एग्रीवेट: 30 अक्टूबर 2026, लखनऊ: धान खरीद में योगी सरकार के चार साल में 37.49 लाख किसान लाभान्वित – उत्तर प्रदेश में धान खरीद के आंकड़ों के अनुसार, योगी सरकार के पिछले चार वर्षों के कार्यकाल में 37,49,219 किसान सरकारी खरीद व्यवस्था से लाभान्वित हुए, जबकि समाजवादी पार्टी सरकार के पांच साल के कार्यकाल में 14,87,519 किसानों को इसका लाभ मिला था। इस तरह उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, योगी सरकार के चार वर्षों में सपा सरकार के पांच वर्षों की तुलना में करीब 22.62 लाख अधिक किसानों को धान खरीद का लाभ मिला।
धान खरीद के इन आंकड़ों से प्रदेश में सरकारी खरीद व्यवस्था के दायरे में आए किसानों की संख्या में अंतर सामने आता है। योगी सरकार के चार वर्षों में लाभान्वित किसानों की संख्या सपा सरकार के पांच वर्षों के आंकड़े की तुलना में लगभग 2.52 गुना रही। धान उत्पादक किसानों के लिए सरकारी खरीद व्यवस्था महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके माध्यम से उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अपनी उपज बेचने का अवसर मिलता है।
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खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारियों के अनुसार, धान खरीद व्यवस्था का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। वर्ष 2025-26 में 10.53 लाख से अधिक किसानों को सरकारी खरीद का लाभ मिला। विभाग का जोर खरीद प्रक्रिया को अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनाने पर है, ताकि पात्र किसानों को अपनी उपज बेचने में सुविधा मिल सके।
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े कृषि प्रधान राज्य में धान खरीद किसानों को बाजार उपलब्ध कराने और उनकी उपज के लिए निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। सरकारी खरीद व्यवस्था के तहत किसानों को अपनी उपज बेचने का संस्थागत विकल्प मिलता है। इससे उन्हें बाजार में उपज बेचने के लिए उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने में सहायता मिलती है।
सरकारी खरीद व्यवस्था की पहुंच का आकलन करने में लाभान्वित किसानों की संख्या एक महत्वपूर्ण संकेतक है। हालांकि, किसानों की वास्तविक स्थिति का व्यापक आकलन करने के लिए खरीदे गए धान की कुल मात्रा, खरीद केंद्रों की उपलब्धता, भुगतान की समयबद्धता और किसानों की कुल संख्या जैसे अन्य पहलुओं को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। राज्य सरकार का कहना है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना और खरीद प्रक्रिया को सुगम बनाना प्राथमिकता है। इसके लिए पात्र किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने और खरीद व्यवस्था को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।