एग्रीवेट: 10 अक्टूबर 2026, विदिशा: विदिशा में दो दिवसीय उद्यानिकी प्रशिक्षण संपन्न – किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग एवं उद्यानिकी विभाग, जिला विदिशा के संयुक्त तत्वावधान में विकासखंड विदिशा स्थित पीएनबी ट्रेनिंग सेंटर में आयोजित दो दिवसीय उद्यानिकी प्रशिक्षण कार्यक्रम का गत दिनों समापन हुआ। प्रशिक्षण का उद्देश्य जिले के किसानों को उद्यानिकी फसलों की आधुनिक एवं वैज्ञानिक उत्पादन तकनीकों से जोड़ना तथा कम लागत में गुणवत्तापूर्ण एवं अधिक उत्पादन के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि के लिए तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करना रहा। इस दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम ने वैज्ञानिक ज्ञान को खेत तक और खेत की समस्याओं को वैज्ञानिकों तक पहुंचाने का प्रभावी मंच उपलब्ध कराया, जिससे विदिशा जिले के किसानों को आधुनिक उद्यानिकी उत्पादन की दिशा में नई संभावनाओं से परिचित होने का अवसर किसानों को सुगमता से मिला है।
प्रशिक्षण में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हॉर्टिकल्चर रिसर्च(आईआईएचआर), बेंगलुरु एवं इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ वेजिटेबल रिसर्च के विशेषज्ञ वैज्ञानिकों ने किसानों के साथ सीधे संवाद करते हुए सब्जी, फल एवं पुष्प फसलों के उत्पादन, पौध प्रबंधन, पोषण, सिंचाई तथा फसल संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। प्रशिक्षण में विदिशा, गंजबासौदा, कुरवाई, नटेरन एवं ग्यारसपुर विकासखंडों से आए कृषकों ने सहभागिता की। विशेषज्ञ वैज्ञानिक डॉ. वी. श्रीधर, डॉ. संदीप कुमार, डॉ. एस. मौर्य एवं डॉ. जयदीप हलदर ने किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप आधुनिक उद्यानिकी तकनीकों को अपनाने के लिए विस्तार पूर्वक मार्गदर्शन दिया। गुणवत्तापूर्ण बीज और पौध तैयार करने की तकनीकों पर जोर प्रशिक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को उन्नत एवं अधिक उत्पादन देने वाली सब्जी किस्मों के चयन, गुणवत्तापूर्ण बीज के उपयोग तथा स्वस्थ पौध तैयार करने की वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी। किसानों को बताया गया कि फसल उत्पादन की सफलता में गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। स्वस्थ एवं मजबूत पौधे से फसल की वृद्धि बेहतर होने के साथ-साथ उत्पादन एवं गुणवत्ता में भी सुधार होता है।
वैज्ञानिकों ने कम पानी में बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के लिए उचित सिंचाई प्रबंधन, फसल की आवश्यकता के अनुसार पोषण प्रबंधन तथा विभिन्न अवस्थाओं में पौधों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने की तकनीकों को भी समझाया। टमाटर, बैंगन, मिर्च सहित प्रमुख सब्जी फसलों में बुवाई से लेकर तुड़ाई तक आने वाली विभिन्न समस्याओं, पौधों की वृद्धि से संबंधित कठिनाइयों तथा उनके वैज्ञानिक समाधान के बारे में किसानों को जानकारी दी गई। इसके साथ ही फूलों की खेती में पौध प्रबंधन, उत्पादन बढ़ाने तथा गुणवत्तापूर्ण फूल प्राप्त करने की उन्नत तकनीकों पर भी प्रशिक्षण दिया गया। खेतों पर पहुंचकर वैज्ञानिकों ने जानी किसानों की वास्तविक समस्याएं प्रशिक्षण की विशेषता यह रही कि विशेषज्ञ वैज्ञानिकों ने केवल कक्षा प्रशिक्षण तक सीमित न रहते हुए किसानों के खेतों तक पहुंचकर फसलों की वास्तविक स्थिति का अवलोकन किया।
वैज्ञानिकों ने ग्राम सुनपुरा, ग्राम गोबरहेला एवं हंसुआ में किसानों के खेतों का भ्रमण किया। खेत भ्रमण के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों से सीधे संवाद किया तथा खेत की परिस्थितियों, फसल की अवस्था और स्थानीय समस्याओं को मौके पर देखकर समझा। किसानों ने फसल उत्पादन, कीट एवं रोग प्रबंधन, पौधों की वृद्धि सहित अन्य समस्याओं से संबंधित प्रश्न विशेषज्ञों के समक्ष रखे। वैज्ञानिकों ने प्रत्येक खेत की परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक तकनीकी सलाह प्रदान की। इस फील्ड विजिट से किसानों को अपनी फसलों से जुड़ी वास्तविक समस्याओं का समाधान मौके पर ही विशेषज्ञ वैज्ञानिकों से प्राप्त करने का अवसर मिला। साथ ही किसानों ने वैज्ञानिक पद्धतियों को खेत की परिस्थितियों में व्यावहारिक रूप से समझा।
एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन से कम होगा अनावश्यक कीटनाशक उपयोग – प्रशिक्षण में एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन (IPM) को विशेष महत्व दिया गया। वैज्ञानिकों ने किसानों को प्रमुख कीटों की पहचान, उनके जीवन-चक्र, प्रकोप के लक्षण तथा विभिन्न रोगों के प्रारंभिक लक्षणों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। किसानों को समझाया गया कि फसल में कीट एवं रोग की समय पर पहचान होने पर प्रारंभिक अवस्था में ही प्रभावी प्रबंधन किया जा सकता है। इससे अनावश्यक कीटनाशकों के प्रयोग को कम करने के साथ उत्पादन लागत को नियंत्रित करने और गुणवत्तापूर्ण उपज प्राप्त करने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों ने लाइट ट्रैप, फेरोमोन ट्रैप, येलो स्टिकी ट्रैप एवं ट्रैप क्रॉप जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग और महत्व को भी समझाया। इन तकनीकों के माध्यम से खेत में कीटों की उपस्थिति एवं संख्या की निगरानी कर कीट प्रकोप की प्रारंभिक अवस्था में ही प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है। फल एवं पुष्प उत्पादन में आधुनिक तकनीकों की जानकारी प्रशिक्षण के दौरान फल एवं पुष्प फसलों के पौध प्रबंधन, पोषण प्रबंधन, सिंचाई, फसल संरक्षण तथा गुणवत्तापूर्ण उत्पादन से जुड़ी तकनीकी जानकारी भी किसानों के साथ साझा की गई।
किसानों को बताया गया कि उचित पौध प्रबंधन एवं संतुलित पोषण के साथ वैज्ञानिक सिंचाई पद्धति अपनाकर फसल की गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार किया जा सकता है। प्रशिक्षण के अंतिम दिन विशेषज्ञ वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को आम के पौधे, रजनीगंधा एवं गेंदा (मैरीगोल्ड) सहित विभिन्न फल एवं पुष्प फसलों की रोपण सामग्री एवं बीज भी उपलब्ध कराए गए। साथ ही इनकी रोपाई, पौध प्रबंधन एवं उन्नत उत्पादन तकनीकों के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
वैज्ञानिकों से सीधे संवाद ने बढ़ाया किसानों का आत्मविश्वास – दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने विशेष रुचि के साथ सहभागिता की। वैज्ञानिकों एवं कृषकों के बीच हुए सीधे संवाद में किसानों ने अपनी फसलों से जुड़ी समस्याओं को खुलकर साझा किया तथा उनके समाधान के लिए विशेषज्ञ सुझाव प्राप्त किए। प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को यह समझने का अवसर मिला कि वैज्ञानिक तकनीकों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाकर उद्यानिकी फसलों की उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है। खेत भ्रमण के दौरान मिली व्यावहारिक जानकारी ने प्रशिक्षण को और अधिक उपयोगी एवं प्रभावी बनाया।
उद्यानिकी को लाभकारी एवं टिकाऊ खेती का माध्यमबनाने की दिशा में पहल -किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग एवं उद्यानिकी विभाग, जिला विदिशा द्वारा आयोजित यह प्रशिक्षण जिले में उद्यानिकी क्षेत्र को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। सब्जी, फल एवं पुष्प उत्पादन में आधुनिक तकनीकों का उपयोग किसानों को पारंपरिक खेती के साथ विविधीकरण एवं अधिक लाभकारी कृषि की ओर बढ़ने का अवसर प्रदान करता है। प्रशिक्षण एवं खेत भ्रमण के माध्यम से किसानों को गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन, संतुलित पोषण, प्रभावी सिंचाई, एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन तथा आधुनिक उत्पादन तकनीकों की जानकारी मिली। इससे किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने, उत्पादन एवं गुणवत्ता बढ़ाने तथा कृषि से आय में वृद्धि की दिशा में उपयोगी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।