धान कटाई के बाद खाली खेतों में दलहन की खेती बढ़ाएंगे किसान, कृषि मंत्री शिवराज सिंह देंगे उन्नत बीज – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: धान कटाई के बाद खाली खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ाने और रबी सीजन में दलहन फसलों की खेती बढ़ाने पर केंद्र सरकार जोर दे रही है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह रांची में रबी गोष्ठी में किसानों से मुलाकात करेंगे. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल बायोटेक्नोलॉजी (IIAB) की उन्नत नस्लों को देखें और रबी सीजन की फसलों के उन्नत बीज और किस्मों को किसानों को सौंपेंगे.

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान 8 अक्टूबर को रांची के एक दिवसीय दौरे पर रहेंगे. इस दौरान वे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल बायोटेक्नोलॉजी परिसर में पौधरोपण करेंगे और संस्थान की नई सुविधाओं का उद्घाटन करेंगे. संस्थान में पूर्व-रबी किसान गोष्ठी और इनपुट वितरण कार्यक्रम भी रखा गया है, जिसमें 1,400 से अधिक किसानों को आमंत्रित किया गया है.

रबी किसान गोष्ठी में किसानों को रबी सीजन की बेहतर तैयारी पर जानकारी दी जाएगी. खास तौर पर मिट्टी में उपलब्ध नमी, पानी की उपलब्धता और स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से फसल और उन्नत बीज चुनने पर जोर रहेगा. किसानों को गेहूं, दलहन, तिलहन समेत रबी फसलों की वैज्ञानिक खेती, संतुलित खाद के इस्तेमाल और मिट्टी की सेहत बनाए रखने के बारे में भी जानकारी दी जाएगी. केंद्र ने रबी अभियान में पूर्वी भारत के धान कटने के बाद खाली खेतों में दलहन की खेती बढ़ाने पर भी जोर दिया है.

फसल सुरक्षा भी गोष्ठी का अहम विषय रहेगा. रबी फसलों में कीट और रोगों से बचाव, समय पर निगरानी, सही कृषि इनपुट के इस्तेमाल और मौसम के बदलते मिजाज के अनुसार खेती की रणनीति पर चर्चा होगी. इसके साथ किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC से जोड़ने, फसल बीमा और सरकारी कृषि योजनाओं का लाभ दिलाने पर भी जोर देने के साथ ही किसानों के फार्मर रजिस्ट्री कार्य 100 फीसदी पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं.

किसानों के लिए एक बड़ा मुद्दा बना उन्नत और मौसम सहनशील फसल किस्मों पर केंद्रीय मंत्री बात करेंगे. रांची स्थित IIAB में नई फसल प्रजनन सुविधा विकसित की जा रही है, जिससे नई किस्में तैयार करने में लगने वाला समय करीब 8-12 साल से घटकर 5-6 साल तक आने की उम्मीद है. इन तकनीकों से सूखे और अधिक बारिश जैसी परिस्थितियों को सहने वाली फसल किस्में विकसित करने पर काम किया गया है.

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