एग्रीवेट: दीवाली से पहले ही दिल्ली की हवा जहरीली होनी शुरू हो गई है. सोमवार को दिल्ली में हवा गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) इस मौसम में पहली बार ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गया. 21 अक्टूबर से दिल्ली-NCR में हवा की गुणवत्ता को बिगड़ने से बचाने के लिए GRAP का चरण 1 लागू है, लेकिन इसका असर नहीं दिखने के बाद अब अगले चरणों को लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है.
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के अनुसार दिल्ली की वायु गुणवत्ता सोमवार को इस मौसम में पहली बार ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई और सुबह नौ बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 312 दर्ज किया गया. वहीं, सफदरजंग मौसम केंद्र में न्यूनतम तापमान 16.4 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से 1.1 डिग्री अधिक है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार अन्य मौसम केंद्रों जैसे पालम में न्यूनतम तापमान 16.4 डिग्री सेल्सियस, लोधी रोड में 16.8 डिग्री, रिज में 17.2 डिग्री और आया नगर में 16.7 डिग्री दर्ज किया गया.
पीएम किसान की 24वीं किस्त जारी: कोंडागांव के 58,641 किसानों के खातों में भेजे गए ₹11.69 करोड़ – एग्रीवेट
हवा की रफ्तार कम रहने के कारण प्रदूषक कण वातावरण में जमा हो सकते हैं, जिससे हवा की क्वालिटी खराब बनी रहने की आशंका है. ऐसे में हवा की रफ्तार बढ़ने तक दिल्ली-एनसीआर के लोगों को प्रदूषण से राहत मिलने की उम्मीद कम है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के पूर्वानुमानों के मुताबिक आने वाले दिनों में भी दिल्ली की हवा खराब कैटेगरी में रह सकती है.
ग्रैप यानी ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान को वायु प्रदूषण के स्तर के आधार पर अलग-अलग चरणों में लागू किया जाता है. इसके पहले चरण को तब लागू किया जाता है, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 201 से 300 के बीच यानी खराब श्रेणी में पहुंच जाता है. इसका उद्देश्य प्रदूषण को और गंभीर होने से रोकना और समय रहते नियंत्रण के उपाय करना है. ग्रैप-1 लागू होने के बाद सड़कों पर मशीनों से सफाई, पानी का छिड़काव और निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के उपाय तेज किए जाएंगे.
खुले में कचरा जलाने पर रोक का सख्ती से पालन कराया जाएगा. इसके अलावा, कोयले और लकड़ी से चलने वाले तंदूरों के इस्तेमाल पर भी निर्धारित नियमों के अनुसार पाबंदियां लागू होंगी. प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों और औद्योगिक इकाइयों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी. प्रदूषण नियंत्रण के लिए संबंधित विभागों को इन उपायों की निगरानी करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं.