एग्रीवेट: 02 अक्टूबर 2026, गुवाहाटी (असम): असम में साली धान पर तना छेदक, पत्ती लपेटक और शीथ ब्लाइट का प्रकोप, जानें बचाव का तरीका – असम के करीमगंज, कछार, श्रीभूमि और हैलाकांडी जिलों में साली धान (खरीफ धान) की फसल पर तना छेदक, पत्ती लपेटक और शीथ ब्लाइट का खतरा बढ़ गया है। धान की फसल अभी कल्ले निकलने की अवस्था में है, जो इन कीट-रोगों के लिए सबसे संवेदनशील मानी जाती है।
यह सलाह भारतीय मौसम विभाग (IMD) के गुवाहाटी स्थित एग्रोमेट फील्ड यूनिट की ओर से जारी कृषि-मौसम बुलेटिन संख्या 77/2026 में दी गई है, जो 25 सितंबर 2026 को जारी हुआ। बुलेटिन के मुताबिक मौजूदा मौसम- 28 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान, 80 प्रतिशत से ज्यादा नमी और बादल छाए रहना- इन कीटों के फैलने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना रहा है।
दक्षिण असम के इन जिलों में साली धान स्थानीय किसानों की मुख्य खरीफ फसल है, इसलिए कल्ले निकलने की अवस्था में ही कीट-रोग नियंत्रण पर ध्यान देना उत्पादन बचाने के लिए जरूरी हो जाता है।
तना छेदक के हमले से पौधे का बीचला हिस्सा सूखने लगता है, जिसे किसान “डेड हार्ट” कहते हैं, और बाद में बालियां सफेद होकर सूख जाती हैं, जिसे “व्हाइट ईयर हेड” कहा जाता है। पत्ती लपेटक कीट पत्तियों को नली जैसा मोड़ देता है, जिस पर सफेद धारियां दिखने लगती हैं और पत्तियों की हरियाली कम हो जाती है।
बुलेटिन के अनुसार इन दोनों कीटों के नियंत्रण के लिए फ्लूबेंडिअमाइड की 2.4 ग्राम मात्रा प्रति बीघा पानी में मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। किसानों को खेत में नियमित रूप से भ्रमण करके पौधों की बीच वाली पत्तियों और बालियों की जांच करनी चाहिए, ताकि लक्षण जल्दी पकड़ में आ सकें।
शीथ ब्लाइट रोग में पत्ती के आवरण (शीथ) पर अंडाकार, भूरे-हरे रंग के धब्बे बनने लगते हैं, जो बाद में फैलकर पूरे पौधे को कमजोर कर देते हैं और बालियों के भराव पर भी असर डालते हैं। बुलेटिन में इसके नियंत्रण के लिए प्रोपिकोनाज़ोल 25 EC की 1 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
बुलेटिन में साफ कहा गया है कि लक्षण दिखने पर ही अनुशंसित मात्रा के अनुसार छिड़काव करें, यानी बिना जरूरत के दवा का इस्तेमाल न करें। घनी बुवाई और खेत में जरूरत से ज्यादा पानी भरा रहना भी शीथ ब्लाइट के फैलने की एक बड़ी वजह मानी जाती है, इसलिए खेत में पानी के सही प्रबंधन पर भी ध्यान देना चाहिए।
दक्षिण असम के इलाकों में बादल छाए रहने और लगातार नमी की स्थिति आगे भी कुछ दिन बनी रहने की संभावना है, जिससे इन कीट-रोगों के और फैलने का खतरा बना हुआ है। बुलेटिन में किसानों को सलाह दी गई है कि वे छिड़काव से पहले मौसम की स्थिति भी देख लें, क्योंकि बारिश होने पर छिड़काव का असर कम हो सकता है और दवा बह जाने की आशंका रहती है।
जिन खेतों में पहले भी तना छेदक या शीथ ब्लाइट की समस्या रही है, वहां किसानों को शुरुआती लक्षण दिखते ही कार्रवाई करने की सलाह दी गई है, ताकि कीट-रोग पूरे खेत में न फैल पाए। खेत की मेड़ों और आसपास की घास-फूस की सफाई रखने की सलाह भी दी गई है, क्योंकि इनमें भी कीट छिपकर अंडे दे सकते हैं और मौका मिलने पर फिर से फसल पर हमला कर सकते हैं।