एग्रीवेट: Ganna Mulya 2026: गन्ना मूल्य बढ़ोत्तरी की उम्मीद लगाए किसानों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा. किसानों को उम्मीद थी कि आज 18 सितंबर को केंद्र सरकार और चीनी उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में गन्ना के एफआरपी को बढ़ाने को लेकर भी बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया जा सकता है. लेकिन, उपभोक्ता मामले मंत्रालय की ओर से आई जानकारी के अनुसार 1 अक्तूबर 2026 से शुरू होने वाले नए पेराई सीजन के लिए 365 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य रखा गया है. बता दें कि यह मूल्य कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद मई 2026 में घोषित किया गया था. हालांकि, अभी उम्मीद है कि राज्य सरकारें गन्ना मूल्य बढ़ा सकती हैं.
उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार शुक्रवार को भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (ISMA), राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाने संघ और चीनी व्यापार के प्रतिनिधियों के साथ संयुक्त बैठक की गई. बैठक में चीनी की कीमतों और उपलब्धता को बनाए रखने के साथ ही आयात और स्टॉक लिमिट को लेकर निर्णय लिए गए हैं. बताया गया कि चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने और बाजार उपलब्धता बेहतर करने के लिए सरकार ने स्टॉक लिमिट में बदलाव किया है और थोक विक्रेताओं को राहत दी है.
मंत्रालय के अनुसार सरकार ने थोक विक्रेताओं के लिए चीनी स्टॉक रखने की सीमा बढ़ाकर 30 दिन कर दी है. पहले थोक विक्रेता अधिकतम 15 दिन की जरूरत के बराबर चीनी रख सकते थे. अब 30 दिन की चीनी रखने की अनुमति होगी, लेकिन अतिरिक्त 15 दिन के लिए रखी जाने वाली चीनी केवल अग्रिम प्राधिकरण योजना और टैरिफ दर कोटा के तहत आयात की गई चीनी से होनी चाहिए.
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने साफ किया है कि खुले बाजार से खरीदी गई चीनी के भंडारण की सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है. ऐसी चीनी अभी भी केवल 15 दिनों की खपत के बराबर ही रखी जा सकेगी. सरकार ने यह फैसला चीनी के बड़े थोक विक्रेताओं के साथ चर्चा के बाद लिया है. इसका उद्देश्य त्योहारी सीजन में उद्योगों को पर्याप्त चीनी उपलब्ध कराना और बाजार में कीमतों को स्थिर रखना है.
मंत्रालय के मुताबिक चीनी की मिल कीमतों में करीब 25 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि खुदरा कीमतें अपने सबसे ऊंचे स्तर से करीब 10 फीसदी ही कम हुई हैं. सरकार का कहना है कि मिलों से सस्ती हुई चीनी का पूरा फायदा अभी आम उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा है. इसलिए चीनी व्यापारियों, थोक और खुदरा विक्रेताओं से कीमतों में कमी का लाभ जल्द उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की अपील की गई है.
भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत, भाकियू अराजनैतिक के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह, भाकियू चढ़ूनी के गुरनाम सिंह चढूनी गन्ना किसानों के लिए मूल्य बढ़ाने की मांग पहले ही कर चुके हैं. किसान संगठनों ने राज्य और केंद्र सरकार से पहले ही कहा है कि चीनी का मूल्य 60 रुपये के पार पहुंचा है. इस बार कम बारिश और फसल में बीमारियों के चलते कृषि लागत भी बढ़ी है. ऐसे में किसानों को गन्ना मूल्य बढ़ाकर 600 रुपये या 650 रुपये प्रति क्विंटल तक किया जाए. हालांकि, राज्य सरकारें सपोर्ट प्राइस के रूप में राशि बढ़ाकर दे सकती है. यूपी सरकार 400 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य दे रही है. किसानों को उम्मीद है कि सरकार इसे बढ़ाने की घोषणा जल्द करेगी.