एग्रीवेट: Wheat Production Target: खरीफ फसलों की कटाई का दौर शुरू होने के साथ ही अब रबी सीजन की तैयारियां भी तेज होने वाली हैं. केंद्र सरकार ने इस बार रबी सीजन में 17.772 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा गेहूं का है, जिसका उत्पादन 12.10 करोड़ टन रखने का लक्ष्य तय किया गया है. हालांकि, रबी की बुवाई से पहले मौसम किसानों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है. सितंबर में कई बड़े रबी उत्पादक राज्यों में सामान्य से कम बारिश हुई है. ऐसे में आने वाले दिनों में खेतों में नमी की स्थिति और तापमान यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि किसान कितनी आसानी से बुवाई कर पाते हैं और फसलों की शुरुआती बढ़वार कैसी रहती है. इसके अलावा, एल नीनो के मजबूत होने की आशंका ने भी मौसम को लेकर चिंता बढ़ाई है.
गेहूं समेत इन फसलों पर सरकार की नजर
सरकार ने रबी सीजन में कुल 177.72 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है. इसमें गेहूं के अलावा 17.20 मिलियन टन दालें और 22.30 मिलियन टन पोषक व मोटे अनाज शामिल हैं. रबी सीजन में होने वाले चावल का लक्ष्य 1.672 करोड़ टन और मक्का का 1.669 करोड़ टन तय किया गया है. ज्वार के लिए 31.9 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है.
2026-27 का उत्पादन लक्ष्य
2025-26 में उत्पादन
यूपी और एमपी में बारिश से राहत
रबी फसलों के लिए मौसम की तस्वीर हर राज्य में एक जैसी नहीं है. 18 सितंबर तक के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में सामान्य से 8 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है. उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक राज्य है, जबकि मध्य प्रदेश गेहूं उत्पादन में दूसरे स्थान पर है. मध्य प्रदेश चने के उत्पादन में भी प्रमुख राज्यों में शामिल है. ऐसे में इन दोनों राज्यों में सितंबर की बारिश खेतों में नमी बनाए रखने में मदद कर सकती है.
सितंबर की बारिश रबी के लिए क्यों जरूरी?
रबी फसलों की बुवाई आमतौर पर अक्टूबर से शुरू होती है. इससे पहले सितंबर में होने वाली बारिश खेतों में नमी बनाए रखने में मदद करती है. अच्छी नमी होने पर किसानों को बुवाई के समय सिंचाई पर कम निर्भर रहना पड़ सकता है और फसल की शुरुआती बढ़वार के लिए भी बेहतर माहौल मिलता है. इस साल सितंबर में देशभर में अब तक बारिश सामान्य से 21 फीसदी कम रही है. मौसम विभाग ने भी सितंबर में सामान्य से ज्यादा तापमान और सामान्य से कम मानसूनी बारिश का अनुमान जताया है. ऐसे में रबी की बुवाई के समय मौसम का रुख काफी अहम रहेगा.
भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD के मुताबिक, 19 सितंबर से पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनने लगी हैं. अब जैसे-जैसे मॉनसून पीछे हटेगा, किसानों का ध्यान रबी की बुवाई पर बढ़ेगा. गेहूं, चना, सरसों और मसूर जैसी फसलों के लिए मिट्टी में नमी, तापमान और आगे मिलने वाली बारिश महत्वपूर्ण रहेगी. इसलिए सरकार के बड़े उत्पादन लक्ष्य के साथ अब किसानों की नजर भी मौसम के अगले दौर पर टिकी है.