एग्रीवेट: पंजाब में गुरुवार से धान की सरकारी खरीद शुरू हो गई है. इसी के साथ राज्य के कई इलाकों में पराली जलाने के मामले भी सामने आने लगे हैं. पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में अब तक 59 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गई हैं. धान की कटाई शुरू होने के साथ आने वाले दिनों में पराली जलाने की घटनाएं बढ़ने की आशंका रहती है. सरकार और प्रशासन की ओर से किसानों से पराली न जलाने और इसके बेहतर प्रबंधन की अपील की जा रही है.
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक राज्य में 59 खेतों में पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गई हैं. इनमें से 47 मामले अमृतसर, तरनतारन और गुरदासपुर में सामने आए हैं. इन जिलों में धान की शुरुआती किस्मों की कटाई शुरू हो गई है. अमृतसर में सबसे ज्यादा 35 मामले दर्ज किए गए हैं. इसके बाद तरनतारन में 9, फिरोजपुर में 5, गुरदासपुर में 3 और मोगा में 2 घटनाएं हुई हैं. साथ ही फरीदकोट, फाजिल्का, होशियारपुर, एसबीएस नगर और पटियाला में एक-एक मामला सामने आया है.
बुधवार को पंजाब में पराली जलाने के 7 नए मामले दर्ज किए गए. अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में धान की कटाई बढ़ने के साथ पराली जलाने की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं. पिछले साल इसी अवधि में राज्य में 95 खेतों में आग लगाई गई थी. इस सीजन में पंजाब में करीब 31 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती हुई है. इससे करीब 1.881 करोड़ टन धान की पराली निकलने का अनुमान है. पिछले साल करीब 1.952 करोड़ टन पराली पैदा हुई थी.
पंजाब सरकार ने इस सीजन में 180 लाख मीट्रिक टन (LMT) धान खरीद का लक्ष्य रखा है. इसके लिए राज्यभर में 1,886 खरीद केंद्र बनाए गए हैं. सरकार को इस बार धान की बंपर पैदावार की उम्मीद है. धान खरीद के लिए केंद्र सरकार ने 42,786.68 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट मंजूर की है. वहीं, राज्य की एजेंसियों ने करीब 5 लाख गांठ बारदाना जुटाया है.
धान खरीद शुरू होने से पहले ही राज्य के गोदामों में जगह की कमी बड़ी चुनौती बन गई है. राज्य के गोदामों में पिछली खरीद के करीब 280 लाख टन खाद्यान्न अभी भी रखा हुआ है. इन अनाज का उठाव नहीं होने से गोदामों में जगह खाली नहीं हो पा रही है. आने वाले हफ्तों में मंडियों में धान की आवक बढ़ने की उम्मीद है. ऐसे में खरीद एजेंसियों और राइस मिलर्स के सामने नए धान को रखने के लिए जगह जुटाना मुश्किल हो सकता है. इससे धान की खरीद और उठान की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है.
पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं पर प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है. पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने अब तक दर्ज 59 घटनाओं में से 46 मामलों की जांच की. इनमें 16 मामलों में पराली जलाने की पुष्टि हुई है. खास बात यह है कि पराली जलाने के 12 मामलों में किसानों पर कुल 60 हजार रुपये का पर्यावरण मुआवजा लगाया गया है.
पटियाला के समाना ब्लॉक में पराली जलाने के नियमों का उल्लंघन करने पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की गई है. इसके अलावा किसानों के जमीन रिकॉर्ड में 9 रेड एंट्री की गई हैं. निगरानी और जिम्मेदारी संभालने वाले कर्मचारियों को चेतावनी नोटिस भी जारी किए गए हैं. PPCB के नोडल अधिकारी राजीव गुप्ता ने बताया कि फील्ड टीमों को पराली जलाने की घटनाओं से निपटने के लिए SOP जारी किए गए हैं. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में धान की कटाई बढ़ने पर ड्रोन से भी निगरानी की जाएगी. फील्ड अधिकारियों को SOP का सख्ती से पालन कराने और आग की घटनाओं पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं. वहीं, पंजाब के संगरूर में किसानों और किसान संगठनों ने पराली जलाने की निगरानी के लिए ड्रोन तैनात करने की सरकार की योजना का विरोध किया है. किसान संगठनों का कहना है कि ड्रोन से निगरानी करने के बजाय सरकार को पराली प्रबंधन की मशीनों की कमी दूर करनी चाहिए.