एग्रीवेट: Dhanuka Polin Fungicide: फसल सुरक्षा उत्पाद बनाने वाली दिग्गज कंपनी धानुका एग्रीटेक ने धान की फसल को फफूंद से बचाने के लिए अपना नाय उत्पाद ‘पोलिन’ पेश किया है. कंपनी का दावा है कि किसान फसल में पोलिन का इस्तेमाल करके फफूंद रोग को दूर भगाने में सफलता पा रहे हैं. इसके अलावा लीफ और नेक ब्लास्ट बीमारी को खत्म करने में भी यह उत्पाद कारगर है. कंपनी का दावा है कि कई परीक्षणों से गुजारने के बाद सफल नतीजे मिले हैं और हर तरह की टेस्टिंग के बाद इस उत्पाद को बाजार में उतारा जा रहा है.
धानुका एग्रीटेक लिमिटेड ने धान की फसल में ‘लीफ और नेक ब्लास्ट’ बीमारी को नियंत्रित करने के लिए नई पीढ़ी का फंफूदनाशी ‘पोलिन’ पेश करने की एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि है. कंपनी ने बयान में कहा कि यह फंफूदनाशी जापान की निप्पॉन सोडा कंपनी लिमिटेड (निस्सो) के साथ रणनीतिक तकनीकी सहयोग से विकसित किया गया है. यह धान की फसल को बीमारियों से बचाने में कारगर है.
कंपनी ने बताया कि यह नया पोलिन उत्पाद कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में उतारा गया है, जहां धानुका ने धान के किसानों के बीच ‘लीफ और नेक ब्लास्ट’ के असरदार प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान भी शुरू किए हैं. कंपनी ने कहा कि इस उत्पाद का धान फसल में इस्तेमाल करके परीक्षण और नतीजे सफल होने के बाद पेश किया है. इस उत्पाद के फसल की सुरक्षा करने के परिणाम जबरदस्त रहे हैं.
धनुका एग्रीटेक के प्रबंध निदेशक राहुल धानुका ने बयान में कहा कि पोलिन के जरिये हम धान में ‘ब्लास्ट’ रोग के नियंत्रण के लिए पेटेंट वाली जापानी रसायन तकनीक उपलब्ध करा रहे हैं, जो पूरी तरह नए तरीके से काम करती है. यह किसानों को ‘ब्लास्ट’ से स्वस्थ दानों तक गहरी और लंबे समय तक चलने वाली सुरक्षा देता है, जिससे किसान को बार-बार स्प्रे करने पर होने वाले खर्च को बचाता है.
राहुल धानुका ने कहा कि हमारा मानना है कि जब कोई किसान फसल की सेहत पर निवेश करता है, तो रसायन से पक्का नतीजा मिलना चाहिए. पोलिन उत्पाद में दोहरी क्षमता होती है, जो फसल के उत्तक में घुसकर उन पत्तों और पौधे के नए हिस्सों की भी सुरक्षा करती है जिन पर स्प्रे नहीं किया गया है.
कंपनी की ओर से धान की फसल में पोलिन उत्पाद के इस्तेमाल करने का तरीका बताया गया है. कहा गया है कि फसल की वृद्धि के अहम चरणों में रोग संक्रमण के शुरुआती लक्षण दिखने पर 200 लीटर पानी में 100 मिली प्रति एकड़ की तय मात्रा में किसान इसका इस्तेमाल करें. पोलिन लंबे समय तक असरदार होता है और फसल को सुरक्षा देता है.