किसानों को बिजली देने के लिए कैबिनेट से 2761 करोड़ की मंजूरी, 2554 कृषि फीडर सोलर से लैस होंगे – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Bihar Cabinet Decisions: बिहार में किसानों और आम लोगों से जुड़े कई अहम फैसलों पर कैबिनेट ने मुहर लगाई है. राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में कुल 30 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. इनमें कृषि क्षेत्र के लिए सबसे प्रमुख फैसला राज्य के बचे हुए 2,554 कृषि फीडरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने का है. इसके तहत 2,585 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जाएंगे. वहीं, आंगनबाड़ी के पोषण कार्यक्रम में टेक-होम राशन की व्यवस्था को नए तरीके से लागू करने और माप-तौल के नियमों को मजबूत करने का भी फैसला लिया गया है.

किसानों की खेती और सिंचाई  के लिए बिजली की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में कैबिनेट ने बड़ा फैसला लिया है. राज्य के शेष 2,554 कृषि फीडरों के सोलराइजेशन को मंजूरी दी गई है. इसके तहत कुल 2,585 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जाएंगे. योजना को लागू करने के लिए 2,714.25 करोड़ रुपये के अनुदान को मंजूरी दी गई है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह अनुदान 1.05 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट की दर से दिया जाएगा.

इस योजना के तहत राज्य के 946 विद्युत उपकेंद्रों में सोलराइजेशन से जुड़ा काम किया जाएगा. योजना के क्रियान्वयन में ग्राम पंचायतों की भागीदारी और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए 47.30 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि भी रखी गई है. इस तरह कृषि फीडरों के सोलराइजेशन के लिए कुल 2,761.55 करोड़ रुपये के अनुदान को मंजूरी मिली है.

कृषि फीडरों को सौर ऊर्जा  से जोड़ने का उद्देश्य खेती के लिए बिजली की उपलब्धता और ऊर्जा व्यवस्था को मजबूत करना है. रिपोर्टों के मुताबिक, इस योजना से कृषि क्षेत्र के लिए बिजली खरीद पर होने वाले खर्च को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है. यानी योजना का सीधा फोकस केवल सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि क्षेत्र की बिजली जरूरत को सौर ऊर्जा के जरिए पूरा करने की दिशा में भी है. आने वाले समय में योजना के क्रियान्वयन और सोलर प्लांट स्थापित होने के बाद इसका वास्तविक असर सामने आएगा.

कैबिनेट ने सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 के तहत टेक-होम राशन को लेकर भी व्यवस्था  को मंजूरी दी है. इसके तहत लाभार्थियों को रेसिपी आधारित सुदृढ़ीकृत खाद्य उत्पाद (RBFFP) उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है. इन खाद्य उत्पादों के निर्माण और आपूर्ति के लिए निर्माताओं और आपूर्तिकर्ताओं का चयन गुणवत्ता और लागत के आधार पर किया जाएगा. इसका संचालन PPP मॉडल के तहत 15 वर्षों के लिए किए जाने की व्यवस्था है. इससे आंगनबाड़ी पोषण कार्यक्रम के तहत दिए जाने वाले टेक-होम राशन की आपूर्ति व्यवस्था में बदलाव आएगा. RBFFP की आपूर्ति को लेकर बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन की ओर से पहले भी PPP मॉडल पर निविदा जारी की जा चुकी है.

कैबिनेट ने बिहार विधिक माप विज्ञान (प्रवर्तन) संशोधन नियमावली, 2026 को भी मंजूरी दी है. इसके साथ ही बिहार विधिक माप विज्ञान नियमावली, 2026 से जुड़े प्रावधानों को भी स्वीकृति दी गई है. इन नियमों का दायरा कारोबार, वस्तुओं, सेवाओं और माप-तौल से जुड़े उपकरणों  तक रहेगा. इसके तहत माप-तौल के उपकरण बनाने, बेचने, बांटने, मरम्मत करने और इस्तेमाल करने वालों पर भी नियम लागू होंगे. कृषि के नजरिए से इसका महत्व इसलिए है क्योंकि अनाज, फल, सब्जियों और दूसरी कृषि उपज की खरीद-बिक्री में सही वजन किसानों और खरीदारों दोनों के लिए महत्वपूर्ण होता है.

नई व्यवस्था में पानी, गैस और बिजली  के मीटर, तौल मशीन, लोड सेल, बीम स्केल और मापन टेप जैसे उपकरणों की जांच और सत्यापन की व्यवस्था शामिल होगी. इसके अलावा पेट्रोल-डीजल, CNG, LPG, LNG और हाइड्रोजन डिस्पेंसर जैसे उपकरण भी माप-तौल सत्यापन के दायरे में आएंगे.

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