एग्रीवेट: त्योहारी और शादी के सीजन में प्याज की बढ़ती कीमतों को काबू करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सरकार अब बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों और जिला स्तर की मंडियों में भी बफर स्टॉक से सस्ता प्याज पहुंचाएगी. सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, पहली बार सरकार ने प्याज की कीमतों को स्थिर रखने की योजना का दायरा छोटे शहरों और जिला बाजारों तक बढ़ाया है. इसका मकसद छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में प्याज की कीमतों को बढ़ने से रोकना है. ऐसे 25 सितंबर तक देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत 54.38 रुपये प्रति किलो पहुंच गई थी. यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब दोगुनी है.
न्यूज वेबसाइट मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार को चिंता है कि बड़े शहरों में प्याज महंगा होने का असर अब छोटे शहरों और ग्रामीण बाजारों पर भी तेजी से पड़ सकता है. सोशल मीडिया और रियल टाइम कीमतों की जानकारी आसानी से उपलब्ध होने से शहरी और ग्रामीण बाजारों के बीच कीमतों का अंतर कम हुआ है. ऐसे में बड़े शहरों में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में होने वाला बदलाव छोटे शहरों में भी कीमतों और ग्राहकों की उम्मीदों को तेजी से प्रभावित करता है. सरकार का बफर स्टॉक से प्याज की सप्लाई बढ़ाने का फैसला इसी बढ़ते असर को रोकने के लिए है.
हालांकि, केद्र सरकार दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता सहित 100 से अधिक बड़े शहरों में 35 रुपये किलो की दर से प्याज बेच रही है. इससे आम जनता को महंगाई से राहत मिली है. उपभोक्ता मामलों के विभाग के मुताबिक, बाजार में प्याज की सप्लाई बढ़ने से कई इलाकों में कीमतों पर दबाव कम हुआ है. इससे कुछ राज्यों में प्याज के दाम स्थिर हुए हैं, जबकि कई जगहों पर गिरावट भी दर्ज की गई है. विभाग के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्याज की खुदरा कीमतें या तो स्थिर रहीं या कम हुई हैं. सरकार का कहना है कि बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ने से आने वाले दिनों में कीमतों पर और असर पड़ सकता है.
खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली समेत कई राज्यों में प्याज की खुदरा कीमतों में कमी आई है. 16 सितंबर से 23 सितंबर के बीच कई राज्यों में प्याज के दाम नीचे आए.