एग्रीवेट: बिहार में मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए 195 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है. यह रकम आधुनिक मछली इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने और अच्छे मछली बीज उत्पादन पर खर्च किए जाएंगे. इसके साथ ही बुनियादी बाजार और मार्केटिंग ढांचे को भी मजबूत किया जाएगा. यह राशि एक जिले पर खर्च होगी. कहा जा रहा है कि अन्य जिलों के लिए भी इसी तरह मछली उत्पादन बढ़ाने के इरादे से चरणबद्ध तरीके से राशि जारी की जाएगी.
बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अनुसार राज्य का मौजूदा मछली उत्पादन सालाना करीब 9.17 लाख टन मछली का उत्पादन होता है, जिसे सरकार 2028 तक बढ़ाकर 12.7 लाख टन करने का लक्ष्य लेकर चल रही है. बता दें कि 2020-21 में 6.83 लाख टन मछली उत्पादन था. इस उत्पादन को बढ़ाने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है और मछलीपालकों को 80 फीसदी तक सब्सिडी दी जा रही है.
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने बिहार के सीवान जिले में आधुनिक मत्स्य अवसंरचना के विकास के लिए बिहार सरकार को 195 करोड़ रुपये का ऋण मंजूर किया है. नाबार्ड ने एक बयान में कहा कि यह ऋण ‘मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष’ (FIDF) के तहत मंजूर किया गया है. यह राशि जिले में मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे को विकसित करने पर खर्च की जाएगी.
नाबार्ड ने जारी बयान में कहा कि सीवान में मत्स्य अवसंरचना विकास के लिए 195 करोड़ रुपये के ऋण को मंजूरी दी गई है और यह रकम अलग-अलग कार्यों के लिए खर्च की जाएगी. बयान के मुताबिक परियोजना के तहत मत्स्य पालन इकाइयों, मछली के बीज उत्पादन केंद्रों और हैचरी के साथ संग्रह एवं लैंडिंग केंद्र, कोल्ड स्टोरेज, कोल्ड-चेन, प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग इकाइयां और आधुनिक मछली बाजार विकसित किए जाएंगे.
नाबार्ड ने कहा कि इसके साथ ही मछली परिवहन और मार्केटिंग की सुविधाओं को भी विकसित करने पर रकम खर्च की जाएगी. कहा गया है कि इस परियोजना का उद्देश्य मछली उत्पादन बढ़ाना, मत्स्य क्षेत्र की मूल्य शृंखला को मजबूत करना तथा मछुआरों, सहकारी समितियों, स्वयं-सहायता समूहों और ग्रामीण युवाओं की आय एवं आजीविका में सुधार करना है.
इस रकम की मंजूरी मिलने के बाद मछली पालन करने वाले किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा, जिससे मछली बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा.
कोल्ड स्टोरेज और कोल्ड-चेन से मछली जल्दी खराब होने का नुकसान कम हो जाएगा.
हैचरी और बीज केंद्र बढ़ने से किसानों को स्थानीय स्तर पर बेहतर मछली बीज उपलब्ध होने की सुविधा मिलेगी.
प्रोसेसिंग और पैकेजिंग की सुविधा मिलने से मछली को बेहतर तरीके से बाजार तक पहुंचाया जा सकेगा और मूल्यवर्धन के अवसर बढ़ेंगे.
परिवहन और मार्केटिंग व्यवस्था मजबूत होने से किसानों की बाजार तक पहुंच बेहतर हो सकती है.
छोटे और सीमांत मछली किसानों के साथ मत्स्य सहकारी समितियों, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और व्यवसाय के अवसर बढ़ने की उम्मीद है.