एग्रीवेट: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलौत ने कहा कि राज्य में सूखे का संकट गहराता जा रहा है. बारिश की कमी के चलते पशुओं के लिए पानी और हरे चारे की भयंकर दिक्कत का सामना किसान कर रहे हैं. फसलों को सूखे के चलते नुकसान हुआ है और खर्च की लागत भी बढ़ी है. उन्होंने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने किसानों का 14 हजार करोड़ कर्ज माफ किया था. अब भाजपा सरकार सूखे से परेशान किसानों का कर्ज माफ करे. उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव से सूखे से निपटने के लिए तत्काल आकस्मिक योजना लागू करने की मांग की है.
मध्य प्रदेश से मॉनसून की विदाई हो चुकी है और अब तक सामान्य से 4 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. कम बारिश की वजह से राज्य के पश्चिमी हिस्सों में सूखे की स्थिति ज्यादा गंभीर होती दिख रही है. ऐसे में किसानों को फसलों के सूखने और पशुओं के लिए पानी और हरे चारे का संकट झेलना पड़ रहा है. जबकि, आगामी रबी सीजन की बुवाई के लिए मिट्टी में नमी खत्म होने की चिंता भी सता रही है. हालांकि, राज्य सरकार की ओर से कृषि और राजस्व विभाग स्थितियों से निपटने के लिए निगरानी कर रहे हैं.
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार से प्रदेश के कुछ हिस्सों में सूखे जैसे हालात से निपटने के लिए तत्काल आकस्मिक योजना तैयार करने की रविवार को मांग की है. जयपुर में संवाददाताओं से बातचीत में गहलोत ने कहा कि आने वाले महीनों में पेयजल, चारे की समस्या विकराल हो सकती है. उन्होंने कहा कि सरकार को स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अभी से तैयारियां शुरू कर देनी चाहिए. लोगों और पशुओं के लिए चारे और पेयजल की व्यवस्था करनी होगी. अभी से आकस्मिक योजना तैयार की जानी चाहिए.
अशोक गहलोत ने कहा कि राजस्थान पहले भी सूखे का सामना कर चुका है, लेकिन पिछले वर्षों में ट्यूबवेल, हैंडपंप और रोजगार गारंटी कार्यक्रम के कारण इसका असर कम हुआ है. उन्होंने दावा किया कि रोजगार गारंटी व्यवस्था में बदलाव के बाद लोगों को मांग के आधार पर काम मिलने का भरोसा पहले जैसा नहीं रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार को प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त राहत कार्य सुनिश्चित करने होंगे.
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की बाड़मेर में की गई घोषणा का जिक्र करते हुए गहलोत ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि तीन दिन बाद भी संबंधित आदेश जिला कलेक्टर तक नहीं पहुंचा है. उन्होंने कहा कि यह केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए. यदि सरकार स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटना चाहती है तो इन मुद्दों को गंभीरता से लेना होगा.
राजस्थान में बनी सूखे की स्थिति पर प्रतिक्रिया (04.10.2026, जयपुर):
सूखे की स्थिति जो बनी है राजस्थान में, मैं फिर कहना चाहूंगा सरकार को बहुत ही गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि लोगों को रोजगार नहीं मिलेगा, नरेगा बंद हो चुका है, उसका खामियाजा भुगतेगा ये देश, जहां- जहां अकाल पड़े हैं,पहले गारंटी थी रोजगार की अब गारंटी नहीं है तो डिपेंड करता है राज्य सरकारों पर। उनकी मर्जी पर है काम खोलें या नहीं खोलें। पहले गारंटी थी कानून के अंतर्गत कोई काम देना पड़ता मांगने पर, नहीं देते तो घर बैठे हुए उनको मुआवजा मिलता था। वो स्थिति अब नहीं रही है।
चारे का प्रबंधन करना है आने वाले वक्त के अंदर, पीने के पानी का प्रबंधन करना है पशुओं के लिए भी, मनुष्यों के लिए भी। ये अकाल तो राजस्थान में पड़ते ही रहे हैं पर पिछले 10 साल से या लंबे अरसे से जब से ट्यूबवेल खुदने लग गए हैं, हैंडपंप भी आ गए शहरों के अंदर, नरेगा आ गया, उसके कारण वो मार पड़नी बंद हो गई। तो लोग अकाल की विभीषिका को भूल गए थे। अब जो स्थिति बनी है इस बार, इसको सरकार को मैं आग्रह करना चाहूंगा अभी से कंटिंजेंसी प्लान बने। खाली कह दिया बाड़मेर में मुख्यमंत्री जी ने कि यहां पर एक करोड़ या कुछ दिए हैं कि दिसंबर तक बढ़ा देंगे। कह तो दिया, तीन दिन हो गए, उसके ऑर्डर पहुंचे ही नहीं जिला कलेक्टर के पास। तो जो आदेश दिया मुख्यमंत्री जी ने खाली कागजों में रह गया। तो कहने का मतलब कि ये तमाम बातें जो हैं, उनको गंभीरता से लेनी चाहिए और तब जा करके ये उसका मुकाबला कर पाएंगे मेरा मानना है।
पत्रकार : तो सरकार को कुछ सुझाव भी देंगे क्योंकि आपके वक्त में भी ऐसी स्थिति हुई थी जिससे काफी अच्छी तरह से निपटा था?
जवाब: सुझाव यही है कि एक तो किसानों का कर्जा माफ करें। हमने किया था 14 हजार करोड़, माफ किए थे हमने। अभी मैं महाराष्ट्र में था कल महाराष्ट्र सरकार में मांग उठी है, कांग्रेस नेताओं ने उठाई है, शरद पवार जी ने उठाई है, उन्होंने दौरे शुरू कर दिए शरद पवार जी ने। महाराष्ट्र के अंदर अकाल सूखे की स्थिति में उनके दौरे शुरू हो गए। हमारे कांग्रेस वाले भी दौरे शुरू कर रहे हैं। राजस्थान में भी कांग्रेस के ब्लॉक वाले, जिला वाले और स्टेट वाले, सब लोग निकलेंगे, अकाल राहत के कामों को देखने के लिए। खुले तब तो देखें, अभी तो मांग करी है कि खोलो काम, चारे का प्रबंधन करो, पीने के पानी का प्रबंधन करो।
बाद में हम जब जाएंगे तब देखेंगे वास्तव में इमदाद मिल रही कि नहीं मिल रही है गरीबों को, टाइम पर पेमेंट हो रहा कि नहीं हो रहा है, पशुओं के लिए चारे का प्रबंधन है कि नहीं है। पीने के पानी की स्थिति क्या है। तो कांग्रेस कमेटियां अनुभव रखती हैं पहले भी। सोनिया गांधी जी के वक्त में भी इस देश के अंदर जब कभी अकाल पड़े हैं तो जिला कांग्रेस कमेटियों को कनवर्ट कर दिया गया है अकाल राहत समिति के अंदर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी को प्रदेश कांग्रेस अकाल राहत समिति में कनवर्ट कर दिया गया। इतना गंभीरता से हमारी पार्टी सोनिया गांधी जी के वक्त से ही लगातार ऐसे फैसले करती आई है। अभी भी प्रदेश कांग्रेस कमेटी कोई कमी नहीं रखेगी, हम सब मिलकर के दौरे करेंगे और लोगों को राहत दिलाएंगे किस प्रकार अकाल के वक्त में सरकार अधिक से अधिक काम खोले, पूरा दबाव बनाए रखेंगे उसके ऊपर।
सरकार को सुझाव देने के सवाल पर गहलोत ने कहा कि किसानों का कर्ज माफ किया जाना चाहिए. उन्होंने याद दिलाया कि पिछली कांग्रेस सरकार ने करीब 14,000 करोड़ रुपये के कृषि ऋण माफ किए थे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर के नेता प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे और यह जायजा लेंगे कि राहत कार्य शुरू हुए हैं या नहीं, भुगतान समय पर हो रहा है या नहीं तथा चारे और पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था है या नहीं.