पारंपरिक फसलों से होने वाली आय परिवार की जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त नहीं हो पाती थी। ऐसे में एनआरएलएम ने महिलाओं को नकदी फसलों और सब्जी उत्पादन से जोड़ने की पहल की।
मिर्ची उत्पादन शुरू करने के लिए चारों स्वसहायता समूहों की महिलाओं को लगभग 18 लाख रुपए की सीसीएल राशि उपलब्ध कराई गई। इससे महिलाओं ने बेहतर किस्म के बीज, खाद और खेती के लिए जरूरी अन्य संसाधन जुटाए। एनआरएलएम के तकनीकी सहयोग से महिलाओं ने वैज्ञानिक पद्धति अपनाते हुए अपने-अपने खेतों में दो से छह बीघा तक भूमि पर मिर्ची की बुवाई की। सिंचाई के लिए उद्यानिकी विभाग की योजना के तहत अनुदान लेकर ड्रिप सिस्टम भी खरीदे गए। इससे खेतों में ड्रिप पद्धति से सिंचाई की व्यवस्था की गई।
मिर्ची उत्पादक किसान श्रीमती सीमा बाई ने बताया कि उन्होंने पांच बीघा भूमि में मिर्ची लगाई है। अब फसल की तुड़ाई शुरू हो गई है और मिर्ची बिक्री के लिए जयपुर मंडी भेजी गई है। उनके अनुसार, मिर्ची की तुड़ाई अप्रैल महीने तक चलने की उम्मीद है। इस दौरान करीब 12 बार तुड़ाई होगी। सीमा बाई ने बताया कि एक बीघा में लागत निकालने के बाद करीब दो लाख रुपए की आमदनी होने का अनुमान है। इस हिसाब से पांच बीघा में मिर्ची की खेती से उन्हें लगभग 10 लाख रुपए का लाभ होने की उम्मीद है।
एनआरएलएम के नोडल अधिकारी अनुज विजयवर्गीय ने बताया कि कृषि सखियों के माध्यम से छोटी जोत वाले किसानों को पारंपरिक फसलों के स्थान पर नकदी फसलों और सब्जी उत्पादन से जोड़ने का काम किया जा रहा है। माधो का डेरा गांव में 150 बीघा भूमि में मिर्ची उत्पादन का क्लस्टर तैयार किया गया है।
एनआरएलएम के जिला परियोजना प्रबंधक (डीपीएम) सोहनकृष्ण मुदगल ने बताया कि शासन की मंशा के अनुरूप किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से स्वसहायता समूहों की महिलाओं को नकदी फसलों के उत्पादन के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके साथ ही उद्यानिकी और मसाला फसलों के क्षेत्र में भी काम किया जा रहा है।