एग्रीवेट: आखिरकार किसान तक की मुहिम रंग लाई.किसान तक ने खतरनाक कीटनाशक पैराक्वेट डाइक्लोराइड (Paraquat Dichloride) के इस्तेमाल और उसके दुष्प्रभावों को लेकर खबर प्रकाशित की थी.अब मध्य प्रदेश सरकार ने इस खतरनाक केमिकल के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है. साथ ही, इसके निर्माण, बिक्री और भंडारण पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं. इंसानों और पशुओं के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक माने जाने वाले इस रसायन के बचे हुए स्टॉक को वापस मंगाकर नियमानुसार नष्ट करने के निर्देश भी राज्य के किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग ने संबंधित कंपनियों को दिए हैं.
राज्य शासन के निर्देशों के मुताबिक, पैराक्वेट डाइक्लोराइड का निर्माण करने वाली कंपनियों को इसकी बिक्री और भंडारण तत्काल बंद करने की कार्रवाई करनी होगी. जिन कंपनियों के पास इस कीटनाशक के पंजीकरण प्रमाणपत्र हैं, उन्हें संबंधित प्रमाणपत्र केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (CIBRC) को वापस करने के निर्देश दिए गए हैं.
इसके साथ ही कंपनियों के पास उपलब्ध बचे हुए स्टॉक को वापस मंगाकर निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के अनुसार नष्ट करना होगा. सरकार ने इस मामले में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.
जारी सरकारी जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने कीटनाशक अधिनियम, 1968 के तहत पैराक्वेट डाइक्लोराइड के नए पंजीकरण और पहले से जारी पंजीकरण प्रमाणपत्रों को रद्द कर इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई की है.दुनिया के करीब 70 देशों में भी इस रसायन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध होने की जानकारी दी गई है.
पैराक्वेट डाइक्लोराइड एक तेज असर करने वाला खरपतवारनाशक रसायन है. यह पौधों के हरे हिस्सों के संपर्क में आते ही उन्हें तेजी से नुकसान पहुंचाता है और पौधों को सुखा देता है. इसे ग्रामोक्सोन (Gramoxone) जैसे व्यापारिक नामों से भी जाना जाता है.इसका इस्तेमाल कुछ जगहों पर खेतों में खरपतवार को नियंत्रित करने के लिए किया जाता रहा है. हालांकि, इसकी अत्यधिक विषाक्तता के कारण इसका गलत इस्तेमाल गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है.
मूंग की फसल में कटाई से पहले पौधों और पत्तियों को सुखाने के लिए कुछ किसान पैराक्वेट डाइक्लोराइड का इस्तेमाल करते रहे हैं. इससे पौधे तेजी से सूख जाते हैं और फसल की कटाई एवं थ्रेसिंग आसान हो सकती है. इस तरीके से किसानों को समय और मजदूरी बचने की उम्मीद रहती है.
लेकिन फसल को जल्दी सुखाने के लिए इस तरह के रसायन का अनधिकृत इस्तेमाल स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है. सरकारी जानकारी के अनुसार, मूंग की फसल पर इसके इस्तेमाल की अनुमति नहीं थी.इसके बावजूद कुछ किसान इसका शॉर्टकट के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं.
पैराक्वेट डाइक्लोराइड अत्यधिक विषैला रसायन है. इसके शरीर में चले जाने पर फेफड़ों और किडनी को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। गंभीर विषाक्तता के मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है. इस विषाक्तता के लिए कोई विशिष्ट एंटीडोट उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसके संपर्क में आने की आशंका को भी गंभीरता से लेना जरूरी है.
किसानों को प्रतिबंधित रसायन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. खेतों में खरपतवार नियंत्रण और फसल प्रबंधन के लिए कृषि विशेषज्ञों की सलाह से अनुमोदित विकल्प अपनाने चाहिए.यदि किसी व्यक्ति के शरीर पर यह रसायन गिर जाए या इसके शरीर में जाने की आशंका हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। उल्टी कराने या घरेलू उपचार करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.
पैराक्वेट डाइक्लोराइड पर प्रतिबंध और कंपनियों के स्टॉक को नष्ट करने के निर्देशों के बाद अब इसके क्रियान्वयन और अवैध बिक्री पर रोक लगाना महत्वपूर्ण होगा.