बड़वानी : खेत तालाबों ने बदली किसानों की किस्मत – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 11 अक्टूबर 2026, बड़वानी: बड़वानी : खेत तालाबों ने बदली किसानों की किस्मत – मृदा और जल संरक्षण के क्षेत्र में मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के राजपुर क्षेत्र से एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। यहाँ वाटरशेड विकास परियोजना 05 के तहत किए गए एक अनूठे प्रयास ने किसानों के दिन-ब-दिन बदलते भाग्य की नई इबारत लिख दी है।

पन्नी युक्त  खेत तालाबों का निर्माण –  क्षेत्र के 12 प्रगतिशील किसानों के खेतों में प्लास्टिक पन्नी युक्त ( LDPE Lined ) खेत तालाबों का निर्माण किया गया है, जो आज रेगिस्तान में ओएसिस ( मरूद्यान ) की तरह इन किसानों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। इन तालाबों के पानी से जहाँ एक ओर फसल लहलहा रही है, वहीं दूसरी ओर किसान इसमें मछली पालन कर अपनी आय को दोगुना कर रहे हैं।

पानी के रिसाव की समस्या से मिली मुक्ति – पारंपरिक मिट्टी के तालाबों में सबसे बड़ी समस्या पानी के रिसकर जमीन के नीचे चले जाने (सीपेज) के कारण होती थी, जिससे कुछ ही दिनों में तालाब सूख जाते थे। वाटरशेड परियोजना ( PMKSY-WS ) 05 के अंतर्गत बनाए गए इन नए खेतों तालाबों में विशेष प्लास्टिक की पन्नी की लेयरिंग की गई है। इसके चलते वर्षा का एक-एक बूंद पानी सुरक्षित रहता है और ये तालाब लबालब भरे होने के कारण खरीफ में प्रोटेक्टिव सिंचाई करने के साथ-साथ रबी फसल की बुवाई की तैयारी इन तालाबों से की जा रही है ।

एक पंथ दो काज, सिंचाई के साथ मत्स्य पालन –  इन तालाबों की सबसे बड़ी खासियत इसका बहुउद्देशीय उपयोग है। किसान इनका उपयोग केवल वर्षा जल संचयन के लिए ही नहीं, बल्कि इंटीग्रेटेड फार्मिंग (एकीकृत कृषि) के रूप में कर रहे हैं । फसलों को संजीवनी – समय पर सिंचाई न मिलने के कारण जो खेत रबी या गर्मियों में खाली रह जाते थे, उनमें अब किसान आसानी से सब्जियां और दलहन फसलें उगा रहे हैं।

मछली पालन से अतिरिक्त मुनाफा – तालाबों में पानी की निरंतर उपलब्धता को देखते हुए किसानों ने इसमें मछली के बीज डाले हैं। आज ये तालाब मिनी फिश फार्म में बदल चुके हैं, जिससे किसानों को फसलों के अलावा मछली बिक्री से हाथों-हाथ अतिरिक्त नकद आमदनी होगी।

किसानों के जीवन में आ रहा आर्थिक बदलाव – स्थानीय किसानों का कहना है कि पहले वे मानसून की अनिश्चितता पर पूरी तरह निर्भर रहते थे। लेकिन वाटरशेड परियोजना की तकनीकी सहायता से खेत तालाब मिलने के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। सूखे और जल संकट के दौर में भी अब उनकी फसलें सुरक्षित रहती हैं और मछली पालन से पारिवारिक आय में मजबूत बढ़ोत्तरी दर्ज की जा रही है। राजपुर के इन 12 किसानों की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सही समय पर सही दिशा में जल प्रबंधन किया जाए, तो खेती को घाटे का सौदा नहीं बल्कि एक लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है। यह मॉडल अब आसपास के अन्य गांवों के किसानों के लिए भी प्रेरणा का मुख्य केंद्र बन गया है।

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