कीटों से फसल बचाने पर अमेरिका खर्च करेगा 5 लाख डॉलर, भारत में किसानों के लिए क्या है प्लान? – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Crop Protection: फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीट किसानों की पैदावार और कमाई दोनों पर असर डाल सकते हैं. इसी चुनौती से निपटने के लिए अमेरिका में अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) ने गन्ने, चरागाह और दूसरी फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले पेस्ट्योर मिलीबग कीट की रोकथाम के लिए शोध कार्यों पर 5 लाख डॉलर (4.80 करोड़ रुपये) की मदद देने की एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि है. इसके तहत कीट के असर, नियंत्रण के तरीके और प्रतिरोधी गन्ने की किस्मों पर काम किया जाएगा. ऐसे में यह जानना भी जरूरी है कि भारत में भी कीट नियंत्रण के लिए सरकार क्या कर रही है और किसानों को कितनी सब्सिडी आदि का लाभ मिल रहा है.

USDA की योजना  के तहत लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी एग्रीकल्चर सेंटर को 5 लाख डॉलर यानी 4.80 करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं. इसका उद्देश्य पेस्ट्योर मिलीबग से फसलों को होने वाले नुकसान को समझना और उसके नियंत्रण के बेहतर तरीके तैयार करना है. शोधकर्ता गन्ने की सेहत और पैदावार पर कीट के असर को मापेंगे. इसके साथ ही अलग-अलग उपचारों की जांच और ऐसी गन्ने की किस्मों की पहचान की जाएगी, जिनमें इस कीट के प्रति प्राकृतिक प्रतिरोध हो.

कृषि के संयुक्त राज्य अमेरिका विभाग।

USDA की इस परियोजना में सिर्फ कीट नियंत्रण पर शोध  नहीं किया जाएगा, बल्कि किसानों को कीट की पहचान करने की जानकारी भी दी जाएगी. इसके लिए उत्पादकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा और आसान कीट प्रबंधन गाइड तैयार की जाएगी. अमेरिका का कृषि विभाग इस कीट को प्राथमिकता वाले कीटों में शामिल कर रहा है, ताकि संघीय, राज्य और स्थानीय स्तर पर मिलकर इसके खिलाफ काम किया जा सके.

भारत में किसानों को फसलों में लगने वाले कीटों और रोगों की पहचान और प्रबंधन की ट्रेनिंग मुख्य रूप से कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK), राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और ICAR संस्थानों के जरिए दी जाती है. KVK में किसानों को कीट पहचान, बीज उपचार और जैविक कीटनाशकों के इस्तेमाल का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलता है. वहीं, IARI नई दिल्ली और NRIIPM जैसे संस्थान किसानों व मास्टर ट्रेनर्स के लिए विशेष प्रशिक्षण और कार्यशालाएं आयोजित करते हैं. इसके अलावा गांवों में IPM पाठशाला के जरिए भी किसानों को कई हफ्तों तक कीट प्रबंधन की जानकारी दी जाती है.

फसल में लगे कीट और रोग. (Photo Credit-Canva)

भारत में फसलों को कीटों और बीमारियों  से बचाने के लिए राष्ट्रीय एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) कार्यक्रम महत्वपूर्ण व्यवस्था है. इसमें केवल रसायनों पर निर्भर रहने के बजाय खेत की साफ-सफाई, फसल प्रबंधन, यांत्रिक उपाय और जैविक तरीकों से कीट नियंत्रण पर जोर दिया जाता है. किसानों को कीटों की निगरानी और नियंत्रण के तरीकों की जानकारी देने के लिए केंद्रीय एकीकृत कीट प्रबंधन केंद्रों के माध्यम से प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता दी जाती है.

कृषि विभाग को अनुसार, भारत में किसानों को कीटों  से बचाने के लिए अलग-अलग योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता भी दी जाती है. सामान्य फसलों में IPM या कीटनाशक से जुड़ी लागत पर 50 प्रतिशत तक और अधिकतम 5,000 रुपये प्रति हेक्टेयर सहायता का प्रावधान बताया गया है. बागवानी फसलों के लिए अधिकतम 4 हेक्टेयर तक 1,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता का उल्लेख है.

वहीं, केंद्र सरकार की राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) जैसी सामान्य एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) योजनाओं में भी आमतौर पर 50 प्रतिशत तक सहायता का प्रावधान होता है. इसके अलावा, बिहार जैसे राज्यों में कीट नियंत्रण वाले ट्रैप उपकरणों  पर केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से 75 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलने की व्यवस्था बताई गई है. वहीं अन्य राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश में भी 70 से 75 फीसदी तक सब्सिडी दी जा रही है. इसके साथ ही हरियाणा सरकार कृषि यंत्र खरीदने पर प्रोत्साहन राशि दे रही है.

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