Rice Crop Disease: धान की बाली निकलते ही करें ये काम, सफेद कपड़े से पकड़ें फाल्स स्मट – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: धान की फसल में बाली निकलने के समय फाल्स स्मट यानी हल्दी रोग का खतरा बढ़ जाता है. यह रोग धान की उपज और दाने की गुणवत्ता दोनों को प्रभावित कर सकता है. किसानों के लिए राहत की बात यह है कि इसके शुरुआती संकेतों की पहचान के लिए किसी महंगे उपकरण या लैब जांच की जरूरत नहीं पड़ती. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, किसान सुबह ओस के समय सफेद कपड़े पहनकर खेत में जाकर फसल की शुरुआती स्थिति की जांच कर सकते हैं.

सुबह के समय जब धान की फसल  पर ओस की बूंदें जमी होती हैं, तब किसान सफेद कपड़ा या सफेद पैजामा पहनकर खेत में पौधों के बीच से गुजर सकते हैं. इस दौरान यदि रोग से जुड़े पीले रंग के बीजाणु कपड़ों पर चिपकते हैं तो वे सफेद कपड़े पर आसानी से दिखाई दे सकते हैं. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, कपड़ों पर पीले रंग का पाउडर जैसा पदार्थ दिखाई देना किसानों के लिए सतर्क होने का संकेत है. ऐसी स्थिति में पूरे खेत की बारीकी से जांच करनी चाहिए. यह तरीका शुरुआती निगरानी के लिए उपयोगी हो सकता है और किसान बिना किसी अतिरिक्त खर्च के संभावित संक्रमण का पता लगा सकते हैं.

धान में फाल्स स्मट  का प्रकोप खासतौर पर बाली निकलने के आसपास बढ़ सकता है. इस रोग में सामान्य धान के दानों की जगह पीले या नारंगी रंग के गोलाकार समूह बनने लगते हैं. बाद में इनका रंग गहरा होकर काला भी पड़ सकता है. इससे प्रभावित दानों की गुणवत्ता खराब हो जाती है और बाजार में फसल की कीमत पर भी असर पड़ सकता है. किसानों को बाली निकलने की अवस्था में खेत की नियमित निगरानी करनी चाहिए. पौधों पर असामान्य रंग के गोले या अन्य लक्षण दिखाई देने पर उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय पर पहचान होने से रोग के फैलाव को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाने में मदद मिल सकती है.

अगर खेत में फाल्स स्मट के शुरुआती संकेत दिखाई देते हैं तो किसान को बिना सलाह के बाजार से कोई भी रसायन खरीदकर छिड़काव  नहीं करना चाहिए. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, रोग की पुष्टि के बाद प्रमाणित कृषि विशेषज्ञ या स्थानीय कृषि केंद्र की सलाह से ही उचित फंगीसाइड का इस्तेमाल करना चाहिए. रासायनिक नियंत्रण की सलाह मिलने पर दवा की मात्रा और छिड़काव का सही समय भी महत्वपूर्ण होता है. खेत में छिड़काव इस तरह किया जाना चाहिए कि दवा पौधों तक समान रूप से पहुंचे. मौसम और हवा की स्थिति को ध्यान में रखकर छिड़काव करने से उपचार बेहतर तरीके से किया जा सकता है.

फाल्स स्मट से बचाव के लिए केवल दवा पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है. किसानों को फसल प्रबंधन  पर भी ध्यान देना चाहिए. धान में जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन का इस्तेमाल करने से बचने की सलाह दी जाती है. खाद और पानी का संतुलित इस्तेमाल फसल के स्वस्थ विकास के लिए जरूरी है. इसके साथ ही खेत में अनावश्यक जलभराव न होने दें और खेत की साफ-सफाई बनाए रखें. फसल चक्र अपनाने से भी रोग के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है. बाली निकलने के समय नियमित निगरानी और सफेद कपड़े से शुरुआती संकेतों की जांच कर किसान समय रहते विशेषज्ञ से सलाह लेकर फसल को संभावित नुकसान से बचाने की कोशिश कर सकते हैं.

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