एग्रीवेट: उत्तर प्रदेश के किसान अब कम समय में तैयार होने वाली गन्ने की नई किस्मों की खेती कर सकेंगे. क्योंकि हाल ही में सरकार ने गन्ने की चार जिन नई किस्मों को खेती के लिए मंजूरी दी है, ये किस्में जल्दी तैयार होने के साथ बेहतर पैदावार और चीनी रिकवरी देती हैं. वहीं, कम लोकप्रिय छह पुरानी किस्मों को अगले दो साल में खेती से बाहर किया जाएगा. सरकार को उम्मीद है कि इस किस्मों की खेती करने से किसानों की कमाई में भी बढ़ोतरी होगी.
उत्तर प्रदेश की गन्ना आयुक्त और राज्य चीनी निगम की प्रबंध निदेशक मिनिष्टी एस. का कहना है कि नई किस्मों की पैदावार और चीनी रिकवरी से जुड़े आंकड़ों की समीक्षा की गई है. आंकड़ों के मुताबिक, जल्दी पकने वाली गन्ने की नई किस्म CoS.23232 की औसत पैदावार 95.56 टन प्रति हेक्टेयर रही है. यह मानक किस्म Co.0238 की तुलना में 9.44 फीसदी अधिक है. यह किस्म रेड रॉट रोग के प्रति प्रतिरोधी है. साथ ही, इसकी रैटून फसल यानी पहली कटाई के बाद दोबारा तैयार होने वाली फसल का प्रदर्शन भी अच्छा पाया गया है.
अधिकारियों के मुताबिक, पैदावार और चीनी की रिकवरी, दोनों मामलों में CoS.23232 लोकप्रिय किस्म Co.0238 से बेहतर पाई गई है. इसलिए इसे किसानों के लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है. इससे गन्ने के साथ-साथ चीनी का उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है. अतिरिक्त गन्ना आयुक्त और यूपीसीएसआर के निदेशक अभिषेक आनंद ने बताया कि समिति ने लखनऊ स्थित भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (IISR) की ओर से विकसित एक जल्दी पकने वाली नई गन्ना किस्म को जारी करने पर भी विचार किया.
उन्होंने बताया कि किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए समिति ने गन्ने की छह पुरानी किस्मों को अनुपयुक्त घोषित करने का फैसला किया है. इन किस्मों की किसानों के बीच लोकप्रियता काफी कम है और इनकी खेती भी बहुत कम क्षेत्र में हो रही है. सरकार अब इन छह किस्मों को अगले दो साल में चरणबद्ध तरीके से खेती से बाहर करेगी. इनकी जगह बेहतर पैदावार और चीनी रिकवरी वाली नई किस्मों को बढ़ावा दिया जाएगा. यूपीसीएसआर के निदेशक ने कहा कि ज्यादा पैदावार और बेहतर चीनी रिकवरी वाली नई गन्ना किस्मों को मंजूरी मिलने से किसानों के पास खेती के लिए कई बेहतर विकल्प उपलब्ध होंगे. इससे गन्ने की पैदावार बढ़ाने में मदद मिलेगी और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.