एग्रीवेट: 30 अक्टूबर 2026, भोपाल: भोपाल में मत्स्य निवेशक-निर्यातक कॉन्क्लेव, अंतर्देशीय मछली पालकों को निर्यात बाजार से जोड़ने की नई पहल – केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग और मध्य प्रदेश सरकार के मत्स्य विभाग ने मिलकर भोपाल में मत्स्य निवेशक एवं निर्यातक कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन किया। इसमें राज्य के एक हजार से ज्यादा मछली पालक किसानों के साथ निवेशक, निर्यातक, सहकारी समितियां, मत्स्य उत्पादक संगठन, स्टार्टअप और वित्तीय-शोध संस्थान शामिल हुए।
कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मत्स्य पालन-पशुपालन व डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह, राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल और नारायण सिंह पवार मौजूद रहे। आयोजन का मकसद अंतर्देशीय मत्स्य पालन को सिर्फ उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय निवेश, प्रोसेसिंग, कोल्ड-चेन और निर्यात बाजार से जोड़ना बताया गया।
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इस मौके पर “मध्य प्रदेश मत्स्य निवेश एवं निर्यात गाइडलाइंस 2026” जारी की गई। यह गाइडलाइंस हैचरी, मत्स्य बीज-चारा उत्पादन, जलाशय व पिंजरा मत्स्य पालन, जलीय पशु स्वास्थ्य, प्रोसेसिंग और कोल्ड-चेन से जुड़े निवेश को रास्ता दिखाएगी। अंतर्देशीय राज्यों की निर्यात क्षमता बढ़ाने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं भी जारी की गईं।
कार्यक्रम में एकीकृत केज कल्चर यूनिट का वर्चुअल उद्घाटन हुआ। केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने मध्य प्रदेश में जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास की प्रशासनिक मंजूरी राज्य को सौंपी। केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश को रिजर्वॉयर फिशरीज क्लस्टर के रूप में अधिसूचित किया है, जिससे राज्य के लगभग 4.50 लाख हेक्टेयर जल क्षेत्र का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
कॉन्क्लेव में साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक भारत का कुल मत्स्य उत्पादन वर्ष 2024-25 में 197.75 लाख टन रहा, जिसमें से 151.60 लाख टन यानी करीब तीन-चौथाई हिस्सा अंतर्देशीय मत्स्य पालन से आया। वर्ष 2025-26 में देश का समुद्री खाद्य निर्यात 73,890 करोड़ रुपये का रहा।
आयोजकों ने बताया कि अभी तक अंतर्देशीय मत्स्य पालन का जोर मुख्य रूप से उत्पादन बढ़ाने पर रहा है, जबकि निर्यात और मूल्य-संवर्धन की संभावनाएं काफी हद तक अनछुई हैं। इसी वजह से कॉन्क्लेव में एंटरप्राइज डेवलपमेंट, वित्त तक पहुंच और बाजार संपर्क को प्राथमिकता दी गई।
देश में मछली उत्पादन से जुड़े उद्योग के लिए यह आयोजन इसलिए अहम है क्योंकि पहली बार किसी राज्य-स्तरीय मंच पर केंद्र सरकार के साथ मिलकर अंतर्देशीय मत्स्य पालन के लिए अलग से निवेश व निर्यात गाइडलाइंस जारी हुई हैं। इससे मध्य प्रदेश के साथ-साथ अन्य भीतरी राज्यों के मछली पालकों को भी संगठित बाजार और बेहतर दाम मिलने की उम्मीद बढ़ी है।