गुजरात में मूंगफली की फली विकास अवस्था में सफेद लट व चूसक कीट का खतरा, तुरंत करें यह छिड़काव – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 30 सितंबर 2026, जूनागढ़ (गुजरात): गुजरात में मूंगफली की फली विकास अवस्था में सफेद लट व चूसक कीट का खतरा, तुरंत करें यह छिड़काव – गुजरात के जूनागढ़ जिले में मूंगफली की फसल इस समय पेगिंग और फली विकास की महत्वपूर्ण अवस्था में है, और ठीक इसी दौर में खेतों में सफेद लट (व्हाइट ग्रब) का प्रकोप देखा गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के क्षेत्रीय मौसम केंद्र, अहमदाबाद द्वारा 26 सितंबर 2026 को जारी गुजरात राज्य कृषि-मौसम परामर्श बुलेटिन संख्या 75/2026 में किसानों को सतर्क किया गया है।

सफेद लट जमीन के भीतर रहकर पौधों की जड़ों और विकसित हो रही फलियों को काटकर नुकसान पहुंचाती है, जिससे पौधे अचानक मुरझाने लगते हैं और उपज पर सीधा असर पड़ता है। इसके साथ ही एफिड और जैसिड जैसे चूसक कीट भी सक्रिय हैं, जो पत्तियों का रस चूसकर पौधों को कमजोर करते हैं।

बुलेटिन के मुताबिक सफेद लट के नियंत्रण के लिए क्लोरपायरीफॉस 20% ईसी का छिड़काव 20 मिली प्रति 10 लीटर पानी (यानी 0.04 प्रतिशत सांद्रता) की दर से करने की सलाह दी गई है। वहीं चूसक कीटों के लिए इमिडाक्लोप्रिड की 4 मिली प्रति 10 लीटर पानी, या एसिटामिप्रिड की 2 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी की मात्रा में छिड़काव किया जा सकता है।

किसानों को सलाह दी गई है कि छिड़काव सुबह या शाम के ठंडे समय में करें और तय मात्रा से ज्यादा दवा का इस्तेमाल न करें, ताकि फसल और मिट्टी दोनों सुरक्षित रहें। छिड़काव करते समय हाथों व चेहरे को दस्ताने-मास्क से ढकना और खाली दवा के डिब्बों को खेत या नाले में न फेंकना भी ज़रूरी सावधानियां हैं, जिनका पालन हर एडवाइजरी में दोहराया जाता है। दवा घोलते समय पानी की सही मात्रा नापना भी ज़रूरी है, क्योंकि कम पानी में ज्यादा गाढ़ा घोल फसल की पत्तियों को नुकसान पहुंचा सकता है।

मूंगफली की फली विकास अवस्था फसल के जीवनचक्र का सबसे नाज़ुक दौर माना जाता है, क्योंकि इसी समय जमीन के भीतर फलियां बन रही होती हैं और जड़ों को हुआ कोई भी नुकसान सीधे उपज घटाता है। यही वजह है कि IMD और कृषि विभाग हर साल इस अवस्था के आसपास किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह जारी करते हैं।

इसी बुलेटिन में भरूच जिले की कपास फसल के लिए भी सलाह दी गई है। वहां चूसक कीटों के लिए फ्लोनिकामिड 50 डब्ल्यूजी की 3 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी, या डाइफेंथीयूरॉन 50 डब्ल्यूपी की 10 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी की मात्रा सुझाई गई है, जबकि जड़ सड़न व उकठा रोग के लिए मैंकोज़ेब 75 डब्ल्यूपी 27 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 40 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी की सलाह दी गई है।

नवसारी जिले में गन्ने की लाल सड़न व उकठा रोग के लिए कार्बेन्डाजिम 50 डब्ल्यूपी की 10 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी, और सफेद मक्खी के लिए एज़ाडिरेक्टिन 10,000 पीपीएम की 20 मिली प्रति 10 लीटर पानी की मात्रा बताई गई है। सूरत जिले में धान के तना छेदक के लिए कार्टैप हाइड्रोक्लोराइड 75 एसजी की 10 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी छिड़कने की सलाह दी गई है।

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