एग्रीवेट: अगर आप खेती-किसानी में आगे बढ़ना चाहें तो कोई भी मुश्किल आपको रोक नहीं सकती है. यह साबित कर दिखाया है मध्य प्रदेश के जबलपुर की दीपिका गोटिया ने. किसान इंडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि मुर्गी पालन के लिए छोटी शुरुआत की और इसके लिए उन्होंने कर्ज लिया. आज वह 500 से ज्यादा चूजों का पोल्ट्री फार्म चला रही हैं और रोजाना बड़ी मुर्गियों की बिक्री के साथ ही दाना भी बेच रही हैं. इसके लिए वह समूह से जुड़ीं और आजीविका मिशन योजना के तहत खुद ट्रेनिंग ली और अब दूसरों को भी गांव में रहकर पशुपालन करने की ट्रेनिंग दे रही हैं. वह पशु सखी भी हैं और समूह के कई अन्य कार्यों से भी जुड़ी हुई हैं. उन्हें देखकर अन्य महिलाएं भी प्रेरित हो रही हैं और उनसे सीख रही हैं.
मध्य प्रदेश के जबलपुर के विकासखंड कुंडम के ग्राम पड़रिया की दीपिका गोटिया अपने गांव और आसपास की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं. दीपिका गोटिया ने किसान इंडिया को बताया कि आजीविका मिशन के स्व-सहायता समूह से जुड़कर ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं और खुद भी मुर्गी फार्म चला रही हैं. उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह से ऋण लेकर मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू किया और धीरे-धीरे इसका विस्तार किया. शुरुआत में छोटी शुरूआत की थी जो अब 500 चूजों तक पहुंच गई है. मुर्गी पालन के साथ वे चूजों की सप्लाई और पशु आहार की दुकान भी संचालित कर रही हैं.
दीपिका गोटिया ने बताया कि वह ग्रेजुएट हैं और गांव में रहकर कुछ बिजनेस करना चाहती थीं. इसकी वजह से साल 2019 में सत्यसाईं स्वयं सहायता समूह से जुड़ी थीं. साल 2024 में उन्होंने मुर्गी पालन शुरू करने का बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया . इसके लिए समूह से डेढ़ लाख रुपए का ऋण लिया और करीब ढाई लाख रुपए की लागत से पोल्ट्री शेड तैयार किया. अनुभव और मेहनत के साथ व्यवसाय को आगे बढ़ाया और अब उनके पास 500 मुर्गियों व चूजों का पालन करने की व्यवस्था है.
दीपिका के पोल्ट्री फार्म में देशी और हाइब्रिड के साथ सोनाली नस्ल के मुर्गे-मुर्गियां और चूजे भी उपलब्ध हैं. वे बताती हैं कि सीजन में उनके यहां उत्पादित अंडे जबलपुर में बिक्री के लिए भेजे जाते हैं. इससे उन्हें घर बैठे अंडों की बिक्री के लिए बाजार मिल जाता है. उन्होंने बताया कि मुर्गी पालन के व्यवसाय को आगे बढ़ाते हुए दीपिका ने वर्ष 2025 में पशु आहार की दुकान भी शुरू की. यहां से मुर्गी पालकों को दाना, फीड और जरूरी दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं. इसके साथ ही मुर्गियों की देखभाल, दवाइयों के उपयोग और पालन-पोषण से जुड़ी जानकारी भी दी जाती है.
दीपिका फार्म पर देसी दाना तैयार करती हैं.
दीपिका ने बताया कि वह अपने पोल्ट्री फार्म से चूजों की सप्लाई भी करती हैं. वर्तमान में वे आसपास के करीब 40 से ज्यादा किसानों चूजे, दाना, फीड और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध करा रही हैं. उन्होंने बताया कि दो किलो के मुर्गे का दाम 1000 रुपये मिल जाता है. इसके साथ ही मुर्गियों के दाने की 50 किलो की बोरी भी किसानों को उपलब्ध कराती हैं. उन्होंने बताया कि वह अकेले मुर्गीपालन के जरिए 12 हजार रुपये हर महीने बचा लेती हैं. जबकि, पशु सखी के रूप में भी वह काम करती हैं और समूह के अन्य कार्य भी करती हैं. इस तरह से वह हर महीने लगभग 18 हजार रुपये तक की आमदनी हासिल कर लेती हैं.
उन्होंने बताया कि मुर्गी पालन को विस्तार देने के लिए वह क्लस्टर बनाने की कोशिश कर रही हैं. क्लस्टर से 400 से ज्यादा किसानों को जोड़कर पशुपालन को बढ़ावा दिया जाएगा. इसके साथ ही उनकी कमाई लगभग 30 हजार रुपये हर महीने पहुंच जाएगी.