अमेरिका की नौकरी छोड़ी, अब रायबरेली में सालाना 500-600 टन मछली उत्पादन कर रहे हैं सुजीत, वजह जानकर हो जाएंगे हैरान – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 02 अक्टूबर 2026, रायबरेली: अमेरिका की नौकरी छोड़ी, अब रायबरेली में सालाना 500-600 टन मछली उत्पादन कर रहे हैं सुजीत – बस्ती जिले के रहने वाले सुजीत कुमार चौधरी ने एक दशक पहले अमेरिका की सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ी थी। आज वे रायबरेली के महराजगंज तहसील स्थित बल्ला गांव में मछली पालन से सालाना 500 से 600 टन उत्पादन कर रहे हैं।

सुजीत ने 2005 में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और 2007 में अमेरिका की एक कंपनी में नौकरी शुरू कर दी। नौ साल विदेश में काम करने के बाद 2016 में वे भारत लौटे और पहले नोएडा में सॉफ्टवेयर का अपना कारोबार शुरू किया।

कुछ साल कारोबार चलाने के बाद सुजीत को महसूस हुआ कि वे अपनी जड़ों, यानी खेती-किसानी से जुड़े किसी काम में कुछ नया करना चाहते हैं। इसी सोच ने उन्हें वापस उत्तर प्रदेश के गांवों की तरफ खींचा।

2019 में सुजीत ने रायबरेली में 10 हेक्टेयर जमीन लीज पर ली और वहां 23 आधुनिक तालाब बनवाए। यहीं से उनकी मछली पालन की यात्रा शुरू हुई, जो अब क्षेत्र के दूसरे किसानों के लिए भी मिसाल बन गई है।

शुरुआत में सुजीत को तालाबों के निर्माण, पानी की गुणवत्ता बनाए रखने और मछली प्रजातियों के चुनाव में दिक्कतें आईं। एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के लिए मिट्टी और पानी की दुनिया बिलकुल नई थी, लेकिन उन्होंने इसे व्यवस्थित कारोबार की तरह सीखा।

धीरे-धीरे उन्होंने आधुनिक तरीकों से उत्पादन बढ़ाना सीखा, जैसे तालाबों में सही घनत्व पर मछली डालना, संतुलित आहार देना और पानी की नियमित जांच करना। 2021 में उन्हें प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत ₹8.50 लाख की सरकारी सहायता भी मिली, जिससे उनके तालाबों के विस्तार और उपकरणों में मदद मिली।

आज सुजीत के साथ रायबरेली, उन्नाव और प्रतापगढ़ जिलों के 50 से अधिक किसान जुड़ चुके हैं, जो उनसे प्रशिक्षण लेकर अपने यहां भी मछली पालन कर रहे हैं। वे इन किसानों को तालाब बनाने के तरीके, मछली के बीज चुनने और बाजार तक पहुंच बनाने में भी मदद करते हैं।

हाल की रिपोर्टों में उनके नेटवर्क का दायरा बढ़कर लगभग 350 एकड़ तक पहुंचने की बात कही गई है, जबकि सुजीत की अपनी मूल जमीन 10 हेक्टेयर यानी लगभग 25 एकड़ ही है। यह फर्क इसलिए है क्योंकि इसमें उनसे जुड़े बाकी किसानों की जमीन भी शामिल मानी जा रही है, यानी अकेले उनके तालाब नहीं बल्कि पूरा नेटवर्क इस आंकड़े में आता है।

एक वक्त सॉफ्टवेयर कोड लिखने वाले सुजीत अब तालाबों के पानी की गुणवत्ता, ऑक्सीजन स्तर और मछलियों के आहार की योजना बनाते हैं। उनकी कहानी क्षेत्र के युवाओं को परंपरागत खेती से अलग राह अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है, खासकर उन लोगों को जो शहरों में नौकरी कर रहे हैं पर गांव लौटकर कुछ करना चाहते हैं।

रायबरेली और आसपास के जिलों में पहले मछली पालन ज्यादातर छोटे स्तर पर, परंपरागत तरीके से होता था। सुजीत के आने के बाद इलाके में आधुनिक तालाब प्रबंधन, बेहतर बीज और संतुलित आहार की समझ बढ़ी है, जिससे छोटे किसानों को भी अपनी उपज बढ़ाने में मदद मिली है।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना जैसी केंद्रीय योजनाओं का मकसद ही देश में मछली उत्पादन बढ़ाना और इससे जुड़े किसानों की आय में सुधार करना है। सुजीत का उदाहरण दिखाता है कि अगर कोई किसान इस योजना का सही इस्तेमाल करे, तो तालाबों के विस्तार और आधुनिकीकरण में यह सहायता कितनी कारगर हो सकती है।

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